‘गुणीजन सभा’ में नृत्यांगना नंदिनी सिंह देंगीं प्रस्तुति

गुणीजन सभा के सिलसिले को शबाना डागर आगे बढ़ा रही हैं और वे डागर घराने की ध्रुपद वाणी की बीसवीं पीढ़ी से हैं और ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष भी हैं. वे चाहती हैं कि भारतीय संगीत, साहित्य और कला सशक्त हों और इनका विस्तार किया जाए. उनकी कोशिशों से जयपुर और दिल्ली के सुधि श्रोताओं के साथ से गुणीजन सभा को नए आयाम मिल रहे हैं.

दिल्ली.‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ और ‘ द डागर आर्काइव्ज़’ द्वारा ‘गुणीजन सभा’ की 22 वीं आयत दिल्ली में 28 अप्रैल को शाम 7 बजे आयोजित की जाएगी. 22 वीं आयत में प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना नंदिनी सिंह प्रस्तुति देंगी. ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष शबाना डागर ने बताया कि नंदिनी जी को भारत सरकार की ओर से कथक में शोधकार्य के लिए सीनियर फैलोशिप मिली हुई है। इतना ही नहीं वो करीब दो दशक तक दिल्ली के ‘श्री राम भारतीय कला केंद्र’ में वरिष्ठ गुरु के तौर पर वरिष्ठ कथक गुरू भी रह चुकी हैं।दिल्ली के अमलतास इंडिया हैबिटेट सेंटर (लोधी रोड) में आयोजित 22 वीं आयत की सूत्रधार मशहूर संगीत समीक्षक डॉ.मंजुल सक्सेना होंगी. नंदिनी जी के साथ उस्ताद बाबर लतीफ़(तबला),उस्ताद शोएब हसन (गायन),उस्ताद अकरम हुसैन(सारंगी)संगत करेंगे.

प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना नंदिनी सिंह का जयपुर घराने से ताल्लुक है.उन्होंने नृत्य जगत में एक पुख्ता पहचान बनाई है। आज उनकी शिष्य रहीं कई लड़कियां कथक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रही हैं।नंदिनी जी ने रूस, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, वेस्टइंडीज़, अफगानिस्तान, मॉरीशस, श्रीलंका आदि कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। उन्होंने 1996 में एक चैरिटेबल संस्था वासुकी नाट्यशाला की शुरुआत की। नंदिनी ने दिल्ली की झोंपड पट्टी में रहने वाली 15 लड़कियों को मुफ्त में नृत्य सिखाना शुरू किया ये सिलसिला सालों से जारी है। सन 1998 में राजा राममोहन राय फाउंडेशन ने उन्हें बेस्ट टीचर के पुरस्कार से सम्मानित किया। भारत सरकार की ओर से नंदिनी को कथक में शोधकार्य के लिए सीनियर फैलोशिप मिली हुई है।

 

 

 

 

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