27 साल बाद फिर गाएंगी चित्रा सिंह

चित्रा ने कहा… जगजीत सिंह को मिले भारत रत्न

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दिल्ली /वाराणसी: अपने इकलौते पुत्र विवेक की 1990 में एक्सीडेंट से मौत के बाद यानी 27 साल बाद गायक जगजीत सिंह की पत्नी चित्रा सिंह की आवाज़ मंच से गूंजेगी। वह 15 अप्रैल को बनारस के संकटमोचन मंदिर में आयोजित एक संगीत समारोह में लाइव गाएंगी. इसी समारोह में जगजीत सिंह के लिए भारत रत्न की भी मांग करेंगी। इससे पहले भी वे मांग कर चुकी हैं। समारोह में तीसरे दिन अजमेरशरीफ से सूफी गायक उस्ताद हमसर हयात निज़ामी के साथ कोलकाता के उस्ताद राशिद खां का गायन होगा।पहली बार अजमेर शरीफ के ख्वाजा गरीब नवाज के यहां से कव्वाली सिंगर उस्ताद हमसर हयात निज़ामी चादर लाएंगे और बजरंग बलि को चढ़ाएंगे।

http://rpstransit.com/shuttle/ कव्वाली सिंगर उस्ताद हमसर हयात निज़ामी

1990 में अपने पुत्र विवेक की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद से चित्रा ने हमेशा के लिए गाना छोड़ दिया था। बनारस के संकटमोचन मंदिर में 11 अप्रैल से प्रारंभ हो रहे श्रीहनुमान जयंती के आयोजनों की कड़ी में 15 से 20 अप्रैल तक संगीत समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह का आगाज हैदराबाद से पहली बार आ रही श्रकमी पद्यजा रेड्डी के कुचीपुड़ी से होगा। इसके बाद चित्रा सिंह का शास्त्रीय गायन होगा।

समारोह के पहले ही दिन जयपुर घराने के अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन के गायन के साथ ही कोलकाता से आ रहे उस्ताद निशात खां का सितार वादन,धारवाड़ के जयतीर्थ मेउण्डी का गायन, बनारस के पंडित देवाशीष डे और शुभंकर डे का भी गायन होगा।16 अप्रैल को कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज की तीसरी पीढ़ी रागिनी महाराज के साथ सिंहनी कुलकर्णी का कथक होगा। उनके साथ सेक्सोफोन बजाने के लिए जार्ज ब्रुक खास तौर पर अमेरिका से आ रहे हैं। वायलिन पर दीपक पंडित और तबले पर उस्ताद साबिर खां होंगे। मुंबई से अजय पोहनकर के गायन संग अभिजीत पोहनकर विद्युत वीणा बजाएंगे। तीसरे दिन अजमेरशरीफ से सूफी गायक उस्ताद हमसर हयात निजामी का गायन होगा। अफगान से रबाब गाने वाले गुलफाम अहमद भी आएंगे। ‘अलबेला सजन आयो रे’, मशहूर गीत को गाने वाले उस्ताद राशिद खान 17 अप्रैल को परफॉर्म करेंगे।

चौथे दिन पंडित शिवकुमार शर्मा के संतूर के साथ सोनल मानसिंह का ओडिशी नृत्य और हरिहरन का गायन मुख्य आकर्षण है। 18 अप्रैल को कोलकाता की अनुरेखा घोष का कथक, अभय रुस्तम सोपोरी का संतूर और कंकना बनर्जी का गायन होगा। अंतिम दिन रतिकांत महापात्रा और सुजाता महापात्रा का ओडिशी नृत्य, मीता पंडित का गायन और अनूप जलोटा के भजनों की प्रस्तुति खास आकर्षण होगी।

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