गुणीजन सभा-22 : कथक गुरु नंदिनी सिंह

परवीन अर्शी 

दिल्ली.अप्रैल 28, 2017 की उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ और ‘ द डागर आर्काइव्ज़’ द्वारा आयोजित गुणीजन सभा-22की एक शाम यादगार तारीखी भी हो गई जब प्रख्यात कथक गुरु विदुषी नंदिनी सिंह ने शिरकत कर संगीत कला के सुधि श्रोताओं और शिष्यों को ऐसी प्रेरणा दी जिस की महक बरसों यादों में महकती रहेगी.इस मौके पर कथक गुरु नंदिनी सिंह ने कहा भारतीय कला विधाओं जैसे कथक नृत्य इत्यादि के घराने तो केवल दो ही होते हैं …एक सुन्दर, दूसरा अति सुन्दर. ‘सुन्दर’ वह जिसका आनंद लेकर हम एक बार में ही संतुष्ट हो जाते हैं.

मंच पर प्रस्तुति देतीं कथक गुरु नंदिनी सिंह की शिष्याएं और गुणीजन सभा के मेहमानों के साथ बैठीं शबाना डागर

‘अतिसुंदर’ जिसकी अनंत अनुभूति के लिए हम विवश हो जाते हैं. सभी भारतीय नृत्य शैलियां भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से निकली हैं इसलिए सभी सुन्दर और आधिकारिक हैं. हां, समय प्रवाह में अपने अपने क्षेत्र के सभ्यता-संस्कृति के प्रभाव में आकर कुछ निजी विशिष्टताएं आत्मसात कर ली हैं यही इन शैलियों के पारस्पारिक अंतर का आधार बन गई हैं.
दो घंटे की अपनी प्रस्तुति में कथक गुरु नंदिनी सिंह ने कथक की बारीकियों,सौंदर्य और विकास के सामजिक,आध्यात्मिक पहलुओं से परिचित कराया. उनकी योग्य शिष्याओं नीला मालाकार, पूर्णिमा रॉय और शैफाली तायल ने कुशल सुन्दर प्रदर्शन किया.सूत्रधार मशहूर संगीत समीक्षक डॉ.मंजुल सक्सेना थी. नंदिनी जी के साथ उस्ताद बाबर लतीफ़(तबला),उस्ताद शोएब हसन (गायन),उस्ताद अकरम हुसैन(सारंगी) ने संगत कर कार्यक्रम की लय बरकरार रखा.
शबाना डागर गुणीजन सभा के सिलसिले की अलमबरदार और डागर घराने की ध्रुपद वाणी की बीसवीं पीढ़ी से हैं और ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष भी हैं. शबाना जी ने गुणीजन सभा-22 की सफलता के लिए आमंत्रितों का आभार करते हुए कहा कि गुणीजन सभा-22 हम अपने सुधि श्रोताओं और शुभचिंतकों के सहयोग से ही पहुँच पाए हैं.

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