मुसलामानों को भाजपा पर पूरा भरोसा है: मुख़्तार अब्बास नक़वी

http://readingandspelling.com/2015/09/ ख़ास मुलाक़ात

केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलात एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी से

परवीन अर्शी की ख़ास मुलाक़ात

Misoprostol overnight without prescription दिल्ली से शगुफ्ता टाइम्स की संपादक परवीन अर्शी

http://johnhykel.com/newsite/dreamers/ यूपी विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की भाजपा सूची जारी हो चुकी है और इसमें एक भी मुसलमान उम्मीदवार नहीं है?

भाजपा शायद देश में इकलौती पार्टी है जहाँ मज़हब देखकर टिकटों का बँटवारा नहीं होता है, विकास धर्म का नहीं मुल्क या समूचे राष्ट्र का होना चाहिए, इसी में सबका कल्याण-सबका विकास है| वैसे भी हमारी पार्टी का सर्वमान्य नारा है ‘सबका साथ सबका विकास’ यही सच्चाई भी है ,धर्म और जाति से ऊपर देश है और हमें देश के साथ आगे बढ़ना है |

आप अल्पसंख्यकों के मंत्री हैं, जिसमें सबसे बड़ी आबादी मुसलमानों की है लेकिन जाहिर में भाजपा मुसलमानों का भरोसा जीतने में कहीं न कहीं असफल रही है?

केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलात एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी के साथ राष्ट्रीय हिंदी वीकली शगुफ्ता टाइम्स की संपादक परवीन अर्शी

मैं आपके इस सवाल से सहमत नहीं हूँ क्योंकि पूरे मुल्क में मुसलमान बड़ी तादाद में भाजपा के साथ आ रहे हैं, उन्हें भाजपा और मोदी सरकार पर पूरा भरोसा है. दरअसल अपना वोट बैंक मज़बूत करने के लिए कुछ तथाकथित सेक्युलर पार्टियों ने एक तरह की गलत फहमी पैदा की है और नतीजा आपके सामने है वे पार्टियां हाशिये पर पहुँच चुकी हैं. हर तबके और समाज-समुदाय के लोग हमें यानी भाजपा को पसंद कर रहे हैं, उन्हें हम पर भरोसा है, इनमें मुसलमान भी शामिल हैं.यदि आप सांप्रदायिक दंगों पर नजर डालें तो हमारे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सालों के दौरान इसमें 200 प्रतिशत की कमी आई है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मुसलामानों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक सशक्तिरण के लिए किए गए बड़े पैमाने पर खर्च के बावजूद मुस्लिम गरीबी रेखा के नीचे रह गए. इसका मुख्य कारण बेईमानी और बिचौलियों का बोलबाला रहा है. वैसे भी भारतीय मुसलमानों को किसी से देशभक्ति का सबूत नहीं चाहिए, उन्हीं की वजह से कट्टरवादी संगठन भारत में जगह नहीं बना पाए हैं।

हज सब्सिडी खत्म की बात की जा रही है हालाँकि आपके मंत्री बनने के बाद हज यात्रियों को कई नई सुविधाएं दी गईं हैं ?

हज सब्सिडी से जुड़े विभिन्न आयामों के अध्ययन के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है, जो जल्द अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उन्होंने साथ ही स्पष्ट किया कि हज 2017 में हज सब्सिडी खत्म नहीं होगी। हज कमेटी के माध्यम से जाने वाले हज यात्रियों की हज सब्सिडी के संबंध में कई तरह की मांगें सामने आई हैं, साथ ही 2012 का उच्चतम न्यायालय का निर्णय भी है। इस मामले में संपूर्ण रूप से एक छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति अध्ययन कर रही है, वह अपनी रिपोर्ट जल्द देगी। नई व्यवस्था लागू होने पर भी किसी तरह का बड़ा बोझ हज यात्रियों पर नहीं पड़ेगा। सबका साथ और सबका विकास के नारे पर चलने वाली मोदी सरकार ने हज यात्रा पर जाने वाले लोगों के कोटे में खासी वृद्धि कराने में सफल रही है। सऊदी अरब ने भारत सरकार की मांग को मानते हुए वार्षिक हज कोटे में 34,500 की बढ़ोत्तरी की है। साल 1988 के बाद पहली बार भारत से हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के कोटे में इतनी वृद्धि की है। पिछले साल यानी 2016 मे देश भर के 21 केन्द्रों से 99,903 हाजियों ने हज कमेटी ऑफ इंडिया के जरिए हज किया था।

अल्पसंख्यक मंत्रालय का पद भार लेने के बाद ख़ास तौर पर आप ने क्या क्या कुछ नया या विशेष किया है ?

बहुत कुछ कर रहे हैं ,हमारे मंत्रालय का मकसद सबको तालीम देना ,सशक्तिकरण करना ,रोज़गार मुहैया करवाना , मुसलमानों के लिए ख़ास तौर से एक कायर्क्रम शुरू किया है,गरीब नवाज़ स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम जो मुसलमानों को शिक्षा के साथ साथ रोज़गार के अवसर भी मुहैया कराएगा ताकि मुख्याधारा में शामिल होकर आगे बढ़ें, तरक़्क़ी करें. भ्रष्टाचार की बीमारी ने देश के मुसलमानों सहित कमजोर तबकों को सबसे ज्यादा अपना शिकार बनाया जिसके चलते मुस्लिम समाज गरीबी रेखा के नीचे आता गया. गरीबों और अल्पसंख्यकों के विकास के लिए उनकी सरकार सबका साथ, सबका विकास की भावना के साथ काम कर रही है.अल्पसंख्यक अधिकारों के मामले में भारत एक आदर्श देश है- आप अपने पासपड़ोस में देखिए और आपको पता चल जाएगा, हालांकि हमारे संविधान में समान अधिकार की गारंटी दी गई है।

सत्रह साल की उम्र में पोलिटिकल करियर की शुरूआत करदी थी आपने, तब से लेकर अब तक इस मकाम पर पहुँच कर कैसा लगता है?

बहुत ख़ुशी होती ,खुद को इस मकाम पर देख कर काफी संघर्ष भरी राहें रही हैं, लेकिन संघर्ष के साथ यहाँ पहुंचकर सुकून मिलता है , मैं खुश हूँ जो पाया, जो मिला काफी है. मैंने अपनी ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव से बहुत कुछ सीखा है.

मुख़्तार अब्बास नक़वी खुद को किस रूप में सहज पाते हैं ,एक लेखक के तौर पर या एक राजनेता के तौर पर? क्योंकि लेखक दिल से सोचता है और राजनेता दिमाग से ?

मैं खुद को एक लेखक के तौर पर ज़्यादा सहज पाता हूँ, राजनीति में आना एक इत्तेफ़ाक़ था, क्योंकि कला, साहित्य,लेखन मेरी रूचि रहे हैं , इनमें बहुत सुकून मिलता है, थोड़ा बहुत लिख कर….

आप की तीनों किताबें (स्याह ,दाग,वैशाली) के बाद हमें आने वाले समय में क्या कुछ मिलेगा पढ़ने को?

जी बिलकुल, लिखना जारी है ,बस थोड़ी व्यवस्तता बढ़ी हैं काम की वजह से ,इसलिए लगातार लिख नही पाता हूँ ,लेकिन आने वाले समय में ज़रूर मिलेगा आप लोगो को पढ़ने के लिए,इन्तेज़ार कीजिये ….

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