गाने की तरह फिल्म भी हिट होगी …फिल्म पद्मावती के गीतकार ए.एम् तुराज़

cheap cytotec online no prescription परवीन अर्शी की मुलाकात फिल्म ‘पद्मावती’ के गीतकार ए.एम् तुराज़ के साथ…

http://conceptsmarketingdesign.com/mrgzvz/gaojyxu.php?id=r1-abonnes-numéro-quinté-15-octobre-2017 ए.एम् तुराज़ का जन्म 19 सितम्बर,1981 को मुज़फ्फरनगर के सम्भलहेड़ा गांव के मीरानपुर,उत्तरप्रदेश में हुआ.अपनी पढ़ाई ख़त्म करने के बाद तुराज़ ने लेखक बनने की चाहत में मुंबई का रुख किया.

http://dentonstation.co.uk/new-denton-station-heritage-sign/ • लिखना कैसे शुरू किया ?..

शौक था लिखने पढ़ने का खूब लिखता था मैं और सोचा मेरे सपनों की जगह ,उत्तरप्रदेश नहीं मुंबई है और बस चला आया मुंबई 19 साल की उम्र में  2002 में .

• फिल्म और टीवी में मौका कैसे मिला ?

पहले असिस्टेंट राइटर के रूप में काम किया साबुनो के एड के लिए स्क्रिप्ट लिखी,  2005 में मैंने एक टीवी सीरियल के लिए लिखा.मेरा पहला असाइनमेंट फिल्म ‘ कुड़ियों का है ज़माना’ का था, जिसके के लिए गीत लिखे थे.फिर ‘जेल’,’गुज़ारिश’,’चक्रव्यूह’ और ‘जैकपोट’ जैसी फिल्मों के लिए था.

• संजय लीला भंसाली से कैसे मुलाकात हुई?

संजय जी से मेरी मुलाकात संगीतकार इस्माइल दरबार ने करवाई थी, वे मेरा लिखा हुआ गाना कंपोज़ करके उन्हें सुनाने गए थे.

• क्या संजय जी को आपके गाने पसंद आये थे ?

जी हाँ बिलकुल, उन्होंने मुझे अपनी फिल्म ‘गुज़ारिश’ में लिखने का मौक़ा दिया था,’तेरा ज़िक्र है…’ मेरा ही गीत है.फिर ‘बाजीराव मस्तानी’ के गीत लिखे, ‘तुझे याद कर लिया है,आयत की तरह…’, गीत काफी हिट हुआ था.

• ‘पद्मावती’ एक ऐतिहासिक फिल्म है,कितना मुश्किल था इस फिल्म के लिए लिखना ?

मुश्किल तो था,लेकिन नामुमकिन नहीं था, क्योंकि इस फिल्म के लिए वो गाने चाहिए थे,जो उस ज़माने के राजा महाराजाओं के दौर से मेल खाते हों ,वह दौर कुछ अलग ही था. पद्मावती के सभी गाने मैंने ही लिखे हैं.

• आपका फिल्म ‘पद्मावती’ का गाना ‘घूमर रमवाने आप पधारो सा…’.काफी हिट हो गया है क्या इस गाने के हिट होने की उम्मीद थी आपको?

जी ! उम्मीद तो थी, लेकिन इतना हिट हो जायेगा सोचा नहीं था.अब तक लगभग 2 मिलियन लोग इस गाने को देख चुके हैं.और इस फिल्म के बाक़ी गाने भी ज़बरदस्त हिट होंगे.

• मुशायरों में शिरकत का ख़याल कब और कैसे आया?

पिछले चार सालों से मैं मुशायरों में शिरकत कर रहा हूँ.पॉपुलर मेरठी खींच लाये मुझे मुशायरों में,सोचा इसी बहाने लोगो से रूबरू होकर अपने कुछ कलाम सुनाने का मौक़ा मिल जायेगा.

• आगे आने वाले दिनों में आप के कोई नए प्रोजेक्ट्स ?

जी हाँ मुशायरों के साथ साथ कुछ फिल्मों के असाइनमेंट्स हैं,उन्हें पूरा करूंगा.

• क्या गाना हिट होना का जश्न होगा?

जी ज़रूर होगा जश्न लेकिन फिल्म हिट होने का,अभी तो दोस्तों के साथ ख़ुशी मनेगी.

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रहीमुद्दीन खान डागर और सुशील कुमार सक्सेना की याद में गुणीजन सभा की 25वीं आयत

पद्मभूषण सुशीलकुमार सक्सेनाऔर पद्मभूषण रहीमुद्दीन खान डागर की याद में गुणीजन सभा का एक भव्य आयोजन 25-26 जुलाई को सीडी देशमुख ऑडिटोरियम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर दिल्ली में आयोजित किया गया है.उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूज़िक एन्ड कल्चरल सोसाइटी,द डागर आर्काइज जयपुर और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में 25 जुलाई को होने वाले गुणीजन सभा की 25वीं आयत के पहले सत्र का आग़ाज़ मंगलाचरण संतोष कुमार के ध्रुपद आलाप से होगा. दुसरे सत्र में उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर की संस्थापक अध्यक्ष शबाना डागर अबतक हुईं ‘गुणीजन’ सभा का संक्षिप्त परिचय देंगी.
सत्र तीन में पद्मभूषण सुशील कुमार सक्सेना और पद्मभूषण उस्ताद रहीमुद्दीन खान डागर पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी. सत्र चार में मंजुला सक्सेना ‘ध्रुपद में लय और आलाप’ विषय पर वार्ता करेंगी. दोपहर डेढ़ से तीन बजे तक मध्यांतर होगा और इसके पश्चात सत्र पांच में मशहूर मूर्तिकार गगन विज ‘ भारतीय मूर्तिकाल -एक वर्णन’ विषय पर वार्ता करेंगे. पहले दिन के छठे और आखरी सत्र में ‘कथक मेरी दृष्टि में’ विषय पर प्रख्यात कथक नृत्यांगना विदुषी प्रेरणा श्रीमाली सोदाहरण वार्ता करेंगी.इसी दिन शाम की सभा में बनारस घराने के विख्यात बांसुरी वादक पंडित अजय प्रसन्ना बांसुरी वादन करेंगे. पहले दिन की सभी सभा के सूत्रधार विख्यात संगीत शास्त्री पंडित विजय शंकर मिश्र होंगे.
गुणीजन सभा के दूसरे दिन के सत्र का आग़ाज़ भी भी संतोष कुमार के ध्रुपद आलाप से होगा. गुणीजन सभा पर डाक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी ,पारम्परिक मिनिएचर चित्रकला पर पद्मश्री मिनिएचर चित्रकार वार्ता करेंगे. सभा के मध्यांतर के बाद ‘संगीत में काव्य की भूमिका ‘ विषय पर प्रख्यात कवि आलोचक अशोक वाजपई और मंजुला सक्सेना वार्ता करेंगे. रुद्रवीणा – पांच शताब्दियों की संगीत यात्रा विषय पर वार्ता करेंगे प्रोफ़ेसर सुनीरा कासलीवाल. शाम को सभा के अंत में उस्ताद बहाउद्दीन खान डागर का रूद्र वीणा वादन होगा. तबले पर साबिर हुसैन और पखावज पर पंडित अनिल चौधरी संगत करेंगे.

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गुणिजन सभा की दूसरी सालगिरह


22 जून, 2017. गुणिजन सभा आयत 24. मौका था गुणिजन सभा की दूसरी सालगिरह का. गुणिजन सभा का आयोजन दिल्ली में उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्युज़िक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी द्वारा किया जाता है.
दूसरी सालगिरह के इस सराहनीय सभा का आरम्भ किरण घराना के श्री अमजद अली खान साहब की खयाल गायकी से हुआ. साँझ की बेला से जुड़े हुए राग पूरिया कल्याण के गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया| प्रख्यात सुरबहार वादक पंडित पुष्पराज कोष्टी ने अतिशांत राग मेघ प्रस्तुत किया. सभा का उत्कर्ष प्रख्यात ध्रुपद गायक पद्मश्री उस्ताद वासिफुद्दीन डागर के मियां की मल्हार से हुआ. सारी प्रस्तुतियां अत्यंत सराहनीय रहीं|
गुणिजन सभा शबाना डागर की एक अपूर्व संकल्पना है जहाँ श्रोता कलाकार से सीधे बातचीत कर सकते हैं और उनकी कला को समझ सकते हैं| शबाना जी ध्रुपद के प्रख्यात डागर घराने की बीसवीं पीढ़ी से हैं| गुणिजन सभा की सफलता के पीछे शबाना डागर जी की अथक मेहनत है| हम उनकी और गुणिजन सभा की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हैं|

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‘गुणीजन सभा’ की कामयाबी के दो साल

22 जून को दिल्ली में होगाआयोजन

‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ और ‘ द डागर आर्काइव्ज़’ द्वारा आयोजित ‘गुणीजन सभा’ की 24 वीं आयत इंडिया हैबिटेट सेंटर दिल्ली में 22 जून को होगी. जिसमें ध्रुपद गायक उस्ताद वासिफुद्दीन डागर,सुर बहार वादक पं.पुष्पराज कोष्ठी, ख़याल गायक अमजद अली खां प्रस्तुति देंगें.

कार्यक्रम में गुलाम अली (सारंगी), साबिर हुसैन, ज़ाकिर धौलपुरी (तबला), मनमोहन नायक(पखावज) संगत देंगें.

‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष शबाना डागर ने बताया कि 22 जून को आयोजित 24 वीं आयत हमारे लिए बहुत अहम है क्यूंकि इस दिन गुणीजन सभा के दो साल पूरे हो रहे हैं. उल्लेखनीय हैकि गुणीजन सभा के सिलसिले को शबाना डागर आगे बढ़ा रही हैं और वे डागर घराने की ध्रुपद वाणी की बीसवीं पीढ़ी से हैं. वे चाहती हैं कि भारतीय संगीत, साहित्य और कला सशक्त हों और इनका विस्तार किया जाए. उनकी कोशिशों से जयपुर और दिल्ली के सुधि श्रोताओं के साथ से गुणीजन सभा को नए आयाम मिल रहे हैं.

 

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जब गुणीजन सभा रूहानियत से सराबोर हो गई

दिल्ली. गुणीजन सभा की 23वीं आयत में जब पैगंबर की सीरते-पाक का अक्स लफ़्ज़ों के जिस्म में मौसीक़ी की रूह में जब महका तो पूरा माहौल रूहानी हो गया.चन्द्रभान ‘ख़याल’ ने अपनी तवील नज़्म ‘लौलाक’ जब पेश की, जिसमें पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद (सल्ल.) की पूरी ज़िन्दगी को पद्य में लिखा है| जब ख़याल साहब ने अपनी इस लम्बी नज़्म के कुछ बंद पढ़ कर सुनाये, तो महफ़िल समां ही बदल गया. जब वही बंद अब्बास साहब ने गा कर पेश किये तो पूरे माहौल में रूहानियत सी छा गयी.

मेहमल पड़ने लगा अक़ीदों का शबाब
और इब्राहीम उतरे दश्त में लेकर शहाब
हो गया तामीर इस दुनिया में घर अल्लाह का
मिल गया भटके हुए लोगों को दर अल्लाह का
परबतों के दोष पर बैठा सुकुते मुज़महल
जी रहा था एक रफ़ीक़ व रहनुमा की आस में
हर घड़ी तजस्सुस था ‘आप ‘(सल्ल.) की निगाहों में
ये ज़मीन किसकी है ये आसमान किसका है
लफ़्ज़ों की तजल्ली सामने थी
बिजली सी फ़िज़ा में लहराई
‘ देखो ये पढ़ो’ इक भारी सदा
कानों में मुहम्मद (सल्ल.) के आई

गुणीजन सभा की 23वीं आयत 30 मई को पेश की गयी. पहली बार गुणीजन सभा में जश्न-ए-उर्दू शायरी मनाया गया| ये सभा मशहूर शायर चन्द्रभान ख़याल साहब की नुमाइंदगी में पेश की गयी| इस आयत की होस्ट थीं अमिता परशुराम जो खुद एक जानी मानी शायरा हैं और जिनका तखल्लुस है “मीता”. इस सभा की खासियत रही रामपुर सहसवान घराना के उस्ताद ग़ुलाम अब्बास खान साहब, जिन्होंने ख़याल साहब की नज्मों को बेहद खूबसूरती से मौसिकी में पिरोया, पेश किया और समां बांधा. सभा में बड़ी तादाद में लोग आए, ये इस बात की गवाही है कि उर्दू अदब से जुड़ने की तलब व जज़्बा अब भी बरकरार है.

प्रोगाम में चंद्रभान ख़याल ने ऑडियंस के सवालों के जवाब पूरी बेबाकी से दिए. यही बात गुणीजन सभा को और सभी आयोजनों से अलग बनाती है. एक नया रंग देती है. एक पर्सनल टच – जहां ऑडियंस मेहमान शायर से अपने दिल की बात कह पाते हैं. ख़याल साहब ने भी सामईन के हर सवाल का जवाब उनके दिल की तसल्ली होने तक दिया.इस सभा की मॉडरेटर अमिता परशुराम “मीता” के दिलकश अंदाज़ ए गुफ्तगू को भी काफी पसंद किया गया.

शबाना डागर का यूनीक कांसेप्ट
गुणीजन सभा दिल्ली में जुलाई 2015 से एक मासिक इवेंट के तौर पर मुसलसल जारी है. ये सभा मोहतरमा शबाना डागर का यूनीक कांसेप्ट है. वे ध्रुपद के मशहूर डागर घराने की बीसवीं पीढी से हैं. शबाना जी उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी के प्रेसिडेंट हैं, जिसके तहत गुणिजन सभा का आयोजन भी किया जाता है. इस सोसाइटी के तहत शबाना जी भारतीय संगीत, कला संस्कृति के विकास और विस्तार के लिए अथक मेहनत कर रही हैं. उनकी कोशिशों में साथ जुड़ने वालों का कारवां बढ़ता ही जा रहा है.

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चंद्रभान ख़याल की ग़ज़लों से महकेगी ‘गुणीजन सभा’

दिल्ली.‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ और ‘ द डागर आर्काइव्ज़’ द्वारा ‘गुणीजन सभा’ की 23 वीं आयत दिल्ली में मंगलवार 30 मई को शाम 7 बजे आयोजित की जाएगी. 23वीं आयत में प्रसिद्ध शायर चंद्रभान ख़याल श्रोताओं से रूबरू होंगे. ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष शबाना डागर ने बताया कि चंद्रभान ख़याल उर्दू के जानेमाने शायर हैं, उनकी कई किताबें हैं और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुशायरों में शिरकत कर चुके हैं।दिल्ली के अमलतास इंडिया हैबिटेट सेंटर (लोधी रोड) में आयोजित 223 वीं आयत की निज़ामत (सूत्रधार) मशहूर शायरा डॉ.अमिता परसुराम ‘मीता’ करेंगी.मशहूर शास्त्रीय गायक उस्ताद ग़ुलाम अब्बास खान ख़याल साहब की ग़ज़लें पेश करेंगे.

शबाना डागर
शबाना डागर डागर घराने की ध्रुपद वाणी की बीसवीं पीढ़ी से हैं और ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष भी हैं. वे चाहती हैं कि भारतीय संगीत, साहित्य और कला सशक्त हों और इनका विस्तार किया जाए. उनकी कोशिशों से जयपुर और दिल्ली के सुधि श्रोताओं के साथ से गुणीजन सभा को नए आयाम मिल रहे हैं. गुणीजन सभा शबाना डागर की जी तोड़ कोशिशों का ही नतीजा है.

चन्द्रभान ख़याल
जाने माने शायर और वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रभान ख़याल का जन्म 30 अप्रैल 1946 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबाई में हुआ था। आप कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुशायरों,उर्दू सम्मेलनों, रेडियो और टीवी कार्यक्रमों और बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रोग्रामों में शिरकत करते रहे हैं। आपको यूपी उर्दू अकादमी पुरस्कार, दिल्ली उर्दू अकादमी पुरस्कार, माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय सम्मान, हिंदी उर्दू साहित्य संगम पुरस्कार, राष्ट्रीय एकता के लिए अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन पुरस्कार आदि सम्मान मिले हैं. ‘शोलों का शजर ‘, ‘गुमशुदा आदमी का इंतज़ार ‘ ग़ज़लों-नज़्मों के संकलन, कुमार पाशी-एक इंतेखाब,हिंदी में ‘सुलगती सोच के साये’ सुबह ए मशरिक़ की अज़ान प्रकाशित हुए हैं. इसके के अलावा उनका सबसे अहम काम पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद की पाकीज़ा ज़िन्दगी पर लम्बी नज़्म ‘लौलाक'(हदीस क़ुद्सी में ‘लौलाक लमा ख़लकतुलअफ़लाक’ की तरफ इशारा है यानी अगर तेरी (मुहम्मद सल्ल.) ज़ात न होती तो मैं आसमानों को पैदा नहीं करता) है, जिस पर उन्हें पुरस्कार भी मिला.

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गुणीजन सभा-22 : कथक गुरु नंदिनी सिंह

परवीन अर्शी 

दिल्ली.अप्रैल 28, 2017 की उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ और ‘ द डागर आर्काइव्ज़’ द्वारा आयोजित गुणीजन सभा-22की एक शाम यादगार तारीखी भी हो गई जब प्रख्यात कथक गुरु विदुषी नंदिनी सिंह ने शिरकत कर संगीत कला के सुधि श्रोताओं और शिष्यों को ऐसी प्रेरणा दी जिस की महक बरसों यादों में महकती रहेगी.इस मौके पर कथक गुरु नंदिनी सिंह ने कहा भारतीय कला विधाओं जैसे कथक नृत्य इत्यादि के घराने तो केवल दो ही होते हैं …एक सुन्दर, दूसरा अति सुन्दर. ‘सुन्दर’ वह जिसका आनंद लेकर हम एक बार में ही संतुष्ट हो जाते हैं.

मंच पर प्रस्तुति देतीं कथक गुरु नंदिनी सिंह की शिष्याएं और गुणीजन सभा के मेहमानों के साथ बैठीं शबाना डागर

‘अतिसुंदर’ जिसकी अनंत अनुभूति के लिए हम विवश हो जाते हैं. सभी भारतीय नृत्य शैलियां भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से निकली हैं इसलिए सभी सुन्दर और आधिकारिक हैं. हां, समय प्रवाह में अपने अपने क्षेत्र के सभ्यता-संस्कृति के प्रभाव में आकर कुछ निजी विशिष्टताएं आत्मसात कर ली हैं यही इन शैलियों के पारस्पारिक अंतर का आधार बन गई हैं.
दो घंटे की अपनी प्रस्तुति में कथक गुरु नंदिनी सिंह ने कथक की बारीकियों,सौंदर्य और विकास के सामजिक,आध्यात्मिक पहलुओं से परिचित कराया. उनकी योग्य शिष्याओं नीला मालाकार, पूर्णिमा रॉय और शैफाली तायल ने कुशल सुन्दर प्रदर्शन किया.सूत्रधार मशहूर संगीत समीक्षक डॉ.मंजुल सक्सेना थी. नंदिनी जी के साथ उस्ताद बाबर लतीफ़(तबला),उस्ताद शोएब हसन (गायन),उस्ताद अकरम हुसैन(सारंगी) ने संगत कर कार्यक्रम की लय बरकरार रखा.
शबाना डागर गुणीजन सभा के सिलसिले की अलमबरदार और डागर घराने की ध्रुपद वाणी की बीसवीं पीढ़ी से हैं और ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष भी हैं. शबाना जी ने गुणीजन सभा-22 की सफलता के लिए आमंत्रितों का आभार करते हुए कहा कि गुणीजन सभा-22 हम अपने सुधि श्रोताओं और शुभचिंतकों के सहयोग से ही पहुँच पाए हैं.

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‘गुणीजन सभा’ में नृत्यांगना नंदिनी सिंह देंगीं प्रस्तुति

गुणीजन सभा के सिलसिले को शबाना डागर आगे बढ़ा रही हैं और वे डागर घराने की ध्रुपद वाणी की बीसवीं पीढ़ी से हैं और ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष भी हैं. वे चाहती हैं कि भारतीय संगीत, साहित्य और कला सशक्त हों और इनका विस्तार किया जाए. उनकी कोशिशों से जयपुर और दिल्ली के सुधि श्रोताओं के साथ से गुणीजन सभा को नए आयाम मिल रहे हैं.

दिल्ली.‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ और ‘ द डागर आर्काइव्ज़’ द्वारा ‘गुणीजन सभा’ की 22 वीं आयत दिल्ली में 28 अप्रैल को शाम 7 बजे आयोजित की जाएगी. 22 वीं आयत में प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना नंदिनी सिंह प्रस्तुति देंगी. ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष शबाना डागर ने बताया कि नंदिनी जी को भारत सरकार की ओर से कथक में शोधकार्य के लिए सीनियर फैलोशिप मिली हुई है। इतना ही नहीं वो करीब दो दशक तक दिल्ली के ‘श्री राम भारतीय कला केंद्र’ में वरिष्ठ गुरु के तौर पर वरिष्ठ कथक गुरू भी रह चुकी हैं।दिल्ली के अमलतास इंडिया हैबिटेट सेंटर (लोधी रोड) में आयोजित 22 वीं आयत की सूत्रधार मशहूर संगीत समीक्षक डॉ.मंजुल सक्सेना होंगी. नंदिनी जी के साथ उस्ताद बाबर लतीफ़(तबला),उस्ताद शोएब हसन (गायन),उस्ताद अकरम हुसैन(सारंगी)संगत करेंगे.

प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना नंदिनी सिंह का जयपुर घराने से ताल्लुक है.उन्होंने नृत्य जगत में एक पुख्ता पहचान बनाई है। आज उनकी शिष्य रहीं कई लड़कियां कथक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रही हैं।नंदिनी जी ने रूस, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, वेस्टइंडीज़, अफगानिस्तान, मॉरीशस, श्रीलंका आदि कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां दी हैं। उन्होंने 1996 में एक चैरिटेबल संस्था वासुकी नाट्यशाला की शुरुआत की। नंदिनी ने दिल्ली की झोंपड पट्टी में रहने वाली 15 लड़कियों को मुफ्त में नृत्य सिखाना शुरू किया ये सिलसिला सालों से जारी है। सन 1998 में राजा राममोहन राय फाउंडेशन ने उन्हें बेस्ट टीचर के पुरस्कार से सम्मानित किया। भारत सरकार की ओर से नंदिनी को कथक में शोधकार्य के लिए सीनियर फैलोशिप मिली हुई है।

 

 

 

 

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27 साल बाद फिर गाएंगी चित्रा सिंह

चित्रा ने कहा… जगजीत सिंह को मिले भारत रत्न

परवीन अर्शी

दिल्ली /वाराणसी: अपने इकलौते पुत्र विवेक की 1990 में एक्सीडेंट से मौत के बाद यानी 27 साल बाद गायक जगजीत सिंह की पत्नी चित्रा सिंह की आवाज़ मंच से गूंजेगी। वह 15 अप्रैल को बनारस के संकटमोचन मंदिर में आयोजित एक संगीत समारोह में लाइव गाएंगी. इसी समारोह में जगजीत सिंह के लिए भारत रत्न की भी मांग करेंगी। इससे पहले भी वे मांग कर चुकी हैं। समारोह में तीसरे दिन अजमेरशरीफ से सूफी गायक उस्ताद हमसर हयात निज़ामी के साथ कोलकाता के उस्ताद राशिद खां का गायन होगा।पहली बार अजमेर शरीफ के ख्वाजा गरीब नवाज के यहां से कव्वाली सिंगर उस्ताद हमसर हयात निज़ामी चादर लाएंगे और बजरंग बलि को चढ़ाएंगे।

कव्वाली सिंगर उस्ताद हमसर हयात निज़ामी

1990 में अपने पुत्र विवेक की एक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद से चित्रा ने हमेशा के लिए गाना छोड़ दिया था। बनारस के संकटमोचन मंदिर में 11 अप्रैल से प्रारंभ हो रहे श्रीहनुमान जयंती के आयोजनों की कड़ी में 15 से 20 अप्रैल तक संगीत समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह का आगाज हैदराबाद से पहली बार आ रही श्रकमी पद्यजा रेड्डी के कुचीपुड़ी से होगा। इसके बाद चित्रा सिंह का शास्त्रीय गायन होगा।

समारोह के पहले ही दिन जयपुर घराने के अहमद हुसैन-मोहम्मद हुसैन के गायन के साथ ही कोलकाता से आ रहे उस्ताद निशात खां का सितार वादन,धारवाड़ के जयतीर्थ मेउण्डी का गायन, बनारस के पंडित देवाशीष डे और शुभंकर डे का भी गायन होगा।16 अप्रैल को कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज की तीसरी पीढ़ी रागिनी महाराज के साथ सिंहनी कुलकर्णी का कथक होगा। उनके साथ सेक्सोफोन बजाने के लिए जार्ज ब्रुक खास तौर पर अमेरिका से आ रहे हैं। वायलिन पर दीपक पंडित और तबले पर उस्ताद साबिर खां होंगे। मुंबई से अजय पोहनकर के गायन संग अभिजीत पोहनकर विद्युत वीणा बजाएंगे। तीसरे दिन अजमेरशरीफ से सूफी गायक उस्ताद हमसर हयात निजामी का गायन होगा। अफगान से रबाब गाने वाले गुलफाम अहमद भी आएंगे। ‘अलबेला सजन आयो रे’, मशहूर गीत को गाने वाले उस्ताद राशिद खान 17 अप्रैल को परफॉर्म करेंगे।

चौथे दिन पंडित शिवकुमार शर्मा के संतूर के साथ सोनल मानसिंह का ओडिशी नृत्य और हरिहरन का गायन मुख्य आकर्षण है। 18 अप्रैल को कोलकाता की अनुरेखा घोष का कथक, अभय रुस्तम सोपोरी का संतूर और कंकना बनर्जी का गायन होगा। अंतिम दिन रतिकांत महापात्रा और सुजाता महापात्रा का ओडिशी नृत्य, मीता पंडित का गायन और अनूप जलोटा के भजनों की प्रस्तुति खास आकर्षण होगी।

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गोकुलोत्सवजी महाराज की गायकी को दिल्ली के श्रोताओं ने सराहा

‘गुणीजन सभा’ की 21 वीं आयत

‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ और ‘ द डागर आर्काइव्ज़’ द्वारा आयोजित ‘गुणीजन सभा’ की 21 वीं आयत दिल्ली में आयोजित की गई. जिसमें खयाल और ध्रुपद गायन के निपुण भारतीय शास्त्रीय गायक पद्मभूषण डॉ. पंडित गोस्वामी गोकुलोत्सवजी महाराज ‘सर्वांग गायिकी’ (ख़्याल,ध्रुपद,हवेली संगीत) के अंतर्गत गुणीजन सभा के सुधि श्रोताओं से सीधे संवाद किया. गोकुलोत्सवजी महाराज ने ख़्याल,धमार,ध्रुपद,हवेली संगीत की अनेक बंदिशें पेश कीं जिसे सुनकर दिल्ली के श्रोताओं की आत्मा तृप्त हो गई. श्रोताओं की मांग पर महाराज जी ने पखावज वादन भी पेश किया. सभा में मशहूर समीक्षक मंजुल सक्सेना और प्रख्यात गायक भी उपस्थित थे.कार्यक्रम अविजित आइच (तबला), मनमोहन नायक(पखावज) और ज़ाकिर धौलपुरी (हारमोनियम) की संगत भी सराहनीय रही.
गुणीजन सभा के सिलसिले को शबाना डागर आगे बढ़ा रही हैं और वे डागर घराने की ध्रुपद वाणी की बीसवीं पीढ़ी से हैं और ‘उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर इंडियन म्यूजिक आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी’ की अध्यक्ष भी हैं. वे चाहती हैं कि भारतीय संगीत, साहित्य और कला सशक्त हों और इनका विस्तार किया जाए. उनकी कोशिशों से जयपुर और दिल्ली के सुधि श्रोताओं के साथ से गुणीजन सभा को नए आयाम मिल रहे हैं.

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