गुमनाम शहीदों को भूलकर,आओ जश्ने आज़ादी मनाएं

Category देश

 

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आज हमारा वतन आज़ाद है। इस आज़ादी को हमारे बुज़ुर्गों ने कितनी मुश्किल से हासिल किया इसे सिर्फ वही समझ सकता है जिसने अपने वतन के लिए कुछ किया हो. सिर्फ वतन परस्ती की नुमाइश करने से क़ुरबानी नहीं होती है इसके लिए दिल से मातृभूमि से प्यार करना ज़रूरी है. टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ जो अकेले संघर्ष शुरू किया था वह भारत के दूसरे राजों महाराजाओं,नवाबों की ओर से किसी तरह की मदद न मिलने की वजह से कामयाब नहीं हो सका था. यही वजह रही कि भारत में अंग्रेजों को लंबे समय तक शासन करने का मौका मिल गया था। इस लम्बी हुकूमत के पीछे वतन के उन गद्दारों का साथ मिला जो वतन परस्तों के दुश्मन थे. इन गद्दारों की मुखबरी पर हज़ारों – लाखों वतनपरस्तों को अंग्रेज़ों ने फांसी पर लटका दिया,इन गुमनाम शहीदों में से सिर्फ दो-तीन फीसद को ही हम याद करते हैं.गांधीजी हों कि पंडित नेहरू हों ‘मौलाना अबुलकलाम आज़ाद हों कि अली ब्रदर्स हों शहीद भगत सिंह हों कि अशफाक उल्लाह ख़ां शहीद हों ‘या फिर मौलाना मोहम्मद अली जौहर हों सभी ने पूरी ईमानदारी से आज़ादी के लिए भूमिका निभाई थी जिसकी वजह से अंग्रेजों को हुकूमत करना दुश्वार कर दिया था. आज हम आज़ादी की ७१वीं साल गिरह मना रहे हैं.देश की गरीब जनता को आज तक अपनी बुनियादी समस्याओं से निजात नहीं मिली है। आज भी गरीब आदमी रोटी,कपड़ा और मकान से जूझ रहा है लेकिन सारी सरकारें मौन हैं,उन्हें सिर्फ हुकूमत चाहिए. जब भी इलेक्शन नज़दीक होते हैं आम आदमी को थोड़ी सी जाति – धर्म की अफीम दे दी जाती है. बस बरसों से ये मुल्क इसी तरह दौड़ रहा है और आगे भी ये सफर यूँ ही जारी रहेगा. बहरहाल,हम जश्ने आज़ादी मनाएं. आज़ादी का ये दिन मुबारक हो…..

 

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