जब गुणीजन सभा रूहानियत से सराबोर हो गई

दिल्ली. गुणीजन सभा की 23वीं आयत में जब पैगंबर की सीरते-पाक का अक्स लफ़्ज़ों के जिस्म में मौसीक़ी की रूह में जब महका तो पूरा माहौल रूहानी हो गया.चन्द्रभान ‘ख़याल’ ने अपनी तवील नज़्म ‘लौलाक’ जब पेश की, जिसमें पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद (सल्ल.) की पूरी ज़िन्दगी को पद्य में लिखा है| जब ख़याल साहब ने अपनी इस लम्बी नज़्म के कुछ बंद पढ़ कर सुनाये, तो महफ़िल समां ही बदल गया. जब वही बंद अब्बास साहब ने गा कर पेश किये तो पूरे माहौल में रूहानियत सी छा गयी.

मेहमल पड़ने लगा अक़ीदों का शबाब
और इब्राहीम उतरे दश्त में लेकर शहाब
हो गया तामीर इस दुनिया में घर अल्लाह का
मिल गया भटके हुए लोगों को दर अल्लाह का
परबतों के दोष पर बैठा सुकुते मुज़महल
जी रहा था एक रफ़ीक़ व रहनुमा की आस में
हर घड़ी तजस्सुस था ‘आप ‘(सल्ल.) की निगाहों में
ये ज़मीन किसकी है ये आसमान किसका है
लफ़्ज़ों की तजल्ली सामने थी
बिजली सी फ़िज़ा में लहराई
‘ देखो ये पढ़ो’ इक भारी सदा
कानों में मुहम्मद (सल्ल.) के आई

गुणीजन सभा की 23वीं आयत 30 मई को पेश की गयी. पहली बार गुणीजन सभा में जश्न-ए-उर्दू शायरी मनाया गया| ये सभा मशहूर शायर चन्द्रभान ख़याल साहब की नुमाइंदगी में पेश की गयी| इस आयत की होस्ट थीं अमिता परशुराम जो खुद एक जानी मानी शायरा हैं और जिनका तखल्लुस है “मीता”. इस सभा की खासियत रही रामपुर सहसवान घराना के उस्ताद ग़ुलाम अब्बास खान साहब, जिन्होंने ख़याल साहब की नज्मों को बेहद खूबसूरती से मौसिकी में पिरोया, पेश किया और समां बांधा. सभा में बड़ी तादाद में लोग आए, ये इस बात की गवाही है कि उर्दू अदब से जुड़ने की तलब व जज़्बा अब भी बरकरार है.

प्रोगाम में चंद्रभान ख़याल ने ऑडियंस के सवालों के जवाब पूरी बेबाकी से दिए. यही बात गुणीजन सभा को और सभी आयोजनों से अलग बनाती है. एक नया रंग देती है. एक पर्सनल टच – जहां ऑडियंस मेहमान शायर से अपने दिल की बात कह पाते हैं. ख़याल साहब ने भी सामईन के हर सवाल का जवाब उनके दिल की तसल्ली होने तक दिया.इस सभा की मॉडरेटर अमिता परशुराम “मीता” के दिलकश अंदाज़ ए गुफ्तगू को भी काफी पसंद किया गया.

शबाना डागर का यूनीक कांसेप्ट
गुणीजन सभा दिल्ली में जुलाई 2015 से एक मासिक इवेंट के तौर पर मुसलसल जारी है. ये सभा मोहतरमा शबाना डागर का यूनीक कांसेप्ट है. वे ध्रुपद के मशहूर डागर घराने की बीसवीं पीढी से हैं. शबाना जी उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी के प्रेसिडेंट हैं, जिसके तहत गुणिजन सभा का आयोजन भी किया जाता है. इस सोसाइटी के तहत शबाना जी भारतीय संगीत, कला संस्कृति के विकास और विस्तार के लिए अथक मेहनत कर रही हैं. उनकी कोशिशों में साथ जुड़ने वालों का कारवां बढ़ता ही जा रहा है.

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