गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो:मोदी

नई दिल्ली: संसद भवन में आयोजित सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री मोदी ने गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को सख्त चेतावनी दी। साथ ही राज्य सरकारों को भी ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की हिदायत दी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसा को राजनीतिक लाभ के लिए सांप्रदायिक रंग देकर देश का भला नहीं किया जा सकता।
बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने संवाददाताओं को बैठक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि देश में गोरक्षा का जज़्बा है, लेकिन उसके नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकारों को भी सलाह दी गई है कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
श्री मोदी ने कहा कि राज्य सरकारों से कहा गया है कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। इस तरह की घटनाओं से लोगों का भला नहीं किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर कई लोग व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण कानून हाथ में लेकर भयानक अपराध कर रहे हैं। जो लोग अपनी दुश्मनी की वजह से बदला लेने के लिए ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

 

 

Please follow and like us:

‘सफर अवार्ड’ से परवीन अर्शी सम्मानित

पत्रकारों के साथ फिल्म जगत के कलाकार भी हुए सम्मानित

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, रफी मार्ग में सफर अवार्ड 2017 का आयोजन हुआ। इस अवार्ड में देश के निर्भीक पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इस अवार्ड समारोह में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक,पत्रकारों समेत कई मशहूर कलाकार को सम्मानित किया गया।  समारोह में शकील सैफी, मेडिटेशन गुरु अर्चना दीदी, इनकम टैक्स कमिश्नर प्रीता हरित IRS, राशिद अल्वी,टीवी एक्टरअरुण बख़्शी,जगदीश टाइटलर, एनडीएमसी के वाइस चेयरमैन करण सिंह तंवर समेत कई राजनीति और फ़िल्म जगत के दिग्गत मौजूद थे।
वहीं इस समरोह में आज तक से पंकज जैन, एबीपी से जैनेन्द्र, ईटीवी से रचना, डीडी न्यूज़ से गिरीश निशाना, ए2जेड से अली अब्बास नकवी, जे एन्ड के से ताबिश कमाल, प्राइम न्यूज़ से मुबश्शिर, मुंसिफ टीवी से जागृति सिंह, जी मीडिया से आशीष माहेश्वरी, अफसर आलम, मारूफ रज़ा, इंडिया न्यूज से निसार सिद्दीकी, मुस्तकी हुसैन, सुदर्शन से रंजना शर्मा, जनता टीवी से अभिषेक,लखविंदर, नेशनल वॉइस से अंकित, वीर अर्जुन से विजय शर्मा, नवोदय से शम्स आलम, पंजाब केसरी से वसीम सरवर, इन्किलाब से अंजुम जाफरी, रोज़नामा ख़बरें से अनवर जाफरी,अंजली भाटिया, फहीम,अनिल अत्री, शिवेंद्र अमिताभ, हर्षित मिश्रा, राजेन्द्र स्वामी, दीपक दहिया, दीपक शर्मा, अमान हाशमी, वाजिद अली,निशा गौतम देहरादून, राजेश खन्ना, शगुफ्ता टाइम्स की संपादक परवीन अर्शी, सुमित भोजगी, बीआर मोर्य, गुफरान आफरीदी,कमल कंसल,शगुफ्ता शिरीन रायपुर,यूके मन्ना समेत कई दिग्गज पत्रकारों को सम्मानित किया गया। समारोह के आयोजक सफर आपके साथ मैगज़ीन के संपादक इम्तियाज़ अहमद थे।

Please follow and like us:

मीडिया रिफॉर्म के लिए विधेयक शीघ्र: बंडारू दत्तात्रेय

डब्ल्यू जे आई का मीडिया महापंचायत संपन्न

नई दिल्ली, वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित मीडिया की महापंचायत में श्रम और रोजगार मंत्री बंडारू दत्तात्रेय शिक्षक की भूमिका में बखुबी पेश आये। उन्होंने पत्रकारों को खासकर निष्पक्ष, पारदर्शी, सत्य, सकारात्मक, मूलयपरक, समाजहित और राष्ट्रधर्म का अनुपालन करने की पाठ सिखाई उन्होंने कहा की देश में व्याप्त एंटी नेशनल (अश्लील और असामाजिक) पत्रकारिता को जड़ से मिटा कर राष्ट्रहित में शक्तिशाली समृद्धशाली राष्ट्रनिर्माण की मुख्यधारा से जुड़े ।
उन्होंने भारतीय मजदुर संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार और प्रदेश महासचिव नागेंद्र पाल को धन्यवाद दिया की उनके अथक प्रयास से भारतीय मजदूर संघ ने एक वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया का गठन और सम्बद्धता प्रदान करके एक नया इतिहास लिखा है।
अपने एक अनुभव को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि आपातकाल मे मुझे 16 महिने जेल मे डाला गया था, तब मै जेल मे पढ़ता लिखता था उस समय देश के पत्रकारों के लेखनो ने मुझे बहुत ही प्रभावित किया। प्रदेश की समस्याओं के लिए मैने 145 पत्र तत्कालीन मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी को लिखा।
इस अवसर श्री दत्तात्रेय वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट मे वेब- डिजिटल सोशल ब्रॉडकास्ट एवं ,इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारो के श्रमिक अधिकार मुहैया कराने हेतु समीक्षा बैठक करेंगे इसके लिए देशभर के मुख्यमंत्री और श्रममंत्रियो की बैठक बुलाकर नया वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट का विधेयक बुलाकर कानून का स्वरूप प्रदान करेंगे।
भारतीय मजदुर संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार ने इस अवसर पर पत्रकार हितो में सामाजिक सुरक्षा,सामान कार्य सामान वेतन, ठेका मजदूरी के समापन और प्रेस काउंसिल को भंग करके मीडिया कॉउंसिल के गठन का जोरदार प्रस्ताव श्रम मंत्री के समक्ष रखा। उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर उपरोक्त मीडिया रिफॉर्म कराने की घोषणा श्रम मंत्री ने की ।
इस अवसर पर केन्द्रीय विज्ञान और तकनीक मंत्री डा. हर्षवर्धन ने कहा कि आप अपने समस्याओ के लिए जरूर लड़े, पर सकारात्मक रिपोर्टिंग और राष्ट्र को सर्वोपरि रखे। समाज में बदलते जीवनमूल्यों के प्रति भी उन्होंने पत्रकारों का ध्यान आकृष्ट किया। और देश के विभिन्न राज्यों से आये पत्रकारों को बधाई दी।
इस अवसर पर पुर्वी दिल्ली के सांसद महेश गिरी ने कहा कि पत्रकार सत्य का दर्पण होता है, समाज की समस्याओं को पत्रकार ही होता है जो सामने लाता है पर इस पत्रकार के सामने आज स्वयं कई चुनौतियां उत्पन्न हो गई है। जिसके लिए आज पत्रकारों को संघर्ष करना होगा।
इस अवसर पर वर्किंग जर्नलिस्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष संजीव शेखर और महासचिव नरेन्द्र भंडारी ने देशभर से पत्रकारों का धन्यवाद किया। इस अवसर अतिथियों द्वारा स्मारिका वर्ड्स वर्ल्ड का भी विमोचन हुआ, वरिष्ठ पत्रकार विजय क्रान्ति, श्री हर्षवर्धन,बीएमएस दिल्ली के अध्यक्ष बी एस भाटी, महासचिव नागेन्द्र पाल ने भी पत्रकारों को संबोधित किया। अध्यक्षता डीएसजीएमसी के प्रवक्ता परमिंदर पाल ने की।

Please follow and like us:

मौजूदा ‘डर’ के खिलाफ पत्रकारों की एकजुटता

हम अपने पड़ोस में भी सुरक्षित नहीं हैं:रवीश कुमार

परवीन अर्शी

दिल्ली. प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में दो दिन पहले मीडिया की आज़ादी पर एक बड़ी बहस हुई थी,जिसमें बड़ी तादाद में पत्रकार जुटे थे.शनिवार को आयोजित संगोष्ठी में भी बड़ी तादाद में पत्रकार पहुंचे,उनकी तादाद के साथ उपस्थिति बता रही थी कि देश में रोज़ बरोज़ मीडिया की हालत चिंताजनक होती जा रही है. प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में ‘climate of fear: supperssing the logic and dissent’ विषय पर विचार व्यक्त करने के लिए अग्रणी पत्रकारों को आमंत्रित किया गया.कार्यक्रम के सूत्रधार प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के सचिव नदीम काज़मी थे.
पत्रकारों ने एक सुर में मीडिया के खिलाफ बढ़ती हिंसा का बेबाकी के साथ भय की मौजूदा राजनीति का विरोध किया.राष्ट्रवाद और देशभक्ति के नाम पर पत्रकारों को प्रताड़ित किया जा रहा है. मीडिया ने ‘तर्क और असहमति की आवाज़’ के दमन व भय के खिलाफ एकजुट होने का फैसला किया है।इस चर्चा में वक्ताओं ने सहमति व्यक्त की कि असंतोष कुछ सत्ताधारी तत्व हमेशा हमला करते हैं, लेकिन यह हमले अब तेज और लगातार हो रहे हैं.एनडीटीवी के रविश कुमार, ‘द सिटिज़न’ की सीमा मुस्तफा और वायरस के सिद्धार्थ वरदराजन ने सभा को संबोधित किया.


एनडीटीवी के वरिष्ठ कार्यकारी संपादक रविश कुमार ने कहा कि देश में ‘डर’ का नेशनल प्रोजेक्ट तैयार हो गया है. ऐसे माहौल में सिर्फ ‘गोदी मीडिया’ ही मेहफ़ूज़ है और बाक़ी की कोई गारंटी नहीं है. लोकतंत्र भीड़ तंत्र में परिवर्तित हो गया है और अब फैसले भीड़ कर रही है. और ये भीड़ या डर अब प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से होकर अब साहसी,निर्भीक वेब साइट्स को निशाना बना सकते हैं. उन्होंने कहा,यहां तक कि मेरे पड़ोसी भी मुझे मारने के बाद मेरे साथ आ सकते हैं. यह एक ऐसी संस्कृति है जिसे प्रोत्साहित किया जा रहा है.रविश कुमार ने चेतावनी दी कि ध्रुवीकरण सिर्फ एक समुदाय के खिलाफ नहीं है इसकी शक्ति किसी को भी एक हत्यारे में बदल सकती है. हम अपने पड़ोस में भी सुरक्षित नहीं हैं.

 

 

Please follow and like us:

प्रेस क्लब से उठी नए प्रेस आयोग के गठन की मांग

दो लाख करोड़ के मीडिया कारोबार की जांच की जाए
वरिष्ठ पत्रकारों ने मीडिया संस्थानों और सरकार पर साधा निशाना

दिल्ली. प्रेस क्लब आफ इंडिया में दिल्ली के पत्रकारों के नवगठित ‘मीडिया मंच’ ने मीडिया के मौजूदा संकट पर एक बड़ी बहस का आयोजन किया जिसमें वक्ताओं ने मीडिया संस्थानों और सरकार पर निशाना साधा. वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा दो लाख करोड़ का मीडिया का कारोबार है सरकार को क्रॉस होल्डिंग पर नीति बनाना चाहिए, साथ मीडिया आयोग बनाकर मीडिया कारोबार की जांच भी होनी चाहिए. मीडिया की वस्तुस्थिति के अवलोकन के लिए नये प्रेस आयोग के गठन की मांग करते हुए कहा गया कि आयोग का गठन कर मीडिया का सम्यक विश्लेषण तथा अवलोकन किया जाना चाहिए।
‘मीडिया की आज़ादी और साख का सवाल’ विषय पर अनुभवी पत्रकार राम बहादुर राय ने वर्तमान पत्रकारीय परिदृश्य पर चिंता जाहिर की तथा कहा कि मीडिया का नियमन होना चाहिए, नियंत्रण नहीं।इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राय ने कहा, नियमन होने से किसी भी संस्थान की कार्य-प्रणाली में सुधार होती है और उसका सुदृढीकरण होता है। इसके लिए हम सभी को प्रयास करना चाहिए।उन्होंने मीडिया की वस्तुस्थिति के अवलोकन के लिए एक बार फिर से नये प्रेस आयोग के गठन की वकालत करते हुए कहा, प्रेस आयोग का गठन कर मीडिया का सम्यक विश्लेषण व अवलोकन किया जाना चाहिए जिससे मीडिया जगत की वर्तमान वस्तुस्थिति के बारे में पता चल सके। उन्होंने संस्थागत सुधार पर भी बल दिया और कहा कि संपादकीय संस्था का पुनरोद्धार होना चाहिए।

बेबाकी के साथ वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता में ख़ैमे बाज़ियां,सहमतियां-असहमतियां पहले भी थीं लेकिन हाल के वर्षों में इसका फ़ीसद बढ़ गया है. सहमत होने की आज़ादी प्रेस की नहीं है असहमति और विरोध ही प्रेस की आज़ादी है. उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा कि मीडिया के बीच राष्ट्रवादी-अराष्ट्रवादी विभाजन हो गया है, जो ग़लत है.
वरिष्ठ स्तम्भकार अनिल चमड़िया ने कहा कि आज सभी बड़े मीडिया संस्थानों ने वैचारिक पत्रकारों या सम्पादकों की छुट्टी कर दी. अख़बार अब सिर्फ़ विज्ञापन तक सीमित होकर रह गए हैं यानी कुत्ते के मुंह में रोटी होगी तो वह भौंकेगा नहीं. उन्होंने कहा कि अब सेल्फ सेंसर शिप का दौर आ गया,क्या छपेगा क्या नहीं यानी पत्रकारों पर एक तरह का दबाव है.कश्मीर में एक नागरिक को एक फ़ौजी अफ़सर जीप से बांधकर घुमाता है और हिंदी अख़बार मौन धारण कर लेते हैं लेकिन अंग्रेजी अख़बारों ने अपने सम्पादकीय पन्नों में खुलकर लिखा.
भारतीय जनसंचार संस्थान :आईआईएमसी: के निदेशक के जी सुरेश ने संस्थान में उत्पन्न हालिया विवादों के संदर्भ में कहा, हमें समान रूप से सभी पक्षों और सभी विचारधारा के लोगों की बातों व विचारों को सुनना चाहिए। हमें किसी चीज व किसी घटना को किसी खांचे में रखने के बजाए उसकी समान व संतुलित रूप से रिपोर्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हरेक घटनाओं को अनावश्यक तूल नहीं देना चाहिए बल्कि हमें समाज के सही व आवश्यक मुद्दों पर सोच-विचार करना चाहिए।
जाने माने पत्रकार एनके सिंह ने कहा कि हम यहाँ पत्रकारिता की साख की बात कर रहे हैं लेकिन जब ये देखा जा रहा हैकि कौन पत्रकार कितना रेवेन्यू लाता है तो फिर साख कहाँ है. मीडिया एक बड़े गंभीर संकट से गुज़र रहा है.एक सम्यक भाव, स्ट्रेट थिंकिंग बंद हो गई है.हमारा ख़तरा है कि समाज हमें रिजेक्ट कर रहा है.
संगोष्ठी के अध्यक्ष और मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक ने कहा कि पत्रकारों को बाहर नहीं बल्कि अपने अंदर आजादी ढूंढ़नी चाहिए और वे अगर अपने अंतर्मन से दृढ़ संकल्पित हैं तो उन्हें कोई नहीं डिगा सकता।उन्होंने अपने जोशीले भाषण में कहा कि पत्रकारों को निर्भीक होकर अपना काम करना चाहिए।वैदिक ने कहा, अगर आप में दम है तो आपके मार्ग में कोई भी चीज बाधा उपत्पन्न नहीं कर सकती। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों को निष्पक्ष और तटस्थ रहने की भी हिदायत दी।
वरिष्ठ संपादक-पत्रकार जयशंकर गुप्त पहले की पत्रकारिता की आज की पत्रकारिता से तुलना करते हुए अपनी बात इस शेर से शुरू की …’कौन धुआं देखने जाए/ अख़बार में पढ़ लेंगे कहाँ आग लगी. उन्होंने बहुत दबंगता से कहा कि आज जो बहसें चैनलों पर दिखाई दे रही हैं उसका विषय सत्तासीन राजनीतिक दल से पूछ कर तय किया जाता है. मुख्यमंत्री योगी के एक दौरे का ज़िक्र करते हुए श्री गुप्त ने बताया की बुंदेलखंड में सीएम के दौरे से पहले अधिकारी रातोंरात टैंकर से तालाब भर देते हैं ताकि सीएम खुश हो जाएं…और जब दैनिक जागरण में समाचार छप जाता है तो झांसी संस्करण के उस पेज को ब्लंट कर दिया जाता है.

Please follow and like us:

भारत सहित 120 देशों में फ़िलिस्तीन के समर्थन में विश्व क़ुद्स दिवस की रैलियां

दिल्ली में तंज़ीम उल्मा ए इस्लाम और मजलिस-ए-उल्मा-ए-हिन्द का प्रदर्शन

ऑल इंडिया तंज़ीम उल्मा ए इस्लाम का शास्त्री पार्क दिल्ली में बड़ी क़ादरी मस्जिद के बाहर ऐतिहासिक प्रदर्शन

दिल्ली.विश्व क़ुद्स दिवस के अवसर पर आयोजित रैलियों में देश के वरिष्ठ मज़हबी रहनुमाओं ने भाग लेकर फिलिस्तीन की जनता के प्रति एकजुट होकर इस्राईल के अवैध क़ब्ज़े की निंदा की।रैलियों में हज़ारो की संख्या में जागरूक मुसलमानों ने भाग लेते हुए फिलिस्तीन की जनता के प्रति एकजुटता का सुबूत दिया. जनता ने रैलियों में भाग लेते हुए अमेरिका और इस्राइल के परचम को आग लगाई, तो एक जवान ने इस्राइली प्रधानमंत्री की तस्वीर को हाथ मे लेकर उसको आतंकवादी घोषित किया. शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस की रैली में ईरानी राष्ट्र अपनी भव्य उपस्थिति से पवित्र क़ुद्स की आज़ादी के समर्थन का एलान और अमरीका मुर्दाबाद, इस्राईल मुर्दाबाद, विश्व साम्राज्यवाद व अंतर्राष्ट्रीय ज़ायोनीवाद मुर्दाबाद के नारे के साथ दुनियावालों को बताना चाहता है कि वह फ़िलिस्तीनियों के जनसंहार व फ़िलिस्तीन के अतिग्रहण की निंदा और आतंकवाद से घृणा करता है.

जंतर मंतर पर मजलिस-ए-उलमा-ए-हिन्द,दिल्ली के नेतृत्व में हज़ारों मोमेनीन ने तिरंगे के साये में खड़े होकर आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए

दिल्ली में ऑल इंडिया तंज़ीम उल्मा ए इस्लाम के तत्वावधान में ऐतिहासिक प्रदर्शन शास्त्री पार्क की सबसे बड़ी क़ादरी मस्जिद के बाहर किया गया.जुमातुल विदा की नमाज़ के बाद फ़िलस्तीन के पक्ष में हुए प्रदर्शन में क़रीब दस हज़ार लोगों ने भारत और फ़िलस्तीन ज़िन्दाबाद के नारे लगाए.

ईरान की इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने अगस्त 1979 में पवित्र रमज़ान के अंतिम जुमे को विश्व क़ुद्स दिवस घोषित करके फ़िलिस्तीनी कॉज़ के लिए बहुत बड़ा क़दम उठाया। उस समय से अब तक फ़िलिस्तीन के विषय का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन बढ़ा है।

जंतर मंतर जुमा की नमाज़ के बाद मजलिस-ए-उलमा-ए-हिन्द,दिल्ली के नेतृत्व में हज़ारों मोमेनीन ने तिरंगे के साये में खड़े होकर आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाए.मुसलमानों के धार्मिक स्थल बैतुल मुक़द्दस को इस्राइल के चंगुल से छुड़ाने और आतंकवाद के खिलाफ एक विशाल रैली एवं विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें देश के प्रख्यात समाज सुधारक,धर्म गुरु और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की और रैली के बाद राष्ट्रपति को इस बाबत ज्ञापन भी सौंपा गया.

पूरे मुल्क में फ़िलस्तीन के पक्ष में हुए प्रदर्शन 

इमामे जुमा तेहरानः विश्व क़ुद्स दिवस ने ईरान को गौरव प्रदान किया है
तेहरान की नमाज़े जुमा के इमाम ने विश्व क़ुद्स दिवस की रैलियों में लोगों की भारी भीड़ को ईरान की इस्लामी क्रांति व्यवस्था के लिए गौरवशाली बताया है.तेहरान में जुमे की नमाज़ में आयतुल्लाह सैय्यद अहमद ख़ातेमी ने विश्व क़ुद्स दिवस की रैलियों में ईरानी जनता की भारी उपस्थिति की प्रशंसा की और इसे विश्व साम्राज्य के मुक़ाबले में इस्लामी जगत की एकता का चिन्ह बताया.उन्होंने कहा कि शैतान ने अमरीकी साम्राज्य का रूप धारण किया है और आज इस शैतान के पंजे यमन, बहरैन और सीरिया समेत इस्लामी राष्ट्रों के शरीर पर गढ़े हुए हैं.

देश के दस शहरों में प्रदर्शन मुम्बई में रज़ा एकेडमी के तत्वावधान में अकेडमी के प्रमुख सईद नूरी की अध्यक्षता में प्रदर्शन हुआ जिसमें कई हज़ार लोगों ने भाग लिया. हैदराबाद में ऑल इंडिया तंज़ीम उल्मा ए इस्लाम के प्रदर्शन में हज़ार लोग शरीक़ हुए। जयपुर में तंजीम और अंजुमन फैजाने गरीब नवाज़ के तत्वावधान में सैयद मुहम्मद क़ादरी की अध्यक्षता में सांगानेर में ज़ोरदार प्रदर्शन हुआ. कोलकाता में मौलाना हसन रजवी की अध्यक्षता में में प्रदर्शन हुआ. राजस्थान के उदयपुर में हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया. उत्तर प्रदेश के शहर संभल, राजस्थान के डीडवाना में भी ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ पर ज़ोरदार प्रदर्शन किया गया.

 

यरूशलम इस्लाम का है, इस्राइल नहीं छीन सकता: मुफ़्ती अशफ़ाक़

यरूशलम सिर्फ़ फ़िलस्तीनियों का नहीं, यह इस्लाम का घर है. यहाँ इस्लाम की तीसरी सबसे पवित्र मस्जिद अलअक़्सा है. हर मुसलमान इस्राइल को इस बात के लिए मजबूर करे कि वह यरूशलम से अपनी अवैध बस्तियों को हटाए. अमेरिका, नाटो और अरब के भ्रष्ट वहाबी चरित्रहीन तानाशाहों के बल पर इज़राइल फ़िलस्तीन पर ज़ुल्म कर रहा है जिसे भारत के मुसलमान ने ना कभी बर्दाश्त किया था और ना ही कभी करेगा.
मस्जिद अलअक़्सा को बचाएंगे: नक्शबंदी
दरबारे अहले सुन्नत संगठन के पीर सय्यद जावेद अली नक्शबंदी ने बताया कि इज़राइल यरूशलम पर अपने अनैतिक क़ब्ज़े के क्रम में मस्जिद अलअक़्सा को बर्बाद करने पर तुला हुआ है और यह फ़िलस्तीन ही नहीं बल्कि वैश्विक इस्लामी समाज के इतिहास के लिए तीसरा सबसे महत्वपूर्ण स्थल है. मस्जिद अलअक़्सा पर पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब ने नमाज़ पढ़वाई है और क़ुरआन में भी मस्जिद अलअक़्सा का ज़िक्र है.

11 हज़ार फ़िलस्तीनियों की रिहाई हो:मौलाना इफ्तिखार रजवी
आलाहजरत यूथ ब्रिगेड संगठन के मौलाना इफ्तिखार रजवी ने कहाकि ज़ियोनवादी भ्रष्ट इज़राइल ने अपनी जेलों में 11 हज़ार बेगुनाह लोगों को जेलों में बन्द कर रखा है जिसकी फ़ौरन रिहाई होनी चाहिए. इन क़ैदियों में 14 साल से छोटे बच्चे, महिलाएँ और बेशुमार वृद्ध फ़िलस्तीनी हैं जिन पर कोई जुर्म साबित नहीं होता.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से आशिके रसूल फ्रंट के हाजी शाह मुहम्मद कादरी, बुलंद मस्जिद के इमाम कारी रफीक नूरी, फरूके अजं मस्जिद के इमाम मौलाना असरारुल हक, इमाम मुफ़्ती इश्तियाक कादरी, मदरसा साबरिया के कारी फुरकान, गौसिया मस्जिद के मौलाना अब्बास, मस्जिद रज़ा के मुफ़्ती इकबाल मिस्बाही, मदरसा नूरुल कुरान के मौलाना मुहम्मद आलम, मदरसा गुलशने इस्लाम के मौलाना मुस्तक़ीम, जमा मस्जिद करदम पूरी के मौलाना कामिल रज़ा, जाफराबाद के मौलाना फिरदौस व मौलाना मेराज, सीलमपुर के कारी शम्स व मौलाना अनवर, खजुरी के मौलाना गुलाम मुहम्मद, मौलाना शाबान व कारी मोईनुद्दीन, कादरी मस्जिद के कारी जमशेद व जाहिद रज़ा, मदरसा सक़लैन के कारी फहीम,कारी सगीर रजवीऔर कारी सलीम सहित हज़ारों लोग मौजूद रहे.

भारत हमेशा फिलिस्तिनियो के पक्ष में रहा है:चौधरी मतीन
दिल्ली वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन चौधरी मतीन ने कहा कि भारत हमेशा से आम फ़िलस्तीनियों के दर्द को आवाज़ देता रहा है और हमारा राजनीतिक स्टैंड यही रहा है कि हमने कभी फ़िलस्तीन की क़ीमत पर इस्राइल को दोस्त नहीं माना.

क़ुद्स दिवस का ऐतिहासिक महत्व: शुजात क़ादरी
भारत के सबसे बड़े छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इंडिया के महासचिव इंजीनियर शुजात अली क़ादरी ने कहाकि ‘अन्तरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस’ की परम्परा ईरान से चली है और हर रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को दुनिया भर में इसका आयोजन किया जाता है. अरबी में क़ुद्स शहर यरूशलम का नाम है. क़ुद्स की स्वतंत्रता के रूप में फ़िलस्तीन पर इज़राइली क़ब्ज़े के विरोध का प्रतीक है. क़ुद्स दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें आम फ़िलस्तीनियों के दर्द को भूलना नहीं चाहिए.

हमारे ज्ञापन को समझें मोदी: मौलाना अब्दुल वाहिद
मदरसा गौसुस सक़लैन के प्रिंसिपल मौलाना अब्दुल वाहिद ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की दोस्ती सब जानते हैं लेकिन मोदीजी हमारे ज्ञापन पर ध्यान दें.

 

 

Please follow and like us:

इम्वा अवार्ड्स से परवीन अर्शी सम्मानित

शगुफ्ता टाइम्स की संपादक परवीन अर्शी को सम्मानित करते हुए केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज और एनडीएमसी के उपाध्यक्ष करण सिंह तंवर.

दिल्ली.एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में इंडियन मीडिया एसोसिएशन (इम्वा अवार्ड्स) ने आजतक, इंडिया न्यूज़,न्यूज़ 24 ,जनता टीवी,एनडीटीवी,नवभारत टाइम्स,पंजाब केसरी,नवोदय टाइम्स के जुझारू,कर्मठ,खोजी और बहुचर्चित 51 पत्रकारों को छठे इम्वा अवार्ड 2017 से सम्मानित किया. जानीमानी जांबाज़-बेबाक पत्रकार और शगुफ्ताटाइम्स.कॉम, हिंदी साप्ताहिक शगुफ्ता टाइम्स की संपादक परवीन अर्शी को भी बोल्ड (साहसी,निर्भीक) पत्रकारिता के लिए इम्वा अवार्ड से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कृष्णा राज ने सम्मानित किया. इंद्रप्रस्थ प्रेस क्लब के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र भंडारी को भी सम्मानित किया गया .


इस अवसर पर इंडियन मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार राजीव निशाना ने बताया की परवीन अर्शी अपनी बीमारी के बावजूद निरंतर सक्रिय रही हैं और शगुफ्ता टाइम्स की शुरुआत कर उन्होंने अपने साहस,अपनी निर्भीकता से पत्रकार बिरादरी को नई प्रेरणा दी है.केंद्रीय मंत्री कृष्णा राज ने भी परवीन अर्शी के जज़्बे की तारीफ़ करते हुए उन्हें गर्मजोशी से गले लगाकर शाबासी दी.

 

 

Please follow and like us:

कामयाबी की ‘जीनियस’ मिसाल ई श्रीधरन

क्या ई श्रीधरन होंगे अगले राष्ट्रपति

परवीन अर्शी

ई श्रीधरन भारत के एक प्रख्यात सिविल इंजीनियर हैं. वे 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो के निदेशक रहे . उन्हें भारत के ‘मेट्रो मैन’ के रूप में भी जाना जाता है. भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्मश्री तथा 2008 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया . ई श्रीधरन ने बहुत कम समय में दिल्ली मेट्रो के निर्माण को किसी सपने की तरह बेहद कुशलता और श्रेष्ठता के साथ पूरा कर दिखाया था.
वक़्त के पाबंद श्रीधरन और कार्य में कुशलता के लिए पहचाने जाते हैं .1963 में रामेश्वरम और तमिलनाडु को आपस में जोड़ने वाला पम्बन पुल टूट गया था.रेलवे ने उसके पुननिर्माण के लिए छह माह का लक्ष्य दिया था, लेकिन उस क्षेत्र के इंजार्च ने यह अवधि तीन महीने कर दी और जिम्मेदारी श्रीधरन को सौंपी. श्रीधरन ने मात्र 45 दिनों के भीतर काम करके दिखा दिया. इसी तरह श्रीधरन के नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो का 65 किलोमीटर के विस्तार वाला पहला फेज अपने तय समय से पहले केवल दो साल और नौ माह में पूरा हो गया था. काकीनाडा गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने वाले श्रीधरन का जन्म केरल के पलक्कड़ में 12 जून 1932 को हुआ था. दिल्ली मेट्रो के पहले उन्होंने कोंकण रेलवे जैसी कठिन और चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया. इसके अलावा भारत के पहले मेट्रो प्रोजेक्ट कोलकाता मेट्रो के निर्माण में भी उनकी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण थी.
अनेक पुरस्कारों से सम्मानित
अपनी अमूल्य सेवाओं के लिए श्रीधरन कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं। 1963 में उन्हें ‘रेल मंत्री अवॉर्ड’ दिया गया तो 2003 में ‘टाइम मैगजीन’ ने उन्हें ‘वन ऑफ एशियाज हीरोज’ के खिताब से नवाजा. फ्रांस सरकार ने उन्हें 2005 में ‘नाइट ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया, वहीं भारत सरकार ने उन्हें 2001 में ‘पद्मश्री’ तथा 2008 में दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ प्रदान किया.श्रीधरन ने सरकार से कई बार रिटायरमेंट देने के लिए आग्रह किया, लेकिन सरकार उन जैसे ‘जीनियस’ की सेवाओं से महरूम नहीं होना चाहती थी, लिहाजा उनकी रिटायरमेंट टलती रही। लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए सरकार ने उनके रिटायरमेंट को स्वीकृति दे दी और वह 31 दिसंबर 2011 को सेवानिवृत्त हुए.

समय के पाबन्द
समय की पाबंदी यानी पंक्चुएलिटी का ई़. श्रीधरन से बढ़ कर दूसरा उदाहरण खोजना नामुमकिन नहीं तो नामुमकिन जैसा जरूर है। उनका मानना है कि किसी भी काम में सफल होने के लिए पंक्चुएलिटी बहुत जरूरी है। उनके नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो के सभी फेज तय समयसीमा और बजट में पूरे किए गए.
ईमानदारी
श्रीधरन की कामयाबी की सबसे बड़ी वजहों में से एक है उनकी ईमानदारी। उनका मानना है कि काम केवल समय पर पूरा होना ही काफी नहीं है, बल्कि वह स्तरीय भी होना चाहिए और इसके लिए ईमानदारी बहुत जरूरी है, तभी पूर्ण रूप से सफलता मिलेगी। वह कहते हैं, ‘हम पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के मामले में कभी समझौता नहीं करते।’श्रीधरन काम करने वालों की पेशेवर योग्यता को लेकर कोई समझौता नहीं करते, लिहाजा उनके द्वारा हाथ में लिया गया कोई भी प्रोजेक्ट असफल या कम गुणवत्ता वाला साबित नहीं हुआ। जब भी जरूरत पड़ी, उन्होंने कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिलाया। उन्होंने दिल्ली मेट्रो के निर्माण कार्य में लगे लोगों को बेहतर प्रशिक्षण के लिए विदेश भी भेजा, क्योंकि उनका मानना है कि किसी भी काम की सफलता अंतत: उसे करने वाले लोगों की योग्यता पर ही निर्भर करती है।
स्पष्ट नज़रिया
कोई भी काम तभी सफल होता है, जब उसे करने वाले के पास एक स्पष्ट सोच और दृष्टि होती है। दुनिया के महान लोगों की सफलता में इस तथ्य को तलाशा जा सकता है। श्रीधरन भी इस बात को पूरी शिद्दत के साथ मानते और अनुसरण करते हैं। वह कहते हैं, ‘लोगों को कष्ट दिए बगैर तय समय और बजट में काम पूरा करने के लिए विजन और स्पष्ट ऑब्जेक्टिव होना बहुत जरूरी है। इसके बगैर सफलता की कल्पना नहीं की जा सकती।’श्रीधरन का माना हैकि केवल सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ही काफी नहीं है। पारदर्शिता, कार्यक्षमता, जवाबदेही, सर्विस-ओरिएंटेशन और सभी घटकों की सहभागिता भी उतनी ही महवपूर्ण है।’ इस बात को वह सिर्फ कहते ही नहीं, अमल में भी लाते हैं। उन्होंने अब तक के अपने सभी प्रोजेक्टों में उससे जुड़े सभी पक्षों की सहभागिता को सुनिश्चित किया है और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित किया है।

Please follow and like us:

मुस्लिम बहुल गाँव जहाँ हर घर में महकती है शहादत

यहाँ से २५० फ़ौज में हैं और ३०० रिटायर्ड हो चुके हैं

 

एसटी न्यूज़ डिजिटल टीम

राजस्थान के झुंझनू का मुस्लिम बहुल गांव धनूरी राजस्थान में सबसे ज्यादा सैनिक कुर्बानिया देने वाला गांव है। गांव के हर घर से कोई ना कोई सेना में है।1000 घरों से 250 युवा फौज में कार्यरत हैं और करीब 300 सेवानिवृत हो चुके हैं। यानी लगभग हर घर ने अपना एक बेटा देश को सौंपा है। बिल्कुल साधारण सा गांव है जहां सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है. सालों से कोशिश कर रहे हैं स्कूल 12वीं तक करवाने की लेकिन वह तक नहीं हुआ।
कैप्टन अली हसन खान ने ही दो साल पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को खत लिखकर यह जानकारी दी थी कि झुंझनू का मुस्लिम बहुल गांव ‘धनूरी’ राजस्थान में सर्वाधिक सैनिक कुर्बानियां देने वाला गांव है। इस खत में प्रथम विश्वयुद्ध से लेकर कारगिल तक के उन सभी शहीदों की जानकारी शामिल थी जो धनूरी से ताल्लुक रखते थे।आंकड़ों की तरफ देखें तो राजस्थान से फौज में भर्ती होने वाले सर्वाधिक युवा शेखावाटी (सीकर-झुंझनू जिले) से ही आते हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के सुकमा नक्सली हमले के शहीदों में से एक, बन्नाराम भी सीकर से ही थे।
कप्तान अली हसन सन 96 में रिटायर्ड हो गए। अब वो सरहद की बजाय गांव वालों के हक के लिए अलग-अलग महकमों से लड़ते हैं। वे अंदर से फाइलों का एक गठ्ठर लाकर दिखाते हैं और बताते हैं, ‘बेटा सीमा से बड़ी जंग हमें देश में लड़नी पड़ती है। वहां हमें पता होता है कि दुश्मन कौन है लेकिन यहां तो अपने ही…’


‘धनूरी से सत्रह शहीद होने के बावजूद हमारे गांव में एक शहीद स्मारक तक नहीं है’ कप्तान साहब बताते हैं, ‘हमारे मजहब में बुत नहीं बनवाए जाते, तो हम चाहते हैं कि शहीदों की याद में एक स्मारक बन जाए जिस पर पहले विश्वयुद्ध में शहीद हुए हमारे बुजुर्गों से लेकर रमजान खान तक सभी शहीदों के नाम लिखे हों। विधायकों और कलेक्टरों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक न जाने कितनी अर्जियां पहुंचा दी लेकिन सालों से सिर्फ आश्वासन मिलते आ रहे हैं।’
प्रशासन से ख़फा हसन कहते हैं, ‘हमारे 1000 घरों से 250 युवा फौज में कार्यरत हैं और करीब 300 सेवानिवृत हो चुके हैं। यानी लगभग हर घर ने अपना एक बेटा देश को सौंपा है। इसके बावजूद हमारे बच्चों के लिए गांव में हायर सैकंडरी स्कूल तक नहीं है।
सरकार से कितनी ही बार दर्ख्वास्त कर ली लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। प्रधानमंत्री कार्यालय में दरख्वास्त लगाई तो अफसरों ने उसे गलत जानकारी दे दी कि यहां पहले से ही स्कूल है। गांव के छोटे स्कूल की सालों से कोई मरम्मत नहीं हुई है। उसकी खराब हालत देखकर फौज से ही रिटायर्ड हुए परवेज खान ने अपनी जेब से पैसे लगाकर स्कूल का गेट बनवाया है।’
कप्तान अली हसन आगे कहते हैं, ‘अंधेरगर्दी देखिए, गांव के स्कूल में एनसीसी थी, जिससे गांव के बच्चों को कम उम्र से ही ट्रेनिंग मिलना शुरू हो जाती थी और आगे नौकरी मिलने में भी मदद रहती थी। लेकिन उसे यहां से हटाकर दूर के निजी स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है।शिकायत करने पर शिक्षा विभाग बहाना बनाता है कि विद्यालय में एनसीसी के लिए 40 वर्ष की आयु से कम के अध्यापक नहीं है। ये तो सरकार का काम है, लेकिन उन्होंने अपना पल्ला झाड़ लिया।’
अली हसन बताते हैं कि अमूमन सभी विभागों का एक सा हाल है। वे कहते हैं, ‘जंग में घायल हुए सैनिकों को अनुकंपा जमीन से लेकर अन्य रियायतें प्राप्त करने के लिए दफ्तरों के चक्कर पर चक्कर लगाने पड़ते हैं। जिन्होंने पैसा दे दिया उनका काम हो गया बाकियों की सुनने वाला कोई नहीं है।
इस्माइल के के पिता भी फ़ौज में थे और भाई भी फ़ौज में है , वे कहते हैं कि हमें इस बात का फख़्र है भाई जी कि हमारे यहां से लोग पांच-पांच पीढ़ियों से फौज में भर्ती हो रहे हैं। इस्माइल कहते हैं कि ‘पता है भाई जी उस समय उतना दुख नहीं होता जब कोई सैनिक शहीद होता है, अफसोस तो तब होता है जब शहीदों के परिवार वालों, जंग के अपाहिजों और रिटायर्ड फौजियों को अपने हक के लिए दफ्तरों की ख़ाक छाननी पड़ती है।’ हमारे यहां पर भी सक्रिय हैं ऐसे गोरक्षक। आप गायों को ले जाने की सूचना पुलिस को दो, पता नहीं कैसे, गोरक्षक पहुंच जाते हैं! पिछले दिनों गाएं ले जा रहे एक आदमी ने उनको पैसे देने से मना कर दिया तो उसके साथ मारपीट कर उसकी गायें और बछड़े छुड़वा दिए। अली हसन के एक रिश्तेदार सद्दीक खान जो राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हुए हैं, कहते हैं, ‘जब पूरे देश में हिंदू-मुसलमान एक साथ रहते हैं। तहजीबें एक दूसरे में गहराई तक समाई हुई हैं तो मंदिर और मस्जिद भी तो आस-पास ही होंगी, इसमें दिक्कत क्या है? हिंदू भाइयों की श्रद्धा का ख्याल हमें रखना होगा और हमारी का उन्हें।’
गांव में किसी शहीद सैनिक की विधवा को अल हम्दो के खिताब से नवाज़ा जाता है.अलहमदो बानों कहती हैं कि ‘रमजान 14 ग्रेनेडियर्स में जीडीआर पोस्ट पर काम करतां. कुपावाड़ा में 1997 में शहादत हुई।’ वे कहती हैं, ‘छोटां-छोटां कामां खातर दफ्तरों का कत्ता ई (काफी) चक्कर काटना पड़सी। बठै कोई ने चिंता ई कोनी कै म्हे शहीदां रे परिवार वाला हां।’ बानो की ही हिम्मत है जो तमाम विपरीत हालात में भी बच्चों की परवरिश से कभी समझौता नहीं किया। उनकी बेटी एमबीबीएस कर दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में डॉक्टर है। बेटा जयपुर से इंजीनियरिंग कर रहा है और दूसरा रूस से डॉक्टरी. बानो बताती हैं कि तौफीक (रूस) री स्कॉलरशिप जारी कोनी हुई। बठै रहबा खात्तर पीशा (पैसों) की जरूरत है। दफ्तरां मां कोई सुनवा ने ही तैयार कोनी. बीमारी के हालातां में भी ऑफिसों के चक्कर काटना पड़सी।
गांव में अगला घर सायरा बानो का है। गांव का एक और साधारण सा घर। उन्हें कम सुनाई देता है, सो घर की दूसरी औरतों से बातें हुईं। 90 साल की सायरा बानो के पति दूसरे विश्वयुद्ध में शहीद हो गए थे। जब सायरा के पति ताज मोहम्मद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान शहीद हुए थे तब वे महज 15 साल की थीं। इसके बाद भी वे हमेशा गांव के बच्चों को फौज में जाने के लिए प्रेरित करती रही हैं।

Please follow and like us:

प्रणय रॉय/ एनडीटीवी को राष्ट्रीय मीडिया का सपोर्ट

प्रेस की आजादी पर हमले के खिलाफ एकजुट हुए पत्रकार

परवीन अर्शी

नई दिल्ली:पत्रकार और एनडीटीवी के प्रमोटर प्रणय रॉय पर सीबीआई के छापे के खिलाफ दिल्ली के प्रेस क्लब में जाने-माने संपादक और पत्रकार एक बिसात पर आए. बैठक में सभी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की एक सुर में मुखालिफत की. प्रणय रॉय ने कहा कि एनडीटीवी के ऊपर लगाये गये सारे आरोप पूरी तरह से झूठे और मनगढ़ंत हैं.प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरूण शौरी ने मोदी सरकार पर तीखे प्रहार किये। अरूण शौरी के बयान को कोट करते हुए एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान ने लिखा, जिस किसी ने भी मीडिया के खिलाफ हाथ उठाने की कोशिश की, उसका हाथ जल गया।उल्लेखनीय हैकि 6 जून को सीबीआई ने प्रणय रॉय के दिल्ली और देहरादून स्थित ठिकानों पर छापा मारा था. प्रणय रॉय पर आरोप है कि उन्होंने एक निजी बैंक को 48 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है. इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने भी प्रेस की आज़ादी के समर्थन में अपना संदेश भेजा जो कि बैठक में पढ़ा गया. मुंबई में होने के चलते वो खुद उपस्थित नहीं रह सके. बैठक में कुलदीप नैयर, अरुण शौरी, एचके दुआ, ओम थानवी, शेखर गुप्ता और डॉ. प्रणय रॉय समेत कई बड़े पत्रकारों ने हिस्सा लिय

 

एनडीटीवी आरोप पर झूठे हैं :डॉ. प्रणय रॉय
एनडीटीवी के सह संस्‍थापक डॉ. प्रणय रॉय ने कहा, मुझे ये करना बिल्‍कुल भी अच्‍छा नहीं लग रहा. हम आज इन महानुभावों की मेहबानी से हैं. हम इनकी छाया में बढ़ते हैं. एक बार मैं चीन गया, वहां मुझसे पूछा गया क्‍या आपको हमारी गगनचुंबी इमारतें (स्‍काइस्‍क्रैपर्स) देखकर थोड़ी जलन नहीं होती? मैंने कहा, हमारे पास सर्वश्रेष्‍ठ स्‍काइस्‍क्रैपर्स हैं- आजाद माहौल. यह खोखला मामला केवल एनडीटीवी के खिलाफ नहीं है. बल्कि यह हम सब के लिए एक संकेत है. ‘हम आपको दबा सकते हैं, भले ही आपने कुछ न किया हो.’ प्रेस की आजादी भारत के लिए सर्वश्रेष्‍ठ बात है. उनका संदेश है, ‘घुटनों के बल चलो या फिर हम तुम्‍हें झुका देंगे. मैं कहता हूं – उनके सामने खड़े हो जाओ, और वो कभी ऐसा नहीं कर पाएंगे.’ हम किसी एजेंसी के खिलाफ नहीं लड़ रहे. वो भारत की संस्‍थाएं हैं, लेकिन हम उन नेताओं के खिलाफ हैं जो इनका गलत इस्‍तेमाल कर रहे हैं. अधिकारियों ने हमें बताया कि उन्‍हें क्‍यों ऐसा करना पड़ा. हमारी लड़ाई संजय दत्त के खिलाफ भी नहीं है. वह भी एक ऐसा शख्‍स है, जिसे मोहरा बनाया गया है और जिसका इस्‍तेमाल किया गया. उन्‍होंने कहा, ‘संजय दत्त की मां बेहतरीन इंसान हैं. उन्‍होंने संजय दत्त समेत हम पांच लोगों को बुलाया. उन्‍होंने कहा, ‘बेटा, ये अच्‍छे लोग हैं. तुमने गलती की है, उसे सुधारो. जब मैं प्रार्थना करती हूं, तो तुम्‍हारे नहीं, बल्कि इनके लिए ज्‍यादा करती हूं.’ नेता बिना आग के भी धुआं पैदा कर सकते हैं. जीई मनी लाउंड्रिंग मामले पर बोलते हुए उन्‍होंने कहा, ‘मैं शर्मिंदा हूं कि हमारे नेता ऐसा आरोप लगा सकते हैं.’ हम सभी आरोपों का जवाब देंगे. हम बस इतना चाहते हैं कि समयसीमा तय हो. तीन साल में सरकार ने 21 बार स्‍थगन की मांग की. उन्‍होंने कहा, ‘मैंने या राधिका ने एक रुपया भी काला पैसा नहीं रखा है. हमने कभी किसी को रिश्‍वत नहीं दी है.’

 

संविधान विशेषज्ञ फली एस. नरीमन ने क्या कहा
संविधान विशेषज्ञ फली एस. नरीमन ने कहा कि अपराध के लिए किसी पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन इस मामले में सीबीआई ने जो कारण बताया है, उससे उन्हें पूरा विश्वास हो गया है कि यह प्रेस और मीडिया की आजादी पर हमला है। सीबीआई ने दो जून को एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें 2008-09 के दौरान घटी किसी घटना को लेकर रॉय, उनकी पत्नी राधिका, एनडीटीवी, आईसीआईसीआई के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इसे पहले प्रकाश में क्यों नहीं लाया गया, इसका कहीं कोई जिक्र नहीं है। सीबीआई ने प्राथमिकी मात्र एक शिकायत पर दर्ज की, न कि किसी छानबीन या खुलासे के आधार पर।
एफआईआर एक निजी व्यक्ति द्वारा दी गई सूचना पर ही सिर्फ दर्ज कर दी गई।
सीबीआई ने यह छापा तब मारा, जब चंद दिनों पूर्व भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को एनडीटीवी के एक शो से चले जाने को कहा गया था। पात्रा ने शो के दौरान चैनल पर एक एजेंडे के साथ काम करने का आरोप लगाया था। शिकायत मिलने के तुरंत बाद सीबीआई ने प्रणय रॉय के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू कर दी।शिकायतकर्ता को कहा जाना चाहिए था कि वह किसी फौजदारी अदालत में शिकायत दर्ज कराए, लेकिन इसके बजाय छापे मारे गए, जो व्यापक तौर पर प्रकाशित हुआ।हम नागरिकों को आजादी मिली हुई है, जो दुनिया के बहुत से जगहों पर नहीं है। संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है।

 

चुप रहना कोई विकल्‍प नहीं:राजदीप सरदेसाई
वरिष्‍ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने कहा, ‘मुझे लगता है कि वर्तमान माहौल में चुप रहना कोई विकल्‍प नहीं है. यह वो क्षण है जब हमें इतिहास में सही किनारे पर खड़ा होना होगा.

 

 

Please follow and like us: