मोदी की विदेश नीति की विजय जौली ने चीन में की तारीफ़

दिल्ली.पेइचिंग विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों ने ‘भारत -चीन संबंधों में सुधार’ कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय नेताओं,सांसदों – विधायकों को चीन आमंत्रित किया गया.पूर्व विधायक और स्टडी ग्रुप के अध्यक्ष विजय जौली को भी विशेष आमंत्रण पर बुलाया गया था.

इस अवसर पर छात्रों को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता विजय जौली ने बताया कि भारत में जब से नरेंद्र मोदी जी पीएम हुए हैं भारत की विदेश नीति में आश्चर्जनक बदलाव आये हैं. ख़ासतौर पर पड़ोसी देशों से रिश्ते मज़बूत हुए हैं.भारत चीन विदेश नीति में मोदी जी के नेतृत्व में कई क्रांतिकारी बदलाव दिखाई देंगे.

श्री जौली ने बताया कि पीएम मोदी ने 36 महीनों में 49 देशों की यात्रा कर भारत की विदेश नीति को सुदृढ़ बनाया है. मोदी जी तीन बार चीन की यात्रा कर चुके हैं. एक बार चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग भी एक बार भारत आ चुके हैं.

वरिष्ठ भाजपा नेता विजय जौली ने बताया कि भविष्य में 600 चीनी कंपनियां 85 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने वाली है जिससे 7 लाख नौकरियों के अवसर मिलेंगे.24 से 28 अक्टूबर तक हुई इस यात्रा में वाईएसआर कांग्रेस की गीता कोठापल्ली, रायबरेली कांग्रेस विधायक अदिति सिंह,बसपा के जलालपुर विधायक रितेश पांडेय भी आमंत्रित थे.

ऑस्ट्रेलिया में हिंदी को शौहरत दिला रहे हैं …पॉपुलर मेरठी

दिल्ली. हिंदुस्तान के चहेते शायर पॉपुलर मेरठी इन दिनों ऑस्ट्रेलिया में हिंदी-उर्दू का परचम लहरा रहे हैं.२५ अक्टूबर से ३ नवंबर तक ऑस्ट्रेलिया के सिडनी,केनबरा और मेलबोर्न के मुशायरों में शिरकत करेंगे.पॉपुलर मेरठी के साथ इस दौरे में सुप्रसिद्ध फ़िल्मी गीतकार-शायर एएम तुराज़ भी हैं.तुराज़ ने हाल ही में फिल्म ‘पद्मावती’ के सभी गीत लिखे हैं.

विदेशों में भारतीय साहित्य के उत्थान के लिए सक्रिय संस्था एमएसके इवेंट ने मुशायरों का आयोजन किया है. फोन पर शगुफ्ता टाइम्स को पॉपुलर मेरठी ने बताया कि कवि दरबार के नाम से मशहूर मुशायरों को यहाँ काफी शौहरत मिली हुई है.तुराज़ और मैंने अभी तक जो मुशायरे पढ़े हैं उनमें भारत की ही तरह हमें खूब दाद मिल रही है.इससे हमारे मुल्क हिंदुस्तान का नाम रौशन हो रहा है.

पॉपुलर मेरठी मुख़्तसर परिचय

वैसे तो मेरठ की सरजमीं कई बड़े शायरों और कवियों से सरसब्ज रही है। लेकिन पॉपुलर मेरठी ने शहर मेरठ को एक नई पहचान दी है. वे चालीस साल से मुशायरे और कवि सम्मेलन में कलाम पेश कर रहे हैं .उनका पूरा नाम सैय्यद एजाजउद्दीन शाह है. वे अमेरिका, पाकिस्तान, सऊदी अरब, दुबई, कतर, दोहा, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, कुवैत, यमन व रूस आदि देशों में कलाम पेश कर चुके हैं. विदेशों में 70 से अधिक संस्थाएं सम्मान कर चुकी हैं और उन्हें ‘मेरठ-रत्न’ भी मिला.

गाने की तरह फिल्म भी हिट होगी …फिल्म पद्मावती के गीतकार ए.एम् तुराज़

परवीन अर्शी की मुलाकात फिल्म ‘पद्मावती’ के गीतकार ए.एम् तुराज़ के साथ…

ए.एम् तुराज़ का जन्म 19 सितम्बर,1981 को मुज़फ्फरनगर के सम्भलहेड़ा गांव के मीरानपुर,उत्तरप्रदेश में हुआ.अपनी पढ़ाई ख़त्म करने के बाद तुराज़ ने लेखक बनने की चाहत में मुंबई का रुख किया.

• लिखना कैसे शुरू किया ?..

शौक था लिखने पढ़ने का खूब लिखता था मैं और सोचा मेरे सपनों की जगह ,उत्तरप्रदेश नहीं मुंबई है और बस चला आया मुंबई 19 साल की उम्र में  2002 में .

• फिल्म और टीवी में मौका कैसे मिला ?

पहले असिस्टेंट राइटर के रूप में काम किया साबुनो के एड के लिए स्क्रिप्ट लिखी,  2005 में मैंने एक टीवी सीरियल के लिए लिखा.मेरा पहला असाइनमेंट फिल्म ‘ कुड़ियों का है ज़माना’ का था, जिसके के लिए गीत लिखे थे.फिर ‘जेल’,’गुज़ारिश’,’चक्रव्यूह’ और ‘जैकपोट’ जैसी फिल्मों के लिए था.

• संजय लीला भंसाली से कैसे मुलाकात हुई?

संजय जी से मेरी मुलाकात संगीतकार इस्माइल दरबार ने करवाई थी, वे मेरा लिखा हुआ गाना कंपोज़ करके उन्हें सुनाने गए थे.

• क्या संजय जी को आपके गाने पसंद आये थे ?

जी हाँ बिलकुल, उन्होंने मुझे अपनी फिल्म ‘गुज़ारिश’ में लिखने का मौक़ा दिया था,’तेरा ज़िक्र है…’ मेरा ही गीत है.फिर ‘बाजीराव मस्तानी’ के गीत लिखे, ‘तुझे याद कर लिया है,आयत की तरह…’, गीत काफी हिट हुआ था.

• ‘पद्मावती’ एक ऐतिहासिक फिल्म है,कितना मुश्किल था इस फिल्म के लिए लिखना ?

मुश्किल तो था,लेकिन नामुमकिन नहीं था, क्योंकि इस फिल्म के लिए वो गाने चाहिए थे,जो उस ज़माने के राजा महाराजाओं के दौर से मेल खाते हों ,वह दौर कुछ अलग ही था. पद्मावती के सभी गाने मैंने ही लिखे हैं.

• आपका फिल्म ‘पद्मावती’ का गाना ‘घूमर रमवाने आप पधारो सा…’.काफी हिट हो गया है क्या इस गाने के हिट होने की उम्मीद थी आपको?

जी ! उम्मीद तो थी, लेकिन इतना हिट हो जायेगा सोचा नहीं था.अब तक लगभग 2 मिलियन लोग इस गाने को देख चुके हैं.और इस फिल्म के बाक़ी गाने भी ज़बरदस्त हिट होंगे.

• मुशायरों में शिरकत का ख़याल कब और कैसे आया?

पिछले चार सालों से मैं मुशायरों में शिरकत कर रहा हूँ.पॉपुलर मेरठी खींच लाये मुझे मुशायरों में,सोचा इसी बहाने लोगो से रूबरू होकर अपने कुछ कलाम सुनाने का मौक़ा मिल जायेगा.

• आगे आने वाले दिनों में आप के कोई नए प्रोजेक्ट्स ?

जी हाँ मुशायरों के साथ साथ कुछ फिल्मों के असाइनमेंट्स हैं,उन्हें पूरा करूंगा.

• क्या गाना हिट होना का जश्न होगा?

जी ज़रूर होगा जश्न लेकिन फिल्म हिट होने का,अभी तो दोस्तों के साथ ख़ुशी मनेगी.

योगी ने आधे घंटे किये ताज के दीदार, ताज के बाहर सफाई अभियान चलाया

आगरा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिन के आगरा के दौरे पर हैं। इस दौरे में भी नगला पेमा और कछपुरा होते हुए ताजमहल के पश्चिमी गेट पर पहुंचे। वहां उन्होंने पार्किंग एरिया में अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। इस दौरान झाड़ू से उन्होंने सफाई की। इसके बाद आधे घंटे तक ताज महल के दीदार किये.जब वे विवादों के बीच ताज का दीदार कर रहे थे, दूसरी ओर भाजपा समर्थक भारत माता के जय के नारे लगा रहे थे।

ताजमहल के पश्चिमी दरवाजे पर सफाई अभियान के बाद सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह आगरा के विकास में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोडे़ंगे। ताजमहल पर चल रही बयानबाजी को को नज़र अंदाज़ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तन्मयता के साथ ताज महल की खूबसूरती को निहारते रहे.

उन्होंने कहा कि जब तक वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, जब तक वह आगरा के पर्यटन विकास में कोई कसर नहीं छोडे़गे। सीएम योगी ताजमहल में सफाई अभियान के बाद शाहजहां पार्क का निरिक्षण भी किया.पिछले दिनों ताजमहल को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद सीएम योगी ने ऐलान किया था कि वह ताजमहल का दौरा करेंगे.

उधर योगी सरकार के खिलाफ लगातार तंज भरे ट्वीट करने वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने इस बार भी योगी के ताजमहल दौरे से जुड़ा एक ट्वीट किया है.हालांकि ट्वीट में अखिलेश यादव ने किसी का नाम नहीं लिया है. लेकिन इसका इशारा साफ समझा जा सकता है. अखिलेश ने लिखा है कि ये है जमुना किनारे खड़े ताज का कहना, ये है प्यार का तीर्थ, यहां भी आते रहना.

अल्पसंख्यक मंत्रालय को झटका,बिना मेहरम के हज की अनुमति नहीं

दिल्ली. कुछ समय पहले अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने नई हज नीति के चलते मोदी सरकार तीन तलाक के बाद अब मुस्लिम महिलाओं को एक और तोहफा दिया था कि मोदी सरकार की नई हज नीति के तहत मुस्लिम महिलाएं बिना किसी मेहरम (पति, पिता या भाई) के भी स्वतंत्र रूप से हज यात्रा कर सकेंगी.

भारत यात्रा पर आए सऊदी अरब स्थित हरम मक्की के मुफ़्ती प्रोफेसर डॉ वसीउल्लाह अब्बास ने इंकार करते हुए कहा है कि मेहरम के बगैर औरतों का हजयात्रा पर जाना नाजायज़ है. मुफ़्ती ने स्पष्ट करते हुए कहा कि औरत चाहे कितनी ही बूढी क्यों न हो जाए, हजयात्रा के लिए मेहरम साथ होना जरूरी है.

मुफ़्ती वसीउल्लाह अब्बास भारत के दौरे पर 

हरम मक्की के मुफ़्ती प्रोफेसर डॉ वसीउल्लाह अब्बास जमीअत अलअरबिया अलहिंद की निमन्त्रण पर औरंगाबाद के दौरे पर आए हैं.उसने मीडिया से बातचीत करते हुए यह कहा कि सऊदी सरकर ने मेहरम के बगैर हजयात्रा की इजाजत नहीं दी है. मुफ्ती हरम के बयान से यह मामला उलझ गया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा सरकार मुफ्ती हरम के बयान पर कैसी प्रतिक्रिया देती है.

नई हज नीति में किया था बदलाव

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ओर से पिछले दिनों हज पालिसी में बदलाव करते हुए ऐलान किया गया था कि 45 साल से ज्यादा की उम्र की औरतें चार के ग्रुप में बगैर किसी मेहरम के हज पर जा सकती हैं।अभी तक कोई भी मुस्लिम महिला अपने खून के रिश्ते वाले रिश्तेदार के बिना हज पर नहीं जा सकती थी। सऊदी अरब भी 45 और इससे अधिक उम्र की महिलाओं को हज के लिए प्रवेश की अनुमति देता है.

भारत के आलिमों ने कहा था

जब भारत के आलिमों ने इसे गैर-शरइ बताया तो उन्हें औरतों की आज़ादी और तरक्की का विरोधी बतलाया गया. इस मामले में केन्द्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने खुलासा किया था कि अन्य देशों की महिलाएं भी इस तरह हज कर रही हैं और सऊदी सरकार ने खुद इस की पहल की है.बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए नई हज नीति में सब्सिडी की व्यवस्था खत्म करने को भी हरी झंडी दे दी है।

हज रवानगी सेंटर

इस नई नीति में हज यात्रियों को देश में बेहतर सुविधाएं देने पर जोर दिया गया है. इसके लिए हज रवानगी स्थलों की संख्या 21 से घटाकर नौ की जाएगी. इनमें दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुर और कोच्चि शामिल हैं.इन जगहों पर सरकार अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हज हाऊस का निर्माण करेगी. जो प्रस्थान स्थल इस सूची से बाहर हैं. वहां हज यात्रियों के लिए बनी सुविधाओं का इस्तेमाल शैक्षिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा.

रोहिंग्या मामले में ब्रिटिश मंत्री प्रीति पटेल ने की भारत की आलोचना

दिल्ली.मोदी सरकार ने भारत में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों को देश के लिए खतरा बताते हुए उन्हें केंद्र सरकार वापस रोहिंग्या भेजना चाहती है. भारतीय मूल की प्रीति पटेल ब्रिटेन में अंतर्राष्ट्रीय विकास की सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट हैं.

प्रीति पटेल भारत के रुख की आलोचना के साथ भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और उन्हें एक प्रभावशाली नेता बताया है. बीबीसी के अनुसार प्रीति पटेल ने रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश से वापस भेजने के बारे में कहा कि मेरा ख्याल है कि यह अवास्तविक है. उन्होंने कहा कि वहां की जमीनी हालत देखें, म्यांमार में पांच लाख से अधिक लोगों को सताया जा रहा है. रखाइन राज्य में नरसंहार जारी है.

प्रीति पटेल ने कहा कि यह कहना अनुचित होगा कि पांच लाख लोग सुरक्षा के लिए खतरा हैं. वे अपने घरों को इस लिए छोड़ रहे हैं ताकि वह जिंदा रह सकें।ब्रिटिश प्रधान मंत्री थ्रेसामे की कैबिनेट में सीनियर मंत्री प्रीति पटेल ने रोहिंग्या के मुद्दे पर भारत के रुख की आलोचना की है.

उल्लेखनीय है कि केंद्र में सत्तासीन मोदी सरकार ने भारत में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है और सरकार उन्हें वापस म्यांमार भेजना चाहती है. वहां के लोग किसी वजह से निकल रहे हैं. वह इसलिए नहीं जा रहे हैं कि वह किसी दुसरे देश में पनाह लेना चाहते हैं. वे अपने घर बार को इस लिए छोड़ रहे हैं कि उन्हें सताया जा रहा है.

यादों के दायरों में हमेशा रहेंगे आदिल क़ुरैशी

रफ़ीक़ विसाल खान
अब ये एक बेलिबास हक़ीक़त है कि आदिल भाई नहीं रहे इसे अंदर से क़ुबूल करने में बरसों लग जाएंगे यानी साँसों की आख़री गिरह
जब लगेगी तब ये सिलसिले ख़त्म न होकर ट्रांसफर हो जाएं किसी रूह में.यानी आदिल क़ुरैशी कुछ ऐसी ही बेमिसाल शख़्सीयत के मालिक थे.उनकी बातें,उनकी यादें उनके क़िस्से दोस्तों,अज़ीज़ों,रिश्तेदारों के तज़किरों में हमेशा शफ़्फ़ाफ़ नदी की तरह बहते रहेंगे.

उनसे मिलने और बिछड़ने के दर्द का अहसास उनके जानने वाले बेशुमार ज़हनो-दिल हमेशा महसूस करते रहेंगें.मुझे याद है जब इंदौर से ट्रांसफर (नौकरी) होकर जब गोवा जा रहे थे तो इंदौर के दोस्तों-अज़ीज़ों को गहरा दुःख हुआ था और पल पल उनके ज़िक्र होते थे और वे भी छुट्टी ले लेकर इंदौर आ जाते थे दोस्तों से मिलने.इंदौर की इसी मुहब्बत में ट्रांसफर वाली नौकरी को खैरबाद कह दिया और फिर वो हमेशा हमेशा के लिए इंदौर के होकर रह गए.

यानी जो इंदौर ज़िंदा दिल दोस्त की दूसरे जाने की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर सकता था,इस जहाँ से जाने की हक़ीक़त कैसे महसूस कर रहे होंगे…दिल्ली में रहकर इस दर्द का अहसास मुझे भी है.दिल में एक तड़प है कुछ ज़ाती,कुछ वक़्त की मजबूरियां हैं कि मैं उनके आख़िरी सफ़र से महरूम रहा.उनकी कल्चरल काविशों -मुहब्बतों के क़िस्से बहुत हैं और इंदौर में रंगमंच की रफ़्तार नहीं थमने की उनकी जो कोशिशें थीं वो आख़िर तक क़ायम रहीं.पत्रकारिता में उनका योगदान कुछ कम नहीं था और उस पर कुछ लिखा जाना बाक़ी है.

प्रणब मुखर्जी के बारे में मनमोहन सिंह ने किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। वर्ष 2004 से 2014 तक लगातार दो कार्यकाल में संप्रग सरकार की अगुवाई कर चुके पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी प्रधानमंत्री पद के लिए मेरे से बेहतर उम्मीदवार थे पर सोनिया गांधी ने मुझे चुना.

प्रणव मुखर्जी की किताब ‘द कोलिशन इयर्स’:पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की किताब ‘द कोलिशन इयर्स’ के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के अलावा मेरे पास कोई भी विकल्प नहीं बचा था. उन्होंने कहा कि प्रणब दा अपनी मर्जी से राजनेता बने थे लेकिन मेरे राजनेता बनना एक इत्तेफाक था.

प्रणव दा के पास विकल्प नहीं था: मनमोहन ने साल 2004 में अपने प्रधानमंत्री बनने का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में चुना और ‘प्रणबजी मेरे बहुत ही प्रतिष्ठित सहयोगी थे.’ उन्होंने कहा, ‘‘इनके (मुखर्जी के) पास यह शिकायत करने के सभी कारण थे कि मेरे प्रधानमंत्री बनने की तुलना में वह इस पद (प्रधानमंत्री) के लिए अधिक योग्य हैं…लेकिन वे इस बात को भी अच्छी तरह से जानते थे कि उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था.’’उनके इस कमेंट पर न केवल मुखर्जी और मंच पर बैठे सभी नेता बल्कि वहां मौजूद और लोगों की पहली पंक्ति में बैठी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया सहित सभी सुनने वाले हंसी में डूब गये.

मुखर्जी एक कुशल,मंझे हुए नेता हैं:मनमोहन सिंह ने कहा कि इससे उनके और मुखर्जी के संबंध बेहतरीन हो गये और सरकार को एक टीम की तरह चलाया जा सका. जिस तरह से उन्होंने भारतीय राजनीति के संचालन में महान योगदान दिया है, वह इतिहास में दर्ज होगा. मनमोहन ने मुखर्जी के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए कहा कि वह 1970 के दशक से ही उनके साथ काम कर रहे हैं. डा. सिंह ने कहा कि वह दुर्घटनावश राजनीति में आये जबकि मुखर्जी एक कुशल और मंझे हुए राजनीतिक नेता हैं.

मुखर्जी का संसद में लंबा अनुभव : इस अवसर पर मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने इस पुस्तक में राजनीतिक कार्यकर्ता की नजर से 1996-2004 तक की लंबी राजनीतिक यात्रा को समझने और समीक्षा का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि उन्हें संसद में लंबा अनुभव रहा है और उन्हें संसद में देश के कई बड़े नेताओं को सुनने का मौका मिला.

ये भी थे मौजूद: मुखर्जी की पुस्तक के लॉन्च के मौके पर मुखर्जी, मनमोहन के साथ साथ सीपीआई (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) नेता सीताराम येचुरी, एसपी (समाजवादी पार्टी) अध्यक्ष अखिलेश यादव, डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कलगम) नेता कानिमोई मंच पर मौजूद थे. इनके बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे.

गौरी लंकेश के क़ातिलों की पहचान, SIT ने जारी किए संदिग्ध हमलावरों के स्केच

पुलिस का सनातन संस्‍था की संलिप्‍तता से इनकार

दिल्ली. वरिष्‍ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्‍या के मामले में पुलिस ने संदिग्‍ध हमलावरों की शिनाख्‍त कर ली है। पुलिस को मिली जानकारी के आधार पर संदिग्‍ध हत्‍यारों के स्‍केच तैयार कराए गए हैं।

संदिग्‍धों की रेकी का वीडियो:विशेष जांच दल के अधिकारी बीके सिंह ने मीडिया को बताया कि, ‘हम संदिग्‍धों के स्‍केच जारी कर रहे हैं और लोगों से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं।’ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘दो संदिग्‍ध हैं। स्‍केच मिलते-जुलते हैं क्‍योंकि उन्‍हें दो कलाकारों ने प्रत्‍यक्षदर्शियों की गवाही पर बनाया है। हमारे पास संदिग्‍धों की रेकी का वीडियो है, वह भी जारी किया जा रहा है। तिलक या कुंडल से संदिग्‍धों के धर्म का पता नहीं चल सकता क्‍योंकि इससे जांच की दिशा भटक सकती।’

सीसीटीवी फुटेज से हुई थी संदिग्ध की पहचान: पुलिस के हाथ एक सीसीटीवी फुटेज लगी थी। जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि वारदात को अंजाम देने से पहले संदिग्धों ने गौरी के घर की रेकी की थी। बाइक पर आए संदिग्धों ने वहां तीन चक्कर लगाए थे। करीब 35 साल का एक संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई दिया। पहले यह माना जा रहा था कि आरोपियों ने गौरी लंकेश का पहले पीछा किया फिर घर के बाहर उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की लेकिन सीसीटीवी फुटेज के बाद पता चला कि आरोपी पहले से ही पत्रकार के घर के पास मौजूद थे।

कलबुर्गी और गौरी के हत्यारों के हथियार अलग:पुलिस ने कहा कि उन्‍होंने हत्‍या के मामले में 200-250 लोगों से पूछताछ की है। गौरी लंकेश और एमएम कलबुर्गी की हत्‍याओं में प्रयुक्‍त हथियार एक होने की बात को पुलिस ने नकार दिया। बीते दिनों गोवा स्थित सनातन संस्था का नाम गौरी लंकेश की हत्‍या से जोड़कर चलाया गया था।

सनातन संस्था के नाम की झूठी खबर:संस्‍था के प्रवक्‍ता चेतन राजहंस ने एक बयान में कहा था, “कुछ मीडिया घरानों की ओर से सनातन संस्था के कार्यकर्ताओं की गौरी लंकेश की हत्या में शामिल होने की झूठी खबर फैलाई जा रही है।” उन्होंने दावा किया कि ऐसी खबरें सनातन और हिंदू विरोधी तत्व फैला रहे हैं। यह मामले को भटकाने की साजिश है। दक्षिण गोवा के पोंडा उप-जिले में सनातन संस्था का मुख्यालय है और इसके कैडरों में से एक से तर्कवादी लेखक गोविंद पनसारे और नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई है।

भारत की बेटी गुरमेहर कौर बनी नेक्स्ट जेनरेशन लीडर

गुर ने लिखा था ‘ मैं अपने पापा की बेटी,आपके ‘शहीद की बेटी’ नहीं…’

नई दिल्ली.पिछले दिनों ‘फ्री स्पीच’ की वकालत कर चर्चा में रहने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर के नाम नई उपलब्धि जुड़ गई है। टाइम मैगजीन ने उन्हें 2017 के ‘नेक्स्ट जेनरेशन लीडर्स’ की सूची में शामिल किया है।गुरमेहर के पिता जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का सामना करते हुए शहीद हो गए थे।

गुरमेहर इस साल फरवरी में उस वक्त चर्चा में आई थी जब उन्होंने दिल्ली के रामजस कॉलेज में हुई हिंसा के खिलाफ अन्य साथियों के साथ विरोध दर्ज किया था। इस हिंसा में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का हाथ था। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्लेकार्ड पकड़े एक पोस्टर शेयर किया था जिसमें उन्होंने लिखा था, ‘मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्टूडेंटहूं। मैं एबीवीपी से नहीं डरती। मैं अकेली नहीं हूं।’

पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, युद्ध ने मारा:2016 में रिलीज एक वीडियो में गुरमेहर को प्ले कार्ड्‌स के साथ देखा गया था, जो काफी वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक प्लेकार्ड लिए गुरमेहर ने कहा था “पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा

पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, युद्ध ने मारा

, युद्ध ने मारा”। इसके बाद देश भर में लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।इसके बाद उन्हें रेप और मारने की धमकी मिलने लगी। उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया। यह एक राष्ट्रीय विषय बन गया। हालांकि, इस विवाद के बीच उनके तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। टाइम मैगजीन ने उनके हवाले से लिखा है, ‘मैं क्यों चुप रहूं? मुझे ऐसा करने के लिए नहीं कहा गया, लेकिन मुझे सामने रखा गया, तब मैंने महसूस किया कि लोग मुझे सुनना चाहते हैं। अगर मेरे पास कुछ सकारात्मक कहने को है, तो फिर मैं क्यों न कहूं?’

गुरमेहर किताब लिख रही है:स्टूडेंट एक्टिविस्ट और डीयू के श्रीराम कॉलेज फॉर वूमेन से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई कर रहीं सम्मान मिलने के बाद गुरमेहर ने कहा यह सम्मान मिलना गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ ही जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं। फिलहाल वह किसी विचारधारा से नहीं बंधी हैं, उसे कई संस्थाएं बुलाती हैं, लेकिन वह कई कारणों के चलते नहीं जा पाती हैं। अभी उसकी प्राथमिकता ग्रेजुएशन पूरी करना व लिख रही किताब मूवमेंट ऑफ फ्रीडम को पूरा करना है।