हजरत निजामुद्दीन की ‘माई साहिबा’ की दरगाह!

Category धर्म

स्थान:दिल्ली
लोकेशन: हज़रत निजामुद्दीन दरगाह से 10 किलीमीटर
महरौली दरगाह कुतबुद्दीन बख्तियार काकी से 3 किलोमीटर,अरबिंदो मार्ग(आईआईटी दिल्ली के पास),अधचिनी
सज्जादानशीन: सय्यद आसिफ अली निजामी / चीफ इंचार्ज: सय्यद आमिर अली निजामी

 

परवीन अर्शी 

दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन की दरगाह का रास्ता तो सबको पता है लेकिन आईआईटी दिल्ली के पास अधचिनी गांव में करीब 780 साल पुरानी उनकी मां और बहन की दरगाह है जहां बदायूं से आने के बाद उनकी मां रहीं थीं और निजामुद्दीन ने यहीं अपनी शुरुआती तालीम हासिल की थी. हज़रत निजामुद्दीन औलिया अपने पिता के इंतकाल के बाद अपनी मां(हजरत बीबी जुलेखा माई साहिबा) के साथ तालीम हासिल करने के लिए दिल्ली आ गए थे.

माई साहिबा दरगाह की नई तस्वीर
माई साहिबा दरगाह की रेनवैशन के पहले की तस्वीर

माई साहिबा ने अधचिनी गांव में ही रिहाइश बनाई थी. सूफी सिलसिले में आने के बाद निजामुद्दीन गयासपुर चले गए जिसे आज हजरत निजामुद्दीन इलाके के नाम से जाना जाता है लेकिन माई साहिबा यहीं पर रहीं। माई साहिबा दरगाह में हर बुधवार को ज़ायरीन बड़ी तादाद में आते हैं और अपनी मुरादें पूरी करते हैं. कहते हैं कि यहां पांच बुध पूरे करने वालों की दिली मुराद करिश्माई ढंग से पांचवें बुध से पहले पूरी हो जातीं हैं.
इसके अलावा हर जुमे को (शुक्रवार) यहां पर लंगर भी खिलाया जाता है.

अरबिंदो मार्ग पर लगा माई साहिबा का बोर्ड

780 साल पुरानी माई साहिबा की इस दरगाह में निजामुद्दीन की बहन हजरत बीबी जैनब और भांजी बीबी  रुकैया  की भी मज़ार है. यहीं  जामा मस्जिद के अंदर सुहारवर्दिया सिलसिले के सबसे मशहूर बुज़ुर्ग हज़रत अबू हफ्स शहाबुद्दीन उमर सुहारवर्दी की बेटियां और माई साहिबा की खिदमतगार बीबी हूर बीबी नूर के मज़ार, यही नहीं चन्द क़दमों की दूरी पर हज़रत बाबा फ़रीद गंजशकर के छोटे भाई शैख़ साहब हज़रत शैख़ नजीबुद्दीन मुतवक्किल और बाबा फ़रीद र.अ. की बेटी बीबी फातिमा का भी मज़ार है.

माई साहिबा की खिदमत कर रहे सज्जादानशीन सय्यद आसिफ अली निजामी और दरगाह कमेटी के चीफ इंचार्ज सय्यद आमिर अली निजामी का कुनबा हज़रत निजामुद्दीन औलिया की बेटी बीबी जैनब की 42वीं पीढ़ी में आते हैं. हजरत निजामुद्दीन और माई साहिबा दरगाह की खिदमत आमिर निज़ामी साहब का खानदान कई पीढ़ियों से कर रहा है. हजरत निजामुद्दीन की दरगाह का तो काफी नाम है और यहां हर मजहब के लोग बड़ी तादाद में पहुंचते हैं।दरगाह की देखभाल करने वाले ट्रस्ट के अन्य सदस्य डॉ. सैयद अहमद अली निजामी माई साहिबा की दरगाह में मुफ्त डिस्पेंसरी चला रहे हैं। यहां पर यूनानी और एलोपैथिक पद्धति से लोगों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाता है.

हज़रत निजामुद्दीन औलिया र.अ. के परदादा सय्यद अली उज़्बेकिस्तान की मौजूदा राजधानी बुखारा के रहने वाले थे आपके वालिद (पिता) सय्यद अहमद हिंदुस्तान आये थे. आपका सिलसिला हज़रत अली रजि. से मिलता है. आपके परनाना ख्वाजा अरब हुसैन भी सय्यद थे और वे भी बुखार के थे. इसी दौरान बीबी ज़ुलैख़ा से सय्यद अहमद का निकाह हुआ था. बदायूं में हज़रत निजामुद्दीन का जन्म २७ सफर ६३६ हिजरी में हुआ था.
हज़रत निज़ामुद्दीन के वालिद का इंतक़ाल लड़कपन में ही हो गया था,वालिदा बीबी ज़ुलैखा ने छोटे मोटे काम कर बच्चे की परवरिश कर उसके मुस्तक़बिल (भविष्य) के लिए कई सपने देखे और तालीम के लिए बेटे को लेकर दिल्ली आयीं. दिल्ली में उस ज़माने के जाने माने आलिम (स्कॉलर) मौलाना शम्सुद्दीन और मौलाना कमालुद्दीन ज़ाहिद से तालीम दिलवाई.
बीबी ज़ुलैखा दिल्ली के क़रीबी गांव अधचिनी में ही रहीं और हज़रत निज़ामुद्दीन तालीम हासिल करने के लिए दिल्ली में रहे. अधचिनी में माई साहिबा बाबा फ़रीद के छोटे भाई शैख़ साहब (शैख़ नजीबुद्दीन मुतवक्किल) के पड़ोस में ही रहती थीं. उनके साथ ज़रत शहाबुद्दीन उमर सुहारवर्दी की बेटियां बीबी हूर बीबी नूर भी खिदमतगार के तौर पर रहती थीं .

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