भारत में जब सिर्फ इलेक्ट्रिक कारें ही होंगीं?

नई दिल्ली.अगले तीन सालों के भीतर सरकार बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लाने की तैयारी में है. सरकार इसके लिए चार्जिंग स्टेशन और बैटरी बदलने के लिए प्रोग्राम भी शुरू किए जाएंगे. हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी ने भी जानकारी दी थी कि 2030 के बाद पेट्रोल और डीजल मांग घट जाएगी, जिसकी वजह इलेक्ट्रिक कारें होंगी.रिपोर्ट्स बताते हैं कि दुनिया में अभी सिर्फ एक फीसद ही इलेक्ट्रिक कारें हैं लेकिन ये आंकड़ा 2025 तक 20 फीसद और साल 2030 तक 30 फीसद तक पहुंच सकता है.
इस तैयारी के पीछे मुख्य उद्देश्य है ईंधन आयात बिल में कमी लाना और रनिंग व्हीकल्स की लागत को कम करना. पॉवर मिनिस्टर पीयूष गोयल ने उद्योग मंडल सीआईआई के सालाना सत्र 2017 को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी.गोयल ने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज और नीति आयोग साथ मिलकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के प्रमोशन के लिए काम रहे हैं. उन्होंने कहा लोग तब इलेक्ट्रिक कार लेने का रुख करेंगे जब उन्हें ये कीफायती दाम पर मिलेगी.
सीआईआई वार्षिक सत्र 2017 को संबोधित करते हुए, गोयल ने कहा, ‘हम बहुत बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को पेश करने जा रहे हैं. हम इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को UJALA की तरह आत्मनिर्भर बनाने जा रहे हैं. विचार यह है कि 2030 तक, एक भी पेट्रोल या डीजल कार देश में नहीं बेची जानी चाहिए.’ गोयल ने बहुत उम्मीद के साथ कहा कि पेट्रोल और डीजल कारों की जगह इलेक्ट्रिक कारों को जगह देने के लिए सरकार मदद करेगी. अगर सरकार के लक्ष्य के मुताबिक इलेक्ट्रिक कार दौड़ाने का फॉर्मूला कामयाब हो गया तो देश में मौजूद 53 हजार पेट्रोल पंपों पर खासा असर देखने को मिलेगा.

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