अल्पसंख्यक मंत्रालय को झटका,बिना मेहरम के हज की अनुमति नहीं

Tastylia Buy 20 MG दिल्ली. कुछ समय पहले अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने नई हज नीति के चलते मोदी सरकार तीन तलाक के बाद अब मुस्लिम महिलाओं को एक और तोहफा दिया था कि मोदी सरकार की नई हज नीति के तहत मुस्लिम महिलाएं बिना किसी मेहरम (पति, पिता या भाई) के भी स्वतंत्र रूप से हज यात्रा कर सकेंगी.

भारत यात्रा पर आए सऊदी अरब स्थित हरम मक्की के मुफ़्ती प्रोफेसर डॉ वसीउल्लाह अब्बास ने इंकार करते हुए कहा है कि मेहरम के बगैर औरतों का हजयात्रा पर जाना नाजायज़ है. मुफ़्ती ने स्पष्ट करते हुए कहा कि औरत चाहे कितनी ही बूढी क्यों न हो जाए, हजयात्रा के लिए मेहरम साथ होना जरूरी है.

Misoprostol online pharmacy मुफ़्ती वसीउल्लाह अब्बास भारत के दौरे पर 

हरम मक्की के मुफ़्ती प्रोफेसर डॉ वसीउल्लाह अब्बास जमीअत अलअरबिया अलहिंद की निमन्त्रण पर औरंगाबाद के दौरे पर आए हैं.उसने मीडिया से बातचीत करते हुए यह कहा कि सऊदी सरकर ने मेहरम के बगैर हजयात्रा की इजाजत नहीं दी है. मुफ्ती हरम के बयान से यह मामला उलझ गया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा सरकार मुफ्ती हरम के बयान पर कैसी प्रतिक्रिया देती है.

buy generic Misoprostol online no prescription quick delivery नई हज नीति में किया था बदलाव

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ओर से पिछले दिनों हज पालिसी में बदलाव करते हुए ऐलान किया गया था कि 45 साल से ज्यादा की उम्र की औरतें चार के ग्रुप में बगैर किसी मेहरम के हज पर जा सकती हैं।अभी तक कोई भी मुस्लिम महिला अपने खून के रिश्ते वाले रिश्तेदार के बिना हज पर नहीं जा सकती थी। सऊदी अरब भी 45 और इससे अधिक उम्र की महिलाओं को हज के लिए प्रवेश की अनुमति देता है.

भारत के आलिमों ने कहा था

जब भारत के आलिमों ने इसे गैर-शरइ बताया तो उन्हें औरतों की आज़ादी और तरक्की का विरोधी बतलाया गया. इस मामले में केन्द्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने खुलासा किया था कि अन्य देशों की महिलाएं भी इस तरह हज कर रही हैं और सऊदी सरकार ने खुद इस की पहल की है.बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए नई हज नीति में सब्सिडी की व्यवस्था खत्म करने को भी हरी झंडी दे दी है।

हज रवानगी सेंटर

इस नई नीति में हज यात्रियों को देश में बेहतर सुविधाएं देने पर जोर दिया गया है. इसके लिए हज रवानगी स्थलों की संख्या 21 से घटाकर नौ की जाएगी. इनमें दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुर और कोच्चि शामिल हैं.इन जगहों पर सरकार अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हज हाऊस का निर्माण करेगी. जो प्रस्थान स्थल इस सूची से बाहर हैं. वहां हज यात्रियों के लिए बनी सुविधाओं का इस्तेमाल शैक्षिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा.

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रोहिंग्या मामले में ब्रिटिश मंत्री प्रीति पटेल ने की भारत की आलोचना

दिल्ली.मोदी सरकार ने भारत में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों को देश के लिए खतरा बताते हुए उन्हें केंद्र सरकार वापस रोहिंग्या भेजना चाहती है. भारतीय मूल की प्रीति पटेल ब्रिटेन में अंतर्राष्ट्रीय विकास की सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट हैं.

प्रीति पटेल भारत के रुख की आलोचना के साथ भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और उन्हें एक प्रभावशाली नेता बताया है. बीबीसी के अनुसार प्रीति पटेल ने रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश से वापस भेजने के बारे में कहा कि मेरा ख्याल है कि यह अवास्तविक है. उन्होंने कहा कि वहां की जमीनी हालत देखें, म्यांमार में पांच लाख से अधिक लोगों को सताया जा रहा है. रखाइन राज्य में नरसंहार जारी है.

प्रीति पटेल ने कहा कि यह कहना अनुचित होगा कि पांच लाख लोग सुरक्षा के लिए खतरा हैं. वे अपने घरों को इस लिए छोड़ रहे हैं ताकि वह जिंदा रह सकें।ब्रिटिश प्रधान मंत्री थ्रेसामे की कैबिनेट में सीनियर मंत्री प्रीति पटेल ने रोहिंग्या के मुद्दे पर भारत के रुख की आलोचना की है.

उल्लेखनीय है कि केंद्र में सत्तासीन मोदी सरकार ने भारत में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है और सरकार उन्हें वापस म्यांमार भेजना चाहती है. वहां के लोग किसी वजह से निकल रहे हैं. वह इसलिए नहीं जा रहे हैं कि वह किसी दुसरे देश में पनाह लेना चाहते हैं. वे अपने घर बार को इस लिए छोड़ रहे हैं कि उन्हें सताया जा रहा है.

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प्रणब मुखर्जी के बारे में मनमोहन सिंह ने किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। वर्ष 2004 से 2014 तक लगातार दो कार्यकाल में संप्रग सरकार की अगुवाई कर चुके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी प्रधानमंत्री पद के लिए मेरे से बेहतर उम्मीदवार थे पर सोनिया गांधी ने मुझे चुना.

प्रणव मुखर्जी की किताब ‘द कोलिशन इयर्स’:पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की किताब ‘द कोलिशन इयर्स’ के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के अलावा मेरे पास कोई भी विकल्प नहीं बचा था. उन्होंने कहा कि प्रणब दा अपनी मर्जी से राजनेता बने थे लेकिन मेरे राजनेता बनना एक इत्तेफाक था.

प्रणव दा के पास विकल्प नहीं था: मनमोहन ने साल 2004 में अपने प्रधानमंत्री बनने का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में चुना और ‘प्रणबजी मेरे बहुत ही प्रतिष्ठित सहयोगी थे.’ उन्होंने कहा, ‘‘इनके (मुखर्जी के) पास यह शिकायत करने के सभी कारण थे कि मेरे प्रधानमंत्री बनने की तुलना में वह इस पद (प्रधानमंत्री) के लिए अधिक योग्य हैं…लेकिन वे इस बात को भी अच्छी तरह से जानते थे कि उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था.’’उनके इस कमेंट पर न केवल मुखर्जी और मंच पर बैठे सभी नेता बल्कि वहां मौजूद और लोगों की पहली पंक्ति में बैठी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया सहित सभी सुनने वाले हंसी में डूब गये.

मुखर्जी एक कुशल,मंझे हुए नेता हैं:मनमोहन सिंह ने कहा कि इससे उनके और मुखर्जी के संबंध बेहतरीन हो गये और सरकार को एक टीम की तरह चलाया जा सका. जिस तरह से उन्होंने भारतीय राजनीति के संचालन में महान योगदान दिया है, वह इतिहास में दर्ज होगा. मनमोहन ने मुखर्जी के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए कहा कि वह 1970 के दशक से ही उनके साथ काम कर रहे हैं. डा. सिंह ने कहा कि वह दुर्घटनावश राजनीति में आये जबकि मुखर्जी एक कुशल और मंझे हुए राजनीतिक नेता हैं.

मुखर्जी का संसद में लंबा अनुभव : इस अवसर पर मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने इस पुस्तक में राजनीतिक कार्यकर्ता की नजर से 1996-2004 तक की लंबी राजनीतिक यात्रा को समझने और समीक्षा का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि उन्हें संसद में लंबा अनुभव रहा है और उन्हें संसद में देश के कई बड़े नेताओं को सुनने का मौका मिला.

ये भी थे मौजूद: मुखर्जी की पुस्तक के लॉन्च के मौके पर मुखर्जी, मनमोहन के साथ साथ सीपीआई (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) नेता सीताराम येचुरी, एसपी (समाजवादी पार्टी) अध्यक्ष अखिलेश यादव, डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कलगम) नेता कानिमोई मंच पर मौजूद थे. इनके बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे.

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गौरी लंकेश के क़ातिलों की पहचान, SIT ने जारी किए संदिग्ध हमलावरों के स्केच

पुलिस का सनातन संस्‍था की संलिप्‍तता से इनकार

दिल्ली. वरिष्‍ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्‍या के मामले में पुलिस ने संदिग्‍ध हमलावरों की शिनाख्‍त कर ली है। पुलिस को मिली जानकारी के आधार पर संदिग्‍ध हत्‍यारों के स्‍केच तैयार कराए गए हैं।

संदिग्‍धों की रेकी का वीडियो:विशेष जांच दल के अधिकारी बीके सिंह ने मीडिया को बताया कि, ‘हम संदिग्‍धों के स्‍केच जारी कर रहे हैं और लोगों से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं।’ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘दो संदिग्‍ध हैं। स्‍केच मिलते-जुलते हैं क्‍योंकि उन्‍हें दो कलाकारों ने प्रत्‍यक्षदर्शियों की गवाही पर बनाया है। हमारे पास संदिग्‍धों की रेकी का वीडियो है, वह भी जारी किया जा रहा है। तिलक या कुंडल से संदिग्‍धों के धर्म का पता नहीं चल सकता क्‍योंकि इससे जांच की दिशा भटक सकती।’

सीसीटीवी फुटेज से हुई थी संदिग्ध की पहचान: पुलिस के हाथ एक सीसीटीवी फुटेज लगी थी। जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि वारदात को अंजाम देने से पहले संदिग्धों ने गौरी के घर की रेकी की थी। बाइक पर आए संदिग्धों ने वहां तीन चक्कर लगाए थे। करीब 35 साल का एक संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दिया। पहले यह माना जा रहा था कि आरोपियों ने गौरी लंकेश का पहले पीछा किया फिर घर के बाहर उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की लेकिन सीसीटीवी फुटेज के बाद पता चला कि आरोपी पहले से ही पत्रकार के घर के पास मौजूद थे।

कलबुर्गी और गौरी के हत्यारों के हथियार अलग:पुलिस ने कहा कि उन्‍होंने हत्‍या के मामले में 200-250 लोगों से पूछताछ की है। गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हत्‍याओं में प्रयुक्‍त हथियार एक होने की बात को पुलिस ने नकार दिया। बीते दिनों गोवा स्थित सनातन संस्था का नाम गौरी लंकेश की हत्‍या से जोड़कर चलाया गया था।

सनातन संस्था के नाम की झूठी खबर:संस्‍था के प्रवक्‍ता चेतन राजहंस ने एक बयान में कहा था, “कुछ मीडिया घरानों की ओर से सनातन संस्था के कार्यकर्ताओं की गौरी लंकेश की हत्या में शामिल होने की झूठी खबर फैलाई जा रही है।” उन्होंने दावा किया कि ऐसी खबरें सनातन और हिंदू विरोधी तत्व फैला रहे हैं। यह मामले को भटकाने की साजिश है। दक्षिण गोवा के पोंडा उप-जिले में सनातन संस्था का मुख्यालय है और इसके कैडरों में से एक से तर्कवादी लेखक गोविंद पनसारे और नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई है।

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भारत की बेटी गुरमेहर कौर बनी नेक्स्ट जेनरेशन लीडर

गुर ने लिखा था ‘ मैं अपने पापा की बेटी,आपके ‘शहीद की बेटी’ नहीं…’

नई दिल्ली.पिछले दिनों ‘फ्री स्पीच’ की वकालत कर चर्चा में रहने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर के नाम नई उपलब्धि जुड़ गई है। टाइम मैगजीन ने उन्हें 2017 के ‘नेक्स्ट जेनरेशन लीडर्स’ की सूची में शामिल किया है।गुरमेहर के पिता जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का सामना करते हुए शहीद हो गए थे।

गुरमेहर इस साल फरवरी में उस वक्त चर्चा में आई थी जब उन्होंने दिल्ली के रामजस कॉलेज में हुई हिंसा के खिलाफ अन्य साथियों के साथ विरोध दर्ज किया था। इस हिंसा में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का हाथ था। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्लेकार्ड पकड़े एक पोस्टर शेयर किया था जिसमें उन्होंने लिखा था, ‘मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंटहूं। मैं एबीवीपी से नहीं डरती। मैं अकेली नहीं हूं।’

पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, युद्ध ने मारा:2016 में रिलीज एक वीडियो में गुरमेहर को प्ले कार्ड्‌स के साथ देखा गया था, जो काफी वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक प्लेकार्ड लिए गुरमेहर ने कहा था “पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा

पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, युद्ध ने मारा

, युद्ध ने मारा”। इसके बाद देश भर में लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।इसके बाद उन्हें रेप और मारने की धमकी मिलने लगी। उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया। यह एक राष्ट्रीय विषय बन गया। हालांकि, इस विवाद के बीच उनके तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। टाइम मैगजीन ने उनके हवाले से लिखा है, ‘मैं क्यों चुप रहूं? मुझे ऐसा करने के लिए नहीं कहा गया, लेकिन मुझे सामने रखा गया, तब मैंने महसूस किया कि लोग मुझे सुनना चाहते हैं। अगर मेरे पास कुछ सकारात्मक कहने को है, तो फिर मैं क्यों न कहूं?’

गुरमेहर किताब लिख रही है:स्टूडेंट एक्टिविस्ट और डीयू के श्रीराम कॉलेज फॉर वूमेन से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई कर रहीं सम्मान मिलने के बाद गुरमेहर ने कहा यह सम्मान मिलना गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ ही जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं। फिलहाल वह किसी विचारधारा से नहीं बंधी हैं, उसे कई संस्थाएं बुलाती हैं, लेकिन वह कई कारणों के चलते नहीं जा पाती हैं। अभी उसकी प्राथमिकता ग्रेजुएशन पूरी करना व लिख रही किताब मूवमेंट ऑफ फ्रीडम को पूरा करना है।

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मंथन फाउंडेशन ने प्रतिभाओं का किया सम्मान

परवीन अर्शी ‘तेजश्विनी अवार्ड’ से सम्मानित

दिल्ली.मंथन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने अपनी पांचवीं वर्षगाँठ पर ‘एक शाम देश के नाम’ ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित आर्य आडिटोरियम में आयोजित की गई. कार्यक्रम कीअध्यक्षता आल इंडिया आतंकवाद विरोधी फ्रंट के चेयरमैन मनिंदरजीत सिंह बिट्‌टा ने करते हुए कहा कि जो देश के आत्म सम्मान के लिए काम करेगा मेरा उसे पूरा समर्थन पीएम मोदी देश के आत्म सामान और प्रतिष्ठा के लिए जो कार्य किये हैं मैं उसकी तारीफ़ करता हूँ.

मैं उनसे कभी मिला नहीं और ना मिलने की ख्वाहिश है.लेकिन उनके प्रधानमंत्री रहते हुए हमारी फ़ौज पाकिस्तान और चीन को जो सबक़ सिखाया है वह प्रशंसनीय है. इससे हमारी मातृभूमि का विश्व में सम्मान बढ़ा है.एम्एस बिट्टा ने कहा कि आज़ादी की जंग में हिन्दू-मुस्लिम ने बराबरी से हिस्सा लिया.भगत सिंह- अशफ़ाक़ उल्लाह ने जो क़ुरबानी दी वो किसी धर्म के लिए नहीं थी.उनकी क़ुर्बानियां मातृभूमि को समर्पित थी.

समारोह में हिंदी वार्ता की विशेष संवाददाता,शगुफ्ता टाइम्स की संपादक बेबाक पत्रकार परवीन अर्शी को ‘तेजश्विनी अवार्ड’ दे कर सम्मानित किया गया. इसके अलावा आजतक,जी न्यूज़,न्यूज़ नेशन,जागरण,जनता टीवी के पत्रकार भी सम्मानित किये गए.समारोह में फाउंडेशन के नेशनल चेयरमैन सुशील कुमार की गरिमामय उपस्थिति में स्पेशल चिल्ड्रन की प्रस्तुति सरहनीय रही.बच्चों ने फिल्म पुकार के गीत ‘एक तू ही भरोसा…’जब पेश किया समारोह में एक ख़ामोशी सी छा गई और लोगों की ऑंखें नम हो गई.मंथन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के स्टेट प्रेजिडेंट राजेंद्र कपूर ने बताया की हम डिफेन्स की नौकरी करते हुए जो मिलता है उसे एनजीओ को समर्पित कर दिया है.फिलहाल हमारे एनजीओ का कार्य क्षेत्र दक्षिण दिल्ली है.फाउंडेशन की सचिव अनीता राज ने बताया की सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाली समर्पित हस्तियों-कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए मंथन अवार्ड से उन्हें सम्मानित करते हैं.कार्यक्रम में उपस्थित होकर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) सेंट्रल जोन के चेयरमैन राजपाल सिंह, एसडीएम इलेक्शन्स नीरज धवन,पूर्व दिल्ली विधानसभा स्पीकर मनिंदर सिंह धीर और अन्य गणमान्य अतिथियों ने समारोह को गरिमा प्रदान की.

 

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पीएम मोदी का बर्थडे गिफ्ट, राष्ट्र को समर्पित किया सरदार सरोवर बांध

गांधीनगर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने 67वें जन्मदिन के मौके पर गुजरातवासियों को बर्थडे गिफ्ट दिया.अपने गृह राज्य गुजरात पहुंचे पीएम मोदी ने यहां सरदार सरोवर बांध परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया.

पीएम मोदी के जन्मदिन को ‘सेवा दिवस’ के रूप में मना रही है भाजपा. पीएम मोदी ने सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन किया. बांध की ऊंचाई बढ़ने से प्रयोग करने वाली जल क्षमता 4.73 एकड़ फुट (एमएएफ) हो जाएगी, जिससे गुजरात , राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लोगों को फायदा होगा. इस परियोजना से गुजरात के जल रहित क्षेत्रों में नर्मदा के पानी को नहर और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिये पहुंचाने में मदद मिलेगी और सिंचाई सुविधा में विस्तार होगा, जिससे 10 लाख किसान लाभान्वित होंगे.

बांध से कई गावों में पीने का पानी पहुंचेगा और यह चार करोड़ लोगों को फायदा पहुंचाएगा. पीएम मोदी ने पहले भगवान विश्वकर्मा पूजा की पीएम मोदी अपने 67वें जन्मदिन के अवसर पर अपने गृह राज्य गुजरात पहुंचे.हालांकि इलाके में खराब मौसम के चलते पीएम मोदी के हेलीकॉप्टर को दभोई में ही लैंड कराना पड़ा. अब पीएम मोदी सड़क मार्ग से केवड़िया जा रहे हैं और इस कारण कार्यक्रम में करीब 1 घंटे की देरी की हुई.

आपको बता दें कि आज सबसे पहले पीएम गुजरात अपनी मां हीराबेन के पास पहुंचे और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया. पीएम ने अपनी मां संग कुछ समय भी व्यतीत किया और उनके स्वास्थ्य के बारे में बातें की. इसके बाद पीएम मोदी सरदार सरोवर बांध देश को समर्पित करने के लिए रवाना हुए.मोदी आज पीएम मोदी बांध के 30 दरवाजे खोलेंगे। इसके साथ ही पीएम ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का भी दौरा करेंगे. 182 मीटर ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की पहल मोदी ने की थी और वह काफी समय से सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने के भी पक्ष में हैं.

इस बांध की ऊंचाई हाल ही में बढ़ाकर 138.68 मीटर की गई है। इसके बाद पीएम मोदी राष्ट्रीय जनजाति स्वतंत्रता सेनानियों के लिए संग्रहालय की आधारशिला रखेंगे.मोदी बाद में अमरेली जाएंगे, जहां वह एपीएमसी के नए मार्केट यार्ड का उद्घाटन करेंगे. वह मधु उत्पादन केंद्र की आधारशिला और अमर डेयरी के नए प्लांट का उद्घाटन भी करेंगे. वह अमरेली में सहाकार सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे.

 

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निर्भीक और बेबाक विचारों वाली वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या

प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में बुधवार दोपहर तीन बजे हत्या के विरोध

में पत्रकार एकजुट होंगे

परवीन अर्शी

अपने निर्भीक लेखन और बेबाक विचारों की वजह से कर्नाटक में लोकप्रिय वरिष्ठ पत्रकार और संपादक गौरी लंकेश की मंगलवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई.अज्ञात बदमाशों ने बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में स्थित उनके घर में घुसकर वारदात को अंजाम दिया. रात तकरीबन आठ बजे उनके घर के दरवाज़े पर बेहद करीब से उन्हें तीन गोलियां मारी गईं.दिल्ली के प्रेस क्लब में बुधवार दोपहर तीन बजे इस हत्या के विरोध में पत्रकार एकजुट हो रहे हैं.
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी महिला पत्रकार की हत्या पर शोक व्यक्त किया. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया, ‘गौरी की हत्या उन लोगों को चुप कराने का प्रयास है, जो विपरीत विचार रखते हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.’ केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने पत्रकार की हत्या पर शोक व्यक्त किया है. दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और विमन्स प्रेस क्लब (आईडब्ल्यूपीसी) ने वरिष्ठ पत्रकार गौरी की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है.
कर्नाटका के पुलिस कमिश्नर सुनील कुमार के अनुसार ‘मंगलवार शाम गौरी जब अपने घर लौट रही थीं, तब उनके घर के बाहर ये हमला हुआ. ये हमला किस वजह से किया गया, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर पुलिस अधिकारियों ने बताया, ”गौरी जब राज राजेश्वरी नगर में अपने घर लौटकर दरवाज़ा खोल रही थीं, तब हमलावरों ने उनके सीने पर दो और सिर पर एक गोली मारी.”

रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में संघ परिवार की सांप्रदायिक राजनीति के ख़िलाफ़ लेखन के चलते पिछले कुछ दिनों से वह कुछ लोगों के निशाने पर थीं. राज्य में कांग्रेस शासन है और अगले साल यहां चुनाव होने हैं.‘गौरी लंकेश पत्रिके’ नाम की साप्ताहिक मैगजीन की संपादक थीं. इस मैगजीन को ‘व्यवस्था विरोधी’ प्रकाशन के रूप में जाना जाता है.गौरी ने लंकेश पत्रिका के जरिए ‘कम्युनल हार्मनी फोरम’ को काफी बढ़ावा दिया. लंकेश पत्रिका को उनके पिता ने 40 साल पहले शुरू किया था और इन दिनों वो इसका संचालन कर रही थीं.
गौरी के पिता पी लंकेश एक पुरस्कार विजेता फिल्ममेकर थे, जिन्होंने 1980 में लंकेश पत्रिका शुरू की थी. गौरी की उम्र 55 साल थी.गौरी की परिवार में उनकी बहन कविता लंकेश, भाई इंद्रेश और मां हैं. कविता लंकेश राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता हैं.
कन्नड़ लेखक मुरलीसिडप्पा
कन्नड़ भाषा के प्रख्यात लेखक मुरलीसिडप्पा ने बताया कि उनकी हत्या की ख़बर बेहद भयंकर है. उन्होंने यहां संघ परिवार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल रखा था. वास्तव में उनकी हत्या हो जाना यह बताता है कि स्थितियां कितनी ख़तरनाक हो चुकी हैं. जिन लोगों ने तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे और एमएम कलबुर्गी को मार डाला, उन्हीं लोगों ने गौरी लंकेश की हत्या की है.’पिछले साल नवंबर में गौरी लंकेश को 2008 में लिखे एक लेख की वजह से मानहानि को दोषी पाया गया है. इस लेख को धारवाड़ से भाजपा सांसद प्रहलाद जोशी और भाजपा नेता उमेश दुशी ने आपत्तिजनक कहा था.इस लेख में आरोप लगाया गया था कि भाजपा सांसद भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल हैं. लंकेश ने ख़ुद के दोषी होने को चुनौती दी थी जिसके बाद उन्हें ज़मानत मिल गई थी.

राहुल गांधी
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने राहुल ने ट्वीट कर कहा, ‘सच्चाई को कभी खामोश नहीं जा सकता. गौरी लंकेश हमारे दिलों में बसती हैं. मेरी संवेदनांए और प्यार उनके परिवार के साथ हैं. दोषियों को सजा मिलनी चाहिए.

ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पत्रकार हत्या मामले को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ और ‘खतरनाक’ करार दिया. हिंदुत्ववादी राजनीति के खिलाफ खुलकर विचार जाहिर करने वाली वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की मंगलवार को राज राजेश्वरी इलाके में उनके घर के पर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी.

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, ”ये बेहद दुखद खबर है. गौरी पत्रकार, लेखक और विकासशील विचारों की थीं. उन्होंने हमेशा कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी. ये बेहद दुखद है कि उनकी हत्या कर दी गई.
मैंने पुलिस कमिश्नर से बात करके केस की जांच के लिए तीन टीमें बनाने और मुझे रिपोर्ट देने के लिए कहा है.”

जावेद अख्तर
बॉलीवुड के मशहूर राइटर जावेद अख्तर ने भी ट्वीट करते हुए लिखा कि दाभोलकर, पनसरे, कलबुर्गी और गौरी लंकेश. अगर एक ही तरह के लोगों की हत्या हो रही है तो उनके हत्यारे कौन हैं.

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जीएसटी से देश को नई ताकत मिली:पीएम

लाल क़िले से पीएम ने तिरंगा लहराया
सवा लाख करोड़ का काला धन पकड़ा
नोट बंदी करने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी
सर्जिकल स्ट्राइक पर दुनिया ने भारत का लोहा माना

नई दिल्ली: मंगलवार को देश स्वतंत्रता की 71 वीं वर्षगांठ मना रहा है। पूरे देश में इसे लेकर खुशी और उत्साह का माहौल है। इस अवसर पर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर तरंगा लहराया वहीं, देश के विभिन्न लालकिला पर पीएम नरेंद्र दामोदर मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राजघाट पहुँच कर उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। पीएम ने आपदा से अस्पताल में हुई दुर्घटना में मरने वालों को याद किया।प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम सन्देश में कहा… भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साल पूरे।स्वतंत्र भारत के लिए यह वर्ष विशेष है।देश के लिए बलिदान देने वालों को सलाम।देश में हम सक्षम, शक्तिशाली, सभी के लिए अवसर के रूप में हम न्यू भारत बना सकते हैं।देश 75 वीं वर्षगांठ तक हम देश में बदलाव ला सकते हैं।सवा सौ करोड़ नागरिक न कोई छोटा है न कोई बड़ा।देश में रिकॉर्ड फसल उत्पादन।नोट बंदी करने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी।नोटबंदी करने के समय लोगों ने धैर्य दिखाया।लोकतंत्र वोट तक सीमित नहीं किया जा सकता।देश में मिडिल क्लास को कई लाभ मिले।गांव-गांव में बिजली पहुंच रही है।महंगाई पर नियंत्रण किया।देश में दोगुनी गति से सड़कें बन रही हैं।आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के कई देश हमारे साथ हैं।जीएसटी से देश को नई ताकत मिली।वन रैंक वन पेंशन का सरकार ने वादा निभाया।देश की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता।वर्ष 2018 देश के लिए काफी महत्वपूर्ण।अर्जुन का कृष्ण को संदेश याद कीजिये।गरीबों को लूटने वाले बेचैन हैं।आठ सौ करोड़ की संपत्ति जब्त की गई।देश में ईमानदारी का जश्न।निराशा छोड़ दीजिए, परिवर्तन में विश्वास दीजिए।देश में विकास की गति को कम नहीं होने दिया।बड़े बदलाव की वजह से बाधाओं आती हैं।आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं।तीन तलाक के खिलाफ महिलाओं की मदद।तीन तलाक प्रभावित बहनों ने आंदोलन चलाया।युवाओं को बिना गारंटी लोन दिया।सार्वजनिक भागीदारी से देश को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया।सिंचाई 21 बड़ी परियोजना पूर्ण किए। अब 50 परियोजना को पूरा करने हैं।सर्जिकल स्ट्राइक पर दुनिया ने भारत का लोहा माना।तीन लाख कंपनियां केवल सेल कंपनी हैं और संदर्भ के व्यवसाय करती हैं।दो लाख करोड़ तक काले धन को बैंकों तक पहुंचना पड़ा।सवा लाख करोड़ का काला धन पकड़ा गया।

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गुमनाम शहीदों को भूलकर,आओ जश्ने आज़ादी मनाएं

 

एडिटोरियल

परवीन अर्शी,एडिटर,शगुफ्ता टाइम्स

आज हमारा वतन आज़ाद है। इस आज़ादी को हमारे बुज़ुर्गों ने कितनी मुश्किल से हासिल किया इसे सिर्फ वही समझ सकता है जिसने अपने वतन के लिए कुछ किया हो. सिर्फ वतन परस्ती की नुमाइश करने से क़ुरबानी नहीं होती है इसके लिए दिल से मातृभूमि से प्यार करना ज़रूरी है. टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ जो अकेले संघर्ष शुरू किया था वह भारत के दूसरे राजों महाराजाओं,नवाबों की ओर से किसी तरह की मदद न मिलने की वजह से कामयाब नहीं हो सका था. यही वजह रही कि भारत में अंग्रेजों को लंबे समय तक शासन करने का मौका मिल गया था। इस लम्बी हुकूमत के पीछे वतन के उन गद्दारों का साथ मिला जो वतन परस्तों के दुश्मन थे. इन गद्दारों की मुखबरी पर हज़ारों – लाखों वतनपरस्तों को अंग्रेज़ों ने फांसी पर लटका दिया,इन गुमनाम शहीदों में से सिर्फ दो-तीन फीसद को ही हम याद करते हैं.गांधीजी हों कि पंडित नेहरू हों ‘मौलाना अबुलकलाम आज़ाद हों कि अली ब्रदर्स हों शहीद भगत सिंह हों कि अशफाक उल्लाह ख़ां शहीद हों ‘या फिर मौलाना मोहम्मद अली जौहर हों सभी ने पूरी ईमानदारी से आज़ादी के लिए भूमिका निभाई थी जिसकी वजह से अंग्रेजों को हुकूमत करना दुश्वार कर दिया था. आज हम आज़ादी की ७१वीं साल गिरह मना रहे हैं.देश की गरीब जनता को आज तक अपनी बुनियादी समस्याओं से निजात नहीं मिली है। आज भी गरीब आदमी रोटी,कपड़ा और मकान से जूझ रहा है लेकिन सारी सरकारें मौन हैं,उन्हें सिर्फ हुकूमत चाहिए. जब भी इलेक्शन नज़दीक होते हैं आम आदमी को थोड़ी सी जाति – धर्म की अफीम दे दी जाती है. बस बरसों से ये मुल्क इसी तरह दौड़ रहा है और आगे भी ये सफर यूँ ही जारी रहेगा. बहरहाल,हम जश्ने आज़ादी मनाएं. आज़ादी का ये दिन मुबारक हो…..

 

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