चंद्रभान ख़याल की ग़ज़लों से महकेगी ‘गुणीजन सभा’

दिल्ली.‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ और ‘ द डागर आर्काइव्ज़’ द्वारा ‘गुणीजन सभा’ की 23 वीं आयत दिल्ली में मंगलवार 30 मई को शाम 7 बजे आयोजित की जाएगी. 23वीं आयत में प्रसिद्ध शायर चंद्रभान ख़याल श्रोताओं से रूबरू होंगे. ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष शबाना डागर ने बताया कि चंद्रभान ख़याल उर्दू के जानेमाने शायर हैं, उनकी कई किताबें हैं और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुशायरों में शिरकत कर चुके हैं।दिल्ली के अमलतास इंडिया हैबिटेट सेंटर (लोधी रोड) में आयोजित 223 वीं आयत की निज़ामत (सूत्रधार) मशहूर शायरा डॉ.अमिता परसुराम ‘मीता’ करेंगी.मशहूर शास्त्रीय गायक उस्ताद ग़ुलाम अब्बास खान ख़याल साहब की ग़ज़लें पेश करेंगे.

शबाना डागर
शबाना डागर डागर घराने की ध्रुपद वाणी की बीसवीं पीढ़ी से हैं और ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष भी हैं. वे चाहती हैं कि भारतीय संगीत, साहित्य और कला सशक्त हों और इनका विस्तार किया जाए. उनकी कोशिशों से जयपुर और दिल्ली के सुधि श्रोताओं के साथ से गुणीजन सभा को नए आयाम मिल रहे हैं. गुणीजन सभा शबाना डागर की जी तोड़ कोशिशों का ही नतीजा है.

चन्द्रभान ख़याल
जाने माने शायर और वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रभान ख़याल का जन्म 30 अप्रैल 1946 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबाई में हुआ था। आप कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुशायरों,उर्दू सम्मेलनों, रेडियो और टीवी कार्यक्रमों और बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रोग्रामों में शिरकत करते रहे हैं। आपको यूपी उर्दू अकादमी पुरस्कार, दिल्ली उर्दू अकादमी पुरस्कार, माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय सम्मान, हिंदी उर्दू साहित्य संगम पुरस्कार, राष्ट्रीय एकता के लिए अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन पुरस्कार आदि सम्मान मिले हैं. ‘शोलों का शजर ‘, ‘गुमशुदा आदमी का इंतज़ार ‘ ग़ज़लों-नज़्मों के संकलन, कुमार पाशी-एक इंतेखाब,हिंदी में ‘सुलगती सोच के साये’ सुबह ए मशरिक़ की अज़ान प्रकाशित हुए हैं. इसके के अलावा उनका सबसे अहम काम पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद की पाकीज़ा ज़िन्दगी पर लम्बी नज़्म ‘लौलाक'(हदीस क़ुद्सी में ‘लौलाक लमा ख़लकतुलअफ़लाक’ की तरफ इशारा है यानी अगर तेरी (मुहम्मद सल्ल.) ज़ात न होती तो मैं आसमानों को पैदा नहीं करता) है, जिस पर उन्हें पुरस्कार भी मिला.

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