यूपी में महिलाओं को भी वक्फ संपत्तियों का मुतवल्ली बनाया जाए

मोहसिन रजा की शिया-सुन्नी वक्फ बोर्ड से मांग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड महिलाओं को भी मुतवल्ली बनाने की मांग की है। श्री रजा ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के दौर में उन्हें मुतवल्ली क्यों नहीं बनाया जा सकता। महिलाएं भी वक़्फ़ जायदाद की मुतवल्ली बन सकती हैं, लेकिन उन्हें इमाम नहीं बनाया जा सकता।


अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री ने कहा कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड का महिलाओं को भी मुतवल्ली बनाना होगा। मुतवल्ली केवल पुरुष ही क्यों , महिलाएं क्यों नहीं। उन्होंने दोनों बोर्डों में महिला कर्मचारियों की नियुक्ति भी आवश्यक बताई।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के दो तरीके होते हैं, पहला अली अल औलाद दूसरा अली अल खैर। अली खैर सरकारी ट्रस्ट होता है जबकि अली अल औलाद घरेलू। अली अल औलाद में अनुबंध के अनुसार परिवार का ही सदस्य हो सकता है, जबकि अली अल खैर में समाज के किसी भी व्यक्ति को सदस्य या मुतवल्ली बनाया जा सकता। महिला भी ट्रस्ट में सदस्य या मुतवल्ली हो सकती हैं। बोर्डों को इस पर विचार करना चाहिए।
श्री रजा ने दावा किया कि राज्य में एक लाख 25 हजार वक्फ संपत्तियों हैं और ज़्यादातर बोर्ड पर अवैध कब्जा है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड की कई संपत्तियों को औने-पौने दाम में बेच दिया गया। भ्रष्टाचार की वजह से बोर्ड की हालत खराब है, जो बोर्ड के पास अरबों की संपत्ति है उनके खातों में केवल कुछ रुपये हैं।

 

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बाबरी विवाद: आज से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

 

नई दिल्ली: बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार से सुनवाई शुरू की जाएगी। यह मामला विवादित 2.77 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन को तीन भागों में विभाजित कर दिया था।हाईकोर्ट के इस फैसले कोसभे पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने जमीन का एक टुकड़ा रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया था। सभी पक्षों द्वारा फैसले को चुनौती देने की वजह से विवादित भूमि पर ज्यों की त्यों स्थिति बरकरार है। हालांकि विवादित ज़मीन पर निर्माण अस्थायी मंदिर में पूजा करने की अनुमति है।


बाबरी मस्जिद – राम जन्मभूमि भूमि विवाद पर आज यानी शुक्रवार 11अगस्त दोपहर दो बजे सुप्रीम कोर्ट में तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। बेंच में जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अब्दुल नज़ीर होंगे। इस मामले में कई पक्ष हैं, जिन्होंने विवादित ज़मीन पर मालिकाना हक होने का दावा किया है। सुप्रीम कोर्ट में सभी पक्षों को सुना जाएगा।मालिकाना हक के अलावा बाबरी मस्जिद को शहीद करने को लेकर भी आपराधिक मुकदमा लखनऊ की विशेष अदालत में चल रहा है। इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी सहित भाजपा और आरएसएस के कई नेताआरोपी हैं।

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हुस्न आरा ट्रस्ट ने मनाया जश्ने भारत

डॉ. त्रेहान, मीनू बख्शी और डॉ तलत अहमद को फ़ख़रे हिन्द सम्मान 

परवीन अर्शी दिल्ली।इंडिया इस्लामिक सेंटर में आज़ादी की 71वीं सालगिरह हुस्न आरा ट्रस्ट द्वारा मनाई गयी. जश्ने भारत के इस आयोजन में दिल्ली की जानी मानी शख्सियतों की मौजूदगी में ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. त्रेहान, शायरा,सिंगर,प्रोफेस्सर मीनू बख्शी और डॉ तलत अहमद को फ़ख़रे हिन्द सम्मान से सम्मानित किया गया। वित्त सचिव और शौकिया फोटोग्राफर अशोक लवासा को भी उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया. जश्ने भारत का हौसला बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने शिरकत कर कार्यक्रम आये गणमान्यजनों से कहा कि हुस्न आरा ट्रस्ट जश्ने भारत की तर्ज़ पर आयोजन होना चाहिए. दीप रोशन कर मुख्य अतिथि मुख्तार अब्बास नक़वी ने जश्ने आज़ादी की मुबारकबाद देते हुए लोगों का अभिवादन किया.इस अवसर पर वित्त सचिव अशोक लवासा व नावल लवासा के द्वारा खिंचे गये फ़ोटो प्रदर्शनी भी संयोजित की गई.। प्रोफेसर मीनू बख्शी की किताब ‘मौजे सराब’ भी मेहमानों में वितरित की गयी।

हुस्न आरा ट्रस्ट के आयोजक हैदर कमाल व कमिश्नर नजीब अशरफ ने बुके पेश कर मेहमानों का स्वागत किया. जश्ने भारत के इस बहुआयामी आयोजन की अध्यक्षता पूर्व राज्यपाल सय्यद सिब्ते हसन रज़ी ने की और प्रोफेसर मीनू बख्शी ने वतन परस्ती से सराबोर ग़ज़लें पेश कर श्रोताओं से दाद हासिल की.इसके अलावा मलिका ए तरन्नुम मोहतरमा अनिता संघवी की दिलकश आवाज़ में देशभक्ति के नग्मों को सुना और पसंद किया. अनिता जी ने सूफियाना कलाम और ग़ज़लें भी पेश कीं. स्वागत भाषण में संयोजक डॉ. मोहसिन वली(सदस्य इंडियन हेरिटेज एन्ड हेल्थ केयर सेंटर) ने आज़ादी में शहीदों के बलिदान को याद किया. विशेष अथिति चीफ इनकम टैक्स कमिश्नर अबरार अहमद,पूर्व इलेक्शन कमिश्नर बी बी पाण्डे,मौलाना आज़ाद फाउंडेशन के सरबराह शाकिर हुसैन, जस्टिस खान,मेजर जरनल ज़मीर उद्दीन शाह, एसएस पी लव कुमार, कमर अहमद, एसएम खान, प्रोफेसर शाहिद मेहदी,डॉ माजिद देवबंदी,अश्जेय रज़ा ज़ैदी,नदीम अब्बास ज़ैदी और डॉ. लोहाटी ने भी कार्यक्रम जश्ने भारत में शिरकत कर ट्रस्ट के हौसलों को गति दी.

 

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हक़ीक़त: कैसे बने मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय राजनेता


नरेंद्र मोदी पर भारत की 73% जनता का भरोसा

‘नरेंद्र मोदी पर भारत की 73% जनता भरोसा’ इस खबर को हर अख़बार और वेबसाइट ने छापा, हर चैनल ने दिखाया है यानी नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय राजनेता है। इनमें मोदीभक्त और तथाकथित प्रगतिशील चैनल और साइट भी हैं।
खबर की हक़ीक़त
यह ख़बर फ़ोर्ब्स इंडिया पत्रिका के हवाले से छपी है। फ़ोर्ब्स इंडिया पत्रिका की मालिक कंपनी का नाम नेटवर्क 18 है। नेटवर्क 18 का 100% स्वामित्व इंडियन मीडिया ट्रस्ट के पास है। इस ट्रस्ट का 100% स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के पास है। जो कि आप जानते हैं कि मुकेश अंबानी की कंपनी है, जिनका नरेंद्र मोदी से याराना न मोदी छिपाते हैं, न अंबानी। फ़ोर्ब्स इंडिया ने यह रिपोर्ट OECD यानी ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट की 282 पेज की एक रिपोर्ट से उठाई है। रिपोर्ट का नाम है ‘गवर्नमेंट एट ए ग्लांस 2017 ‘। इस रिपोर्ट के पेज 214 में लिखा है कि यह आँकड़ा गैलप वर्ल्ड पोल से आया है।
इसी रिपोर्ट में लिखा है कि इसके लिए पोल कंपनी हर देश के 1,000 लोगों से बात करती है। य़ह एक देश में अधिकतम 2,000 लोगों से बात करती है। ऐसे देश चीन और रूस हैं।इस तरह के पोल में शामिल 1,000 लोग किन शहरो के कौन लोग होंगे यह आप समझ सकते हैं।

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गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो:मोदी

नई दिल्ली: संसद भवन में आयोजित सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री मोदी ने गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को सख्त चेतावनी दी। साथ ही राज्य सरकारों को भी ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की हिदायत दी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसा को राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक रंग देकर देश का भला नहीं किया जा सकता।
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने संवाददाताओं को बैठक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि देश में गोरक्षा का जज़्बा है, लेकिन उसके नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकारों को भी सलाह दी गई है कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
श्री मोदी ने कहा कि राज्य सरकारों से कहा गया है कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। इस तरह की घटनाओं से लोगों का भला नहीं किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर कई लोग व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण कानून हाथ में लेकर भयानक अपराध कर रहे हैं। जो लोग अपनी दुश्मनी की वजह से बदला लेने के लिए ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

 

 

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‘सफर अवार्ड’ से परवीन अर्शी सम्मानित

पत्रकारों के साथ फिल्म जगत के कलाकार भी हुए सम्मानित

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, रफी मार्ग में सफर अवार्ड 2017 का आयोजन हुआ। इस अवार्ड में देश के निर्भीक पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इस अवार्ड समारोह में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक,पत्रकारों समेत कई मशहूर कलाकार को सम्मानित किया गया।  समारोह में शकील सैफी, मेडिटेशन गुरु अर्चना दीदी, इनकम टैक्स कमिश्नर प्रीता हरित IRS, राशिद अल्वी,टीवी एक्टरअरुण बख़्शी,जगदीश टाइटलर, एनडीएमसी के वाइस चेयरमैन करण सिंह तंवर समेत कई राजनीति और फ़िल्म जगत के दिग्गत मौजूद थे।
वहीं इस समरोह में आज तक से पंकज जैन, एबीपी से जैनेन्द्र, ईटीवी से रचना, डीडी न्यूज़ से गिरीश निशाना, ए2जेड से अली अब्बास नकवी, जे एन्ड के से ताबिश कमाल, प्राइम न्यूज़ से मुबश्शिर, मुंसिफ टीवी से जागृति सिंह, जी मीडिया से आशीष माहेश्वरी, अफसर आलम, मारूफ रज़ा, इंडिया न्यूज से निसार सिद्दीकी, मुस्तकी हुसैन, सुदर्शन से रंजना शर्मा, जनता टीवी से अभिषेक,लखविंदर, नेशनल वॉइस से अंकित, वीर अर्जुन से विजय शर्मा, नवोदय से शम्स आलम, पंजाब केसरी से वसीम सरवर, इन्किलाब से अंजुम जाफरी, रोज़नामा ख़बरें से अनवर जाफरी,अंजली भाटिया, फहीम,अनिल अत्री, शिवेंद्र अमिताभ, हर्षित मिश्रा, राजेन्द्र स्वामी, दीपक दहिया, दीपक शर्मा, अमान हाशमी, वाजिद अली,निशा गौतम देहरादून, राजेश खन्ना, शगुफ्ता टाइम्स की संपादक परवीन अर्शी, सुमित भोजगी, बीआर मोर्य, गुफरान आफरीदी,कमल कंसल,शगुफ्ता शिरीन रायपुर,यूके मन्ना समेत कई दिग्गज पत्रकारों को सम्मानित किया गया। समारोह के आयोजक सफर आपके साथ मैगज़ीन के संपादक इम्तियाज़ अहमद थे।

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मीडिया रिफॉर्म के लिए विधेयक शीघ्र: बंडारू दत्तात्रेय

डब्ल्यू जे आई का मीडिया महापंचायत संपन्न

नई दिल्ली, वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित मीडिया की महापंचायत में श्रम और रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय शिक्षक की भूमिका में बखुबी पेश आये। उन्होंने पत्रकारों को खासकर निष्पक्ष, पारदर्शी, सत्य, सकारात्मक, मूलयपरक, समाजहित और राष्ट्रधर्म का अनुपालन करने की पाठ सिखाई उन्होंने कहा की देश में व्याप्त एंटी नेशनल (अश्लील और असामाजिक) पत्रकारिता को जड़ से मिटा कर राष्ट्रहित में शक्तिशाली समृद्धशाली राष्ट्रनिर्माण की मुख्यधारा से जुड़े ।
उन्होंने भारतीय मजदुर संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार और प्रदेश महासचिव नागेंद्र पाल को धन्यवाद दिया की उनके अथक प्रयास से भारतीय मजदूर संघ ने एक वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया का गठन और सम्बद्धता प्रदान करके एक नया इतिहास लिखा है।
अपने एक अनुभव को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि आपातकाल मे मुझे 16 महिने जेल मे डाला गया था, तब मै जेल मे पढ़ता लिखता था उस समय देश के पत्रकारों के लेखनो ने मुझे बहुत ही प्रभावित किया। प्रदेश की समस्याओं के लिए मैने 145 पत्र तत्कालीन मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी को लिखा।
इस अवसर श्री दत्तात्रेय वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट मे वेब- डिजिटल सोशल ब्रॉडकास्ट एवं ,इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारो के श्रमिक अधिकार मुहैया कराने हेतु समीक्षा बैठक करेंगे इसके लिए देशभर के मुख्यमंत्री और श्रममंत्रियो की बैठक बुलाकर नया वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट का विधेयक बुलाकर कानून का स्वरूप प्रदान करेंगे।
भारतीय मजदुर संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार ने इस अवसर पर पत्रकार हितो में सामाजिक सुरक्षा,सामान कार्य सामान वेतन, ठेका मजदूरी के समापन और प्रेस काउंसिल को भंग करके मीडिया कॉउंसिल के गठन का जोरदार प्रस्ताव श्रम मंत्री के समक्ष रखा। उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर उपरोक्त मीडिया रिफॉर्म कराने की घोषणा श्रम मंत्री ने की ।
इस अवसर पर केन्द्रीय विज्ञान और तकनीक मंत्री डा. हर्षवर्धन ने कहा कि आप अपने समस्याओ के लिए जरूर लड़े, पर सकारात्मक रिपोर्टिंग और राष्ट्र को सर्वोपरि रखे। समाज में बदलते जीवनमूल्यों के प्रति भी उन्होंने पत्रकारों का ध्यान आकृष्ट किया। और देश के विभिन्न राज्यों से आये पत्रकारों को बधाई दी।
इस अवसर पर पुर्वी दिल्ली के सांसद महेश गिरी ने कहा कि पत्रकार सत्य का दर्पण होता है, समाज की समस्याओं को पत्रकार ही होता है जो सामने लाता है पर इस पत्रकार के सामने आज स्वयं कई चुनौतियां उत्पन्न हो गई है। जिसके लिए आज पत्रकारों को संघर्ष करना होगा।
इस अवसर पर वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष संजीव शेखर और महासचिव नरेन्द्र भंडारी ने देशभर से पत्रकारों का धन्यवाद किया। इस अवसर अतिथियों द्वारा स्मारिका वर्ड्स वर्ल्ड का भी विमोचन हुआ, वरिष्ठ पत्रकार विजय क्रान्ति, श्री हर्षवर्धन,बीएमएस दिल्ली के अध्यक्ष बी एस भाटी, महासचिव नागेन्द्र पाल ने भी पत्रकारों को संबोधित किया। अध्यक्षता डीएसजीएमसी के प्रवक्ता परमिंदर पाल ने की।

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मौजूदा ‘डर’ के खिलाफ पत्रकारों की एकजुटता

हम अपने पड़ोस में भी सुरक्षित नहीं हैं:रवीश कुमार

परवीन अर्शी

दिल्ली. प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में दो दिन पहले मीडिया की आज़ादी पर एक बड़ी बहस हुई थी,जिसमें बड़ी तादाद में पत्रकार जुटे थे.शनिवार को आयोजित संगोष्ठी में भी बड़ी तादाद में पत्रकार पहुंचे,उनकी तादाद के साथ उपस्थिति बता रही थी कि देश में रोज़ बरोज़ मीडिया की हालत चिंताजनक होती जा रही है. प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में ‘climate of fear: supperssing the logic and dissent’ विषय पर विचार व्यक्त करने के लिए अग्रणी पत्रकारों को आमंत्रित किया गया.कार्यक्रम के सूत्रधार प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के सचिव नदीम काज़मी थे.
पत्रकारों ने एक सुर में मीडिया के खिलाफ बढ़ती हिंसा का बेबाकी के साथ भय की मौजूदा राजनीति का विरोध किया.राष्ट्रवाद और देशभक्ति के नाम पर पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है. मीडिया ने ‘तर्क और असहमति की आवाज़’ के दमन व भय के खिलाफ एकजुट होने का फैसला किया है।इस चर्चा में वक्ताओं ने सहमति व्यक्त की कि असंतोष कुछ सत्ताधारी तत्व हमेशा हमला करते हैं, लेकिन यह हमले अब तेज और लगातार हो रहे हैं.एनडीटीवी के रविश कुमार, ‘द सिटिज़न’ की सीमा मुस्तफा और वायरस के सिद्धार्थ वरदराजन ने सभा को संबोधित किया.


एनडीटीवी के वरिष्ठ कार्यकारी संपादक रविश कुमार ने कहा कि देश में ‘डर’ का नेशनल प्रोजेक्ट तैयार हो गया है. ऐसे माहौल में सिर्फ ‘गोदी मीडिया’ ही मेहफ़ूज़ है और बाक़ी की कोई गारंटी नहीं है. लोकतंत्र भीड़ तंत्र में परिवर्तित हो गया है और अब फैसले भीड़ कर रही है. और ये भीड़ या डर अब प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से होकर अब साहसी,निर्भीक वेब साइट्स को निशाना बना सकते हैं. उन्होंने कहा,यहां तक कि मेरे पड़ोसी भी मुझे मारने के बाद मेरे साथ आ सकते हैं. यह एक ऐसी संस्कृति है जिसे प्रोत्साहित किया जा रहा है.रविश कुमार ने चेतावनी दी कि ध्रुवीकरण सिर्फ एक समुदाय के खिलाफ नहीं है इसकी शक्ति किसी को भी एक हत्यारे में बदल सकती है. हम अपने पड़ोस में भी सुरक्षित नहीं हैं.

 

 

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प्रेस क्लब से उठी नए प्रेस आयोग के गठन की मांग

दो लाख करोड़ के मीडिया कारोबार की जांच की जाए
वरिष्ठ पत्रकारों ने मीडिया संस्थानों और सरकार पर साधा निशाना

दिल्ली. प्रेस क्लब आफ इंडिया में दिल्ली के पत्रकारों के नवगठित ‘मीडिया मंच’ ने मीडिया के मौजूदा संकट पर एक बड़ी बहस का आयोजन किया जिसमें वक्ताओं ने मीडिया संस्थानों और सरकार पर निशाना साधा. वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा दो लाख करोड़ का मीडिया का कारोबार है सरकार को क्रॉस होल्डिंग पर नीति बनाना चाहिए, साथ मीडिया आयोग बनाकर मीडिया कारोबार की जांच भी होनी चाहिए. मीडिया की वस्तुस्थिति के अवलोकन के लिए नये प्रेस आयोग के गठन की मांग करते हुए कहा गया कि आयोग का गठन कर मीडिया का सम्यक विश्लेषण तथा अवलोकन किया जाना चाहिए।
‘मीडिया की आज़ादी और साख का सवाल’ विषय पर अनुभवी पत्रकार राम बहादुर राय ने वर्तमान पत्रकारीय परिदृश्य पर चिंता जाहिर की तथा कहा कि मीडिया का नियमन होना चाहिए, नियंत्रण नहीं।इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राय ने कहा, नियमन होने से किसी भी संस्थान की कार्य-प्रणाली में सुधार होती है और उसका सुदृढीकरण होता है। इसके लिए हम सभी को प्रयास करना चाहिए।उन्होंने मीडिया की वस्तुस्थिति के अवलोकन के लिए एक बार फिर से नये प्रेस आयोग के गठन की वकालत करते हुए कहा, प्रेस आयोग का गठन कर मीडिया का सम्यक विश्लेषण व अवलोकन किया जाना चाहिए जिससे मीडिया जगत की वर्तमान वस्तुस्थिति के बारे में पता चल सके। उन्होंने संस्थागत सुधार पर भी बल दिया और कहा कि संपादकीय संस्था का पुनरोद्धार होना चाहिए।

बेबाकी के साथ वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता में ख़ैमे बाज़ियां,सहमतियां-असहमतियां पहले भी थीं लेकिन हाल के वर्षों में इसका फ़ीसद बढ़ गया है. सहमत होने की आज़ादी प्रेस की नहीं है असहमति और विरोध ही प्रेस की आज़ादी है. उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा कि मीडिया के बीच राष्ट्रवादी-अराष्ट्रवादी विभाजन हो गया है, जो ग़लत है.
वरिष्ठ स्तम्भकार अनिल चमड़िया ने कहा कि आज सभी बड़े मीडिया संस्थानों ने वैचारिक पत्रकारों या सम्पादकों की छुट्टी कर दी. अख़बार अब सिर्फ़ विज्ञापन तक सीमित होकर रह गए हैं यानी कुत्ते के मुंह में रोटी होगी तो वह भौंकेगा नहीं. उन्होंने कहा कि अब सेल्फ सेंसर शिप का दौर आ गया,क्या छपेगा क्या नहीं यानी पत्रकारों पर एक तरह का दबाव है.कश्मीर में एक नागरिक को एक फ़ौजी अफ़सर जीप से बांधकर घुमाता है और हिंदी अख़बार मौन धारण कर लेते हैं लेकिन अंग्रेजी अख़बारों ने अपने सम्पादकीय पन्नों में खुलकर लिखा.
भारतीय जनसंचार संस्थान :आईआईएमसी: के निदेशक के जी सुरेश ने संस्थान में उत्पन्न हालिया विवादों के संदर्भ में कहा, हमें समान रूप से सभी पक्षों और सभी विचारधारा के लोगों की बातों व विचारों को सुनना चाहिए। हमें किसी चीज व किसी घटना को किसी खांचे में रखने के बजाए उसकी समान व संतुलित रूप से रिपोर्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हरेक घटनाओं को अनावश्यक तूल नहीं देना चाहिए बल्कि हमें समाज के सही व आवश्यक मुद्दों पर सोच-विचार करना चाहिए।
जाने माने पत्रकार एनके सिंह ने कहा कि हम यहाँ पत्रकारिता की साख की बात कर रहे हैं लेकिन जब ये देखा जा रहा हैकि कौन पत्रकार कितना रेवेन्यू लाता है तो फिर साख कहाँ है. मीडिया एक बड़े गंभीर संकट से गुज़र रहा है.एक सम्यक भाव, स्ट्रेट थिंकिंग बंद हो गई है.हमारा ख़तरा है कि समाज हमें रिजेक्ट कर रहा है.
संगोष्ठी के अध्यक्ष और मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने कहा कि पत्रकारों को बाहर नहीं बल्कि अपने अंदर आजादी ढूंढ़नी चाहिए और वे अगर अपने अंतर्मन से दृढ़ संकल्पित हैं तो उन्हें कोई नहीं डिगा सकता।उन्होंने अपने जोशीले भाषण में कहा कि पत्रकारों को निर्भीक होकर अपना काम करना चाहिए।वैदिक ने कहा, अगर आप में दम है तो आपके मार्ग में कोई भी चीज बाधा उपत्पन्न नहीं कर सकती। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों को निष्पक्ष और तटस्थ रहने की भी हिदायत दी।
वरिष्ठ संपादक-पत्रकार जयशंकर गुप्त पहले की पत्रकारिता की आज की पत्रकारिता से तुलना करते हुए अपनी बात इस शेर से शुरू की …’कौन धुआं देखने जाए/ अख़बार में पढ़ लेंगे कहाँ आग लगी. उन्होंने बहुत दबंगता से कहा कि आज जो बहसें चैनलों पर दिखाई दे रही हैं उसका विषय सत्तासीन राजनीतिक दल से पूछ कर तय किया जाता है. मुख्यमंत्री योगी के एक दौरे का ज़िक्र करते हुए श्री गुप्त ने बताया की बुंदेलखंड में सीएम के दौरे से पहले अधिकारी रातोंरात टैंकर से तालाब भर देते हैं ताकि सीएम खुश हो जाएं…और जब दैनिक जागरण में समाचार छप जाता है तो झांसी संस्करण के उस पेज को ब्लंट कर दिया जाता है.

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भारत सहित 120 देशों में फ़िलिस्तीन के समर्थन में विश्व क़ुद्स दिवस की रैलियां

दिल्ली में तंज़ीम उल्मा ए इस्लाम और मजलिस-ए-उल्मा-ए-हिन्द का प्रदर्शन

ऑल इंडिया तंज़ीम उल्मा ए इस्लाम का शास्त्री पार्क दिल्ली में बड़ी क़ादरी मस्जिद के बाहर ऐतिहासिक प्रदर्शन

दिल्ली.विश्व क़ुद्स दिवस के अवसर पर आयोजित रैलियों में देश के वरिष्ठ मज़हबी रहनुमाओं ने भाग लेकर फिलिस्तीन की जनता के प्रति एकजुट होकर इस्राईल के अवैध क़ब्ज़े की निंदा की।रैलियों में हज़ारो की संख्या में जागरूक मुसलमानों ने भाग लेते हुए फिलिस्तीन की जनता के प्रति एकजुटता का सुबूत दिया. जनता ने रैलियों में भाग लेते हुए अमेरिका और इस्राइल के परचम को आग लगाई, तो एक जवान ने इस्राइली प्रधानमंत्री की तस्वीर को हाथ मे लेकर उसको आतंकवादी घोषित किया. शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस की रैली में ईरानी राष्ट्र अपनी भव्य उपस्थिति से पवित्र क़ुद्स की आज़ादी के समर्थन का एलान और अमरीका मुर्दाबाद, इस्राईल मुर्दाबाद, विश्व साम्राज्यवाद व अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनीवाद मुर्दाबाद के नारे के साथ दुनियावालों को बताना चाहता है कि वह फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार व फ़िलिस्तीन के अतिग्रहण की निंदा और आतंकवाद से घृणा करता है.

जंतर मंतर पर मजलिस-ए-उलमा-ए-हिन्द,दिल्ली के नेतृत्व में हज़ारों मोमेनीन ने तिरंगे के साये में खड़े होकर आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए

दिल्ली में ऑल इंडिया तंज़ीम उल्मा ए इस्लाम के तत्वावधान में ऐतिहासिक प्रदर्शन शास्त्री पार्क की सबसे बड़ी क़ादरी मस्जिद के बाहर किया गया.जुमातुल विदा की नमाज़ के बाद फ़िलस्तीन के पक्ष में हुए प्रदर्शन में क़रीब दस हज़ार लोगों ने भारत और फ़िलस्तीन ज़िन्दाबाद के नारे लगाए.

ईरान की इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने अगस्त 1979 में पवित्र रमज़ान के अंतिम जुमे को विश्व क़ुद्स दिवस घोषित करके फ़िलिस्तीनी कॉज़ के लिए बहुत बड़ा क़दम उठाया। उस समय से अब तक फ़िलिस्तीन के विषय का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन बढ़ा है।

जंतर मंतर जुमा की नमाज़ के बाद मजलिस-ए-उलमा-ए-हिन्द,दिल्ली के नेतृत्व में हज़ारों मोमेनीन ने तिरंगे के साये में खड़े होकर आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए.मुसलमानों के धार्मिक स्थल बैतुल मुक़द्दस को इस्राइल के चंगुल से छुड़ाने और आतंकवाद के खिलाफ एक विशाल रैली एवं विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें देश के प्रख्यात समाज सुधारक,धर्म गुरु और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की और रैली के बाद राष्ट्रपति को इस बाबत ज्ञापन भी सौंपा गया.

पूरे मुल्क में फ़िलस्तीन के पक्ष में हुए प्रदर्शन 

इमामे जुमा तेहरानः विश्व क़ुद्स दिवस ने ईरान को गौरव प्रदान किया है
तेहरान की नमाज़े जुमा के इमाम ने विश्व क़ुद्स दिवस की रैलियों में लोगों की भारी भीड़ को ईरान की इस्लामी क्रांति व्यवस्था के लिए गौरवशाली बताया है.तेहरान में जुमे की नमाज़ में आयतुल्लाह सैय्यद अहमद ख़ातेमी ने विश्व क़ुद्स दिवस की रैलियों में ईरानी जनता की भारी उपस्थिति की प्रशंसा की और इसे विश्व साम्राज्य के मुक़ाबले में इस्लामी जगत की एकता का चिन्ह बताया.उन्होंने कहा कि शैतान ने अमरीकी साम्राज्य का रूप धारण किया है और आज इस शैतान के पंजे यमन, बहरैन और सीरिया समेत इस्लामी राष्ट्रों के शरीर पर गढ़े हुए हैं.

देश के दस शहरों में प्रदर्शन मुम्बई में रज़ा एकेडमी के तत्वावधान में अकेडमी के प्रमुख सईद नूरी की अध्यक्षता में प्रदर्शन हुआ जिसमें कई हज़ार लोगों ने भाग लिया. हैदराबाद में ऑल इंडिया तंज़ीम उल्मा ए इस्लाम के प्रदर्शन में हज़ार लोग शरीक़ हुए। जयपुर में तंजीम और अंजुमन फैजाने गरीब नवाज़ के तत्वावधान में सैयद मुहम्मद क़ादरी की अध्यक्षता में सांगानेर में ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ. कोलकाता में मौलाना हसन रजवी की अध्यक्षता में में प्रदर्शन हुआ. राजस्थान के उदयपुर में हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया. उत्तर प्रदेश के शहर संभल, राजस्थान के डीडवाना में भी ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ पर ज़ोरदार प्रदर्शन किया गया.

 

यरूशलम इस्लाम का है, इस्राइल नहीं छीन सकता: मुफ़्ती अशफ़ाक़

यरूशलम सिर्फ़ फ़िलस्तीनियों का नहीं, यह इस्लाम का घर है. यहाँ इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र मस्जिद अलअक़्सा है. हर मुसलमान इस्राइल को इस बात के लिए मजबूर करे कि वह यरूशलम से अपनी अवैध बस्तियों को हटाए. अमेरिका, नाटो और अरब के भ्रष्ट वहाबी चरित्रहीन तानाशाहों के बल पर इज़राइल फ़िलस्तीन पर ज़ुल्म कर रहा है जिसे भारत के मुसलमान ने ना कभी बर्दाश्त किया था और ना ही कभी करेगा.
मस्जिद अलअक़्सा को बचाएंगे: नक्शबंदी
दरबारे अहले सुन्नत संगठन के पीर सय्यद जावेद अली नक्शबंदी ने बताया कि इज़राइल यरूशलम पर अपने अनैतिक क़ब्ज़े के क्रम में मस्जिद अलअक़्सा को बर्बाद करने पर तुला हुआ है और यह फ़िलस्तीन ही नहीं बल्कि वैश्विक इस्लामी समाज के इतिहास के लिए तीसरा सबसे महत्वपूर्ण स्थल है. मस्जिद अलअक़्सा पर पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब ने नमाज़ पढ़वाई है और क़ुरआन में भी मस्जिद अलअक़्सा का ज़िक्र है.

11 हज़ार फ़िलस्तीनियों की रिहाई हो:मौलाना इफ्तिखार रजवी
आलाहजरत यूथ ब्रिगेड संगठन के मौलाना इफ्तिखार रजवी ने कहाकि ज़ियोनवादी भ्रष्ट इज़राइल ने अपनी जेलों में 11 हज़ार बेगुनाह लोगों को जेलों में बन्द कर रखा है जिसकी फ़ौरन रिहाई होनी चाहिए. इन क़ैदियों में 14 साल से छोटे बच्चे, महिलाएँ और बेशुमार वृद्ध फ़िलस्तीनी हैं जिन पर कोई जुर्म साबित नहीं होता.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से आशिके रसूल फ्रंट के हाजी शाह मुहम्मद कादरी, बुलंद मस्जिद के इमाम कारी रफीक नूरी, फरूके अजं मस्जिद के इमाम मौलाना असरारुल हक, इमाम मुफ़्ती इश्तियाक कादरी, मदरसा साबरिया के कारी फुरकान, गौसिया मस्जिद के मौलाना अब्बास, मस्जिद रज़ा के मुफ़्ती इकबाल मिस्बाही, मदरसा नूरुल कुरान के मौलाना मुहम्मद आलम, मदरसा गुलशने इस्लाम के मौलाना मुस्तक़ीम, जमा मस्जिद करदम पूरी के मौलाना कामिल रज़ा, जाफराबाद के मौलाना फिरदौस व मौलाना मेराज, सीलमपुर के कारी शम्स व मौलाना अनवर, खजुरी के मौलाना गुलाम मुहम्मद, मौलाना शाबान व कारी मोईनुद्दीन, कादरी मस्जिद के कारी जमशेद व जाहिद रज़ा, मदरसा सक़लैन के कारी फहीम,कारी सगीर रजवीऔर कारी सलीम सहित हज़ारों लोग मौजूद रहे.

भारत हमेशा फिलिस्तिनियो के पक्ष में रहा है:चौधरी मतीन
दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन चौधरी मतीन ने कहा कि भारत हमेशा से आम फ़िलस्तीनियों के दर्द को आवाज़ देता रहा है और हमारा राजनीतिक स्टैंड यही रहा है कि हमने कभी फ़िलस्तीन की क़ीमत पर इस्राइल को दोस्त नहीं माना.

क़ुद्स दिवस का ऐतिहासिक महत्व: शुजात क़ादरी
भारत के सबसे बड़े छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इंडिया के महासचिव इंजीनियर शुजात अली क़ादरी ने कहाकि ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ की परम्परा ईरान से चली है और हर रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को दुनिया भर में इसका आयोजन किया जाता है. अरबी में क़ुद्स शहर यरूशलम का नाम है. क़ुद्स की स्वतंत्रता के रूप में फ़िलस्तीन पर इज़राइली क़ब्ज़े के विरोध का प्रतीक है. क़ुद्स दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें आम फ़िलस्तीनियों के दर्द को भूलना नहीं चाहिए.

हमारे ज्ञापन को समझें मोदी: मौलाना अब्दुल वाहिद
मदरसा गौसुस सक़लैन के प्रिंसिपल मौलाना अब्दुल वाहिद ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की दोस्ती सब जानते हैं लेकिन मोदीजी हमारे ज्ञापन पर ध्यान दें.

 

 

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