मोदी की विदेश नीति की विजय जौली ने चीन में की तारीफ़

http://deirdreverne.com/wp-login.php?action=register दिल्ली.पेइचिंग विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों ने ‘भारत -चीन संबंधों में सुधार’ कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय नेताओं,सांसदों – विधायकों को चीन आमंत्रित किया गया.पूर्व विधायक और स्टडी ग्रुप के अध्यक्ष विजय जौली को भी विशेष आमंत्रण पर बुलाया गया था.

इस अवसर पर छात्रों को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता विजय जौली ने बताया कि भारत में जब से नरेंद्र मोदी जी पीएम हुए हैं भारत की विदेश नीति में आश्चर्जनक बदलाव आये हैं. ख़ासतौर पर पड़ोसी देशों से रिश्ते मज़बूत हुए हैं.भारत चीन विदेश नीति में मोदी जी के नेतृत्व में कई क्रांतिकारी बदलाव दिखाई देंगे.

श्री जौली ने बताया कि पीएम मोदी ने 36 महीनों में 49 देशों की यात्रा कर भारत की विदेश नीति को सुदृढ़ बनाया है. मोदी जी तीन बार चीन की यात्रा कर चुके हैं. एक बार चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग भी एक बार भारत आ चुके हैं.

वरिष्ठ भाजपा नेता विजय जौली ने बताया कि भविष्य में 600 चीनी कंपनियां 85 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने वाली है जिससे 7 लाख नौकरियों के अवसर मिलेंगे.24 से 28 अक्टूबर तक हुई इस यात्रा में वाईएसआर कांग्रेस की गीता कोठापल्ली, रायबरेली कांग्रेस विधायक अदिति सिंह,बसपा के जलालपुर विधायक रितेश पांडेय भी आमंत्रित थे.

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ऑस्ट्रेलिया में हिंदी को शौहरत दिला रहे हैं …पॉपुलर मेरठी

दिल्ली. हिंदुस्तान के चहेते शायर पॉपुलर मेरठी इन दिनों ऑस्ट्रेलिया में हिंदी-उर्दू का परचम लहरा रहे हैं.२५ अक्टूबर से ३ नवंबर तक ऑस्ट्रेलिया के सिडनी,केनबरा और मेलबोर्न के मुशायरों में शिरकत करेंगे.पॉपुलर मेरठी के साथ इस दौरे में सुप्रसिद्ध फ़िल्मी गीतकार-शायर एएम तुराज़ भी हैं.तुराज़ ने हाल ही में फिल्म ‘पद्मावती’ के सभी गीत लिखे हैं.

विदेशों में भारतीय साहित्य के उत्थान के लिए सक्रिय संस्था एमएसके इवेंट ने मुशायरों का आयोजन किया है. फोन पर शगुफ्ता टाइम्स को पॉपुलर मेरठी ने बताया कि कवि दरबार के नाम से मशहूर मुशायरों को यहाँ काफी शौहरत मिली हुई है.तुराज़ और मैंने अभी तक जो मुशायरे पढ़े हैं उनमें भारत की ही तरह हमें खूब दाद मिल रही है.इससे हमारे मुल्क हिंदुस्तान का नाम रौशन हो रहा है.

पॉपुलर मेरठी मुख़्तसर परिचय

वैसे तो मेरठ की सरजमीं कई बड़े शायरों और कवियों से सरसब्ज रही है। लेकिन पॉपुलर मेरठी ने शहर मेरठ को एक नई पहचान दी है. वे चालीस साल से मुशायरे और कवि सम्मेलन में कलाम पेश कर रहे हैं .उनका पूरा नाम सैय्यद एजाजउद्दीन शाह है. वे अमेरिका, पाकिस्तान, सऊदी अरब, दुबई, कतर, दोहा, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, कुवैत, यमन व रूस आदि देशों में कलाम पेश कर चुके हैं. विदेशों में 70 से अधिक संस्थाएं सम्मान कर चुकी हैं और उन्हें ‘मेरठ-रत्न’ भी मिला.

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रोहिंग्या मामले में ब्रिटिश मंत्री प्रीति पटेल ने की भारत की आलोचना

go दिल्ली.मोदी सरकार ने भारत में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों को देश के लिए खतरा बताते हुए उन्हें केंद्र सरकार वापस रोहिंग्या भेजना चाहती है. भारतीय मूल की प्रीति पटेल ब्रिटेन में अंतर्राष्ट्रीय विकास की सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट हैं.

प्रीति पटेल भारत के रुख की आलोचना के साथ भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और उन्हें एक प्रभावशाली नेता बताया है. बीबीसी के अनुसार प्रीति पटेल ने रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश से वापस भेजने के बारे में कहा कि मेरा ख्याल है कि यह अवास्तविक है. उन्होंने कहा कि वहां की जमीनी हालत देखें, म्यांमार में पांच लाख से अधिक लोगों को सताया जा रहा है. रखाइन राज्य में नरसंहार जारी है.

प्रीति पटेल ने कहा कि यह कहना अनुचित होगा कि पांच लाख लोग सुरक्षा के लिए खतरा हैं. वे अपने घरों को इस लिए छोड़ रहे हैं ताकि वह जिंदा रह सकें।ब्रिटिश प्रधान मंत्री थ्रेसामे की कैबिनेट में सीनियर मंत्री प्रीति पटेल ने रोहिंग्या के मुद्दे पर भारत के रुख की आलोचना की है.

उल्लेखनीय है कि केंद्र में सत्तासीन मोदी सरकार ने भारत में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है और सरकार उन्हें वापस म्यांमार भेजना चाहती है. वहां के लोग किसी वजह से निकल रहे हैं. वह इसलिए नहीं जा रहे हैं कि वह किसी दुसरे देश में पनाह लेना चाहते हैं. वे अपने घर बार को इस लिए छोड़ रहे हैं कि उन्हें सताया जा रहा है.

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मस्जिदे नबवी में 13 हजार 575 एतिकाफ में

2143 औरतें भी एतिकाफ में बैठी हैं

buy cytotec oral रियाद: सऊदी अरब के मदीना में स्थित मस्जिदे नबवी में इस बार रमज़ान महीने के आखिरी अशरे (दस दिन ) में 13 हजार 575 रोज़ादार एतिकाफ (एकांतवास) में बैठे हैं.मस्जिदे नबवी में सभी एतिकाफ करने वालों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान की गई हैं। रमज़ान में मस्जिदे नबवी में 11 हजार 432 मर्द और 2143 औरतें एतिकाफ को बैठती हैं जिनकी कुल संख्या 13 हजार 575 है.
मस्जिदे नबवी में एतिकाफ के लिए तीन स्थान तय किए गए हैं. पहला बाबुल अक़ीक़, दूसरा बाब उमर बिन खिताब और तीसरा बाब ए अबी ज़रकम है. औरतों के लिए पश्चिम दिशा में बाब 13 है. एतिकाफ रजिस्ट्रेशन के लिए हर साल ऑन लाइन व्यवस्था रहती है.

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पाक को झटका,भारत-रूस दोस्ती जारी रहेगी

रूस ने आतंकवाद को वाजिब नहीं ठहराया

पीटर्सबर्ग : भारत और रूस के बीच हुई शिखर वार्ता में कुडनकुलम के दो परमाणु रिएक्टरों के निर्माण के लिए दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है. इस सदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन ने एक साझा घोषणापत्र जारी किया.यानी भारत और रूस के बीच दोस्ती का बरसों पुराना रिश्ता क़ायम रहेगा, पकिस्तान जिस रूस की दोस्ती पर इतरा रहा था ये उसके लिए एक बड़ा झटका है.

भारत के लिए यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है। तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की यूनिट 5 और 6 का निर्माण करने में रूस मदद देगा। इनसे 1000 मेगावाट परमाणु बिजली पैदा होगी। समझौते पर खुशी जाहिर करते हुए मोदी ने कहा कि इससे भारत-रूस संबंध और मजबूत होंगे।मोदी ने द्वितीय विश्व युद्ध के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, परमाणु उर्जा समझौते पर टिकी निगाह राष्‍ट्रपति पुतिन ने कहा कि दुनिया में कोई अन्य देश ऐसा नहीं है, जिसके साथ रूस का मिसाइल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इतना गहरा सहयोग है। इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि जहां से भी आतंकवाद का खतरा आएगा, वह स्वीकार्य नहीं होगा। रूस आतंकवाद से लड़ाई में भारत को पूरा समर्थन करेगा। रूसी राष्‍ट्रपति ने आगे कहा कि रूस के पाकिस्तान के साथ किसी तरह के निकट सैन्य संबंध नहीं हैं। भारत के सभी हितों का रूस पूरा सम्मान करता है।
फिर ….. आतंकवाद के मसले में रूस और भारत के बयान में इशारों में पाकिस्तान की खिंचाई की गई है। किसी भी आधार पर आतंकवाद को वाजिब नहीं ठहराया जा सकता है। इसमें कोई दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। हम सभी देशों से अनुरोध करेंगे कि वे आतंकी नेटवर्कों, उनकी फाइनैंसिंग और आतंकवादियों के सीमा पर आने-जाने की पुरजोर कोशिश करें। आतंकवाद पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय संधि के लिए बातचीत जल्द खत्म करने की भी वकालत की गई है। संयुक्त बयान जारी किए जाने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ’70 सालों से दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा संबंध है। भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को अब नई दिशा दी जा रही है। आर्थिक संबंधों में तेजी लाना हमारा साझा उद्देश्य है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि आपसी संबंधों को लेकर उनकी राष्ट्रपति पुतिन से विस्तार से बातचीत हुई है। उन्होंने कहा, ‘संस्कृति से सुरक्षा तक हमारी भाषा समान है।

 

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डोनाल्ड ट्रंप मुस्लिमों से अब नज़दीकी चाहते हैं ?

एसटी न्यूज़ / डिजिटल टीम 

रियाद.दुनिया के मुसलमान इसलिए हैरान हैं कि मुसलमानों से नफरत करने वाले के दिल में मुस्लिम मुहब्बत का सैलाब कहाँ से आ गया. सिर्फ इस्लामी जगत ही नहीं, बल्कि अमेरिका के लोग भी हैरान हैं. किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ट्रंप इस कदर बदल जाएंगे. विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप के मुस्लिम प्रेम के पीछे स्वार्थ छिपा हुआ है. वो अपनी सत्ता बचाने और रूस विवाद से लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं.वह लगातार अमेरिका मीडिया के निशाने पर हैं. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति अगर सफल होते हैं, तो निश्चित रूप से अमेरिका पहुंचने पर उनको विवादों से थोड़ी राहत मिलेगी. वर्ना वापस लौटने पर उनको अपने पद को बचाए रखने की चुनौती से भी जूझना होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने न सिर्फ मुस्लिम देश सऊदी अरब से अपने पहले विदेशी दौरे की शुरुआत की, बल्कि वहां पहुंचकर मुस्लिम रीति-रिवाजों से घुलने-मिलने की भी पूरी कोशिश की. उनके साथ उनकी बेटी और पत्नी भी गई हुई हैं. रविवार को पहली ‘अरब इस्लामिक अमेरिकी समिट’ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ लड़ाई नहीं है, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच लड़ाई है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों को इस्लामिक कट्टरपंथ के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहिए. इस समिट में पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत 55 मुस्लिम देशों के नेताओं ने शिरकत की.
अमेरिकी मीडिया का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल की जांच कर रहे जेम्स कोमी को FBI डायरेक्टर पद से हटाकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरो को अहम खुफिया जानकारी देकर ट्रंप बुरी तरह फंस चुके हैं. वे सवालों से बचने के लिए ही विदेश दौरे पर निकले हैं. दुनिया के छह मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने वाले डोनाल्ड ट्रंप के पास मुस्लिम नेताओं को साधने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था.
ट्रंप की ओर से मुस्लिम देशों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने, सीरिया पर हमले करने और अफगानिस्तान में सबसे बड़ा गैर परमाणु बम गिराने से मुस्लिम राष्ट्रों में जबरदस्त आक्रोश था, जिसको खत्म करने लिए ट्रंप ने सऊदी में ‘अरब इस्लामिक अमेरिकी समिट’ मंच का इस्तेमाल किया. वे अपने भाषण में मुसलमानों के प्रति हमदर्दी दिखाते नजर आए. जानकारों का कहना है कि ट्रंप ने अपनी मुस्लिम विरोधी छवि को एक झटके में बदलने के लिए शानदार कोशिश की. वे इस मामले में अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों को भी पछाड़ते नजर आ रहे हैं. वैसे भी ट्रंप किसी भी काम को एक झटके में करने में विश्वास करते हैं. ट्रंप ने बिना अनुभव के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत हासिल की और फिर मुसलमानों के खिलाफ धड़ाधड़ फैसले लिए.

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नॉर्थ कोरिया की धमकी

कभी भी कर सकता है परमाणु परीक्षण

प्‍योंगयांग। नॉर्थ कोरिया ने अमेरिका और चीन को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह कभी भी परमाणु परीक्षण कर सकता है। इसके बाद ही स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।परमाणु परीक्षण कोरियाई प्रायद्वीप में पिछले कुछ समय से माहौल काफी तनावपूर्ण है। नॉर्थ कोरिया ने शनिवार को ही एक और मिसाइल लॉन्‍च की है और एक अब वह छठवें परमाणु परीक्षण की ओर बढ़ रहा है। वहीं अमेरिका ने भी इस बात की ओर इशारा कर दिया है कि वह प्रतिक्रिया स्‍वरूप मिलिट्री स्‍ट्राइक कर सकती है। नॉर्थ कोरिया के विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि नॉर्थ कोरिया अमेरिका के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। नॉर्थ कोरिया की न्‍यूज एजेंसी केसीएनए की ओर से कहा गया है कि नॉर्थ कोरिया अपनी परमाणु ताकत को हमेशा आगे बढ़ाता रहेगा। वह तब तक नहीं रुकेगा जब तक कि अमेरिका अपनी नीतियों को नहीं छोड़ देता। ट्रंप ने दिए हैं मिलिट्री एक्‍शन के संकेत इससे पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जो तीसरे विश्‍व युद्ध की संभावनाओं को और बल देता है।

 

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सीरिया: रूस ने बुलाई आपात बैठक,तीसरे विश्व युद्ध का शंखनाद बजा

रूस ने कहा अब वह सीरिया की वायुसेना को मज़बूत करेगा
अमेरिकी क्रूज हमले से भड़का रूस

एसटी न्यूज़ डिजिटल टीम  

वाशिंगटन. सीरिया के मुद्दे पर अमेरिका और रूस आमने-सामने आ गए हैं। पद संभालने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए सीरिया में सरकार के कब्जे वाले सैन्य हवाई अड्डे पर क्रूज मिसाइलों का हमला करवा दिया। हमले में छह सीरियाई सैनिक और नौ नागरिक मारे गए हैं जबकि नौ लड़ाकू विमान नष्ट हो गए हैं, एयरबेस को भी भारी नुकसान पहुंचा है।राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि असद को बदलने के प्रयास बेकार साबित हुए। इसी के बाद सीरिया पर हमले का निर्णय लेना पड़ा। ट्रंप ने हमले का आदेश फ्लोरिडा स्थित अपने रिजॉर्ट मार-आ-लागो से दिया, जहां पर वह चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बैठक कर रहे हैं। आदेश मिलते ही युद्धपोत यूएसएस पोर्टर और यूएसएस रॉस ने मिसाइलें दाग दीं। ट्रंप के इस कदम का ब्रिटेन, इजरायल, तुर्की, जापान, जर्मनी आदि ने समर्थन किया है। अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की भारतीय मूल की सांसद तुलसी गबार्ड और टिम केन ने ट्रंप के फैसले का विरोध किया है।भूमध्य सागर में तैनात दो अमेरिकी युद्धपोतों से कुल 59 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें छोड़ी गईं। हमले को इसी हफ्ते सीरिया में विद्रोहियों पर हुए रासायनिक हमले का जवाब माना जा रहा है जिसमें सौ लोग मारे गए थे। अमेरिकी हमले पर रूस और ईरान ने कड़ा विरोध जताया है। रूस ने इसे सीरिया पर अमेरिका का हमला बताया है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई है।
सीरिया में मार्च 2011 से चल रहे गृहयुद्ध में रूस राष्ट्रपति बशर अल असद के साथ है जबकि विद्रोहियों को अमेरिका का समर्थन मिल रहा है। दोनों ओर से चल रहे युद्ध में दसियों हजार लोग मारे जा चुके हैं जबकि लाखों बेघर हो चुके हैं। विद्रोहियों के ठिकाने पर अचानक रासायनिक हमला हुआ जिसमें करीब सौ लोग मारे गए और दर्जनों मरणासन्न स्थिति में आ गए। आरोप असद की फौजों पर लगा और दुनिया भर में उसकी निंदा हुई।असद सरकार ने इस हमले से इन्कार किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में सीरिया के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया जिसे रूस ने वीटो लगाकर निष्फल कर दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। कहा है, इससे रूस और अमेरिका के संबंधों को गंभीर आघात लगा है। प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के अनुसार यह एक राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि मिसाइल हमले से पहले उन्होंने उसकी सूचना रूसी अधिकारियों को दे दी थी और हमले में रूसी सैनिकों की हवाई ठिकाने में मौजूदगी का ध्यान रखा गया।

सारीन क्या है?
सारीन बेहद ख़तरनाक रासायन है और सायनाइड के मुक़ाबले 20 गुना ज़्यादा ख़तरनाक माना जाता है. यह दिल और सांस से जुड़े अंगों पर सीधा असर डालता है. यह रंगहीन और स्वादहीन द्रव होता है, जिसमें कोई गंध भी नहीं होती है. अमूमन खुली हवा में आने पर ये वाष्प बन जाता है.सीरियाई सरकार पर अगस्त, 2013 में सारीन भरे रॉकेट के जरिए दमिश्क में विद्रोहियों पर हमला करने का आरोप है. इस हमले में सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

रूस ने कहा अब वह सीरिया की वायुसेना को मज़बूत करेगा

सीरिया पर रासायनिक हमले के ख़िलाफ़ अमरीका के सीरियाई सैन्य अड्डों पर किए हमले से रूस नाराज़ हो गया. रूस ने अमरीका के साथ सीरिया में हवाई संघर्ष रोकने के एक समझौते को रद्द कर दिया है.रूस ने ये भी ऐलान किया कि सीरियाई वायुसेना की सुरक्षा को मज़बूत करेगा और सीरिया की वायु सेना को ज़्यादा असरदार और प्रभावी बनाएगा.इस लड़ाई में रूस सीरिया के साथ है. रूस ने एक बयान देकर बताया है कि सीरीयाई सेना ने हमला किया था जिसमें चरमपंथियों के हथियारों के डिपो को निशाना बनाया गया था और वहां केमिकल हथियार हो सकते हैं.सवाल ये भी है कि रूस का स्पष्टीकरण कितना विश्वसनीय है?ब्रिटिश सेना के केमिकल बायोलाजिकल रेडियोलॉजिकल न्यूक्लियर (सीबीआरएन) के पूर्व कमांडिंग ऑफ़िसर हामिश डे ब्रेटन गॉर्डन ने बताया, “ये स्पष्ट है कि सारीन अटैक हुआ है. विद्रोही लड़ाकों के पास सारीन का स्टॉक था, यह पूरी तरह से झूठ लगता है.”

सीरिया में मार्च 2011 से चल रहे गृहयुद्ध में रूस राष्ट्रपति बशर अल असद के साथ है जबकि विद्रोहियों को अमेरिका का समर्थन मिल रहा है।

 

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सऊदी अरब के नेतृत्व में बनी इस्लामी सेना

41 मुस्लिम देशों का नाटो

सऊदी अरब के नेतृत्व में बने 41 मुस्लिम देशों के सैन्य गठबन्धन को मुस्लिम नाटो बताया जा रहा है। इस पर सफाई देते हुए पाकिस्तान की विदेशी सचिव तहमीना जंजुआ ने कहा कि ये गठबंधन किसी देश के खिलाफ नहीं, आतंकवाद के ख़िलाफ़ है।इस सैन्य गठबन्धन का नेतृत्व पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष राहील शरीफ कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विदेश सचिव तहमीना जांजुआ ने बताया कि पाकिस्तान दो मुस्लिम देशों के बीच टकराव में दखल न देने की अपनी नीति पर कायम है।वहीं, सऊदी

पाकिस्तानी फ़ौज के जवान

अरब और ईरान को लेकर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इनके बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साथ एक जैसा रिश्ता कायम करना मुश्किल है, लेकिन पाकिस्तान कभी ईरान के हितों के खिलाफ नहीं जाएगा।उन्होंने समिति को यह भी भरोसा दिलाया कि इस सैन्य गठबंधन का नेतृत्व करते हुए राहील शरीफ ईरान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। हालांकि, पाकिस्तान ने ईरान के राजदूत मेंहदी होनारदोस्त की आपत्ति पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।बता दें कि ईरान के राजदूत ने राहील शरीफ को सऊदी अरब सैन्य गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए पाकिस्तान सरकार की ओर से मंजूरी दिए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है।

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ट्रम्प वीजा प्रतिबंध: ओआईसी की सख्त चेतावनी

 इस्लामी देशों की मुश्किलों और बढ़ेंगी
इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से अपने 7 सदस्य मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध के संबंध में जारी किए जाने वाले प्रशासनिक आदेश पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। ओआईसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से किया जाने वाला यह फैसला शरणार्थियों को पहले से उत्पन्न कठिनाइयों में वृद्धि कर देगा और संघर्ष क्षेत्र से पलायन करने वाले इससे बुरी तरह प्रभावित होंगे ।
कट्टरपंथ को मिलेगी मजबूत
ओआईसी से कहा गया कि ऐसे विशिष्ट और पक्षपातपूर्ण कदम से चरमपंथियों के मौलिक विचार को बल मिलेगा. ओआईसी के अनुसार इन उपायों से हिंसा और आतंकवाद के समर्थकों को भी बल मिलेगा और ऐसा इस महत्वपूर्ण अवसर पर जब ओआईसी सभी पक्षों सहित अमेरिका के साथ हर तरह के आतंकवाद को समाप्त करने के लिए प्रयास कर रही है।
ओआईसी की अमेरिकी सरकार से मांग
ओआईसी ने अमेरिकी सरकार से मांग की कि वह अपने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार करे. गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके अमेरिका में प्रवासियों के प्रवेश के कार्यक्रम को निलंबित करते हुए 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर भी रोक लगा दी थी।

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