कुछ सवाल जो जनता बता रही हैं कितनी पास कितनी फेल सरकार …परवीन अर्शी

here सरकार का रिपोर्ट कार्ड पब्लिक की नज़रो मे,  इन चार सालो मे  सरकार ने  मुसलमानो को किया नज़रअंदाज़ ,दलितों के साथ भेदभाव ,महिलाये बच्चे असुरक्षित कानून का डर खौफ ख़त्म होता जा रहा हैं असामाजिक तत्वों के बिच,रोज़गार नहीं हैं ,शांति नहीं हैं महंगाई सर से ऊपर चली गई.

online Seroquel buy नई दिल्ली के कंस्टीटूशन क्लब मे एक समावेशी भारत का निर्माण सिटीजन कॉन्क्लेव चल रहा हैं , या यूँ  कहे की मोदी सरकार के काम काज का अवलोकन किया जा रहा हैं.कि मोदी सरकार कितनी पास कितनी फेल. जिसमे सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाश्मी हर्षमंदर,अपूर्वानंद के साथ साथ कई दिग्गज हस्ती शामिल हैं कार्यक्रम का मकसद देश मे हो रही उन घटनाओ की ओर ध्यान दिलाना हैं जिन्हे हम अमूमन नज़र अंदाज़ कर देते हैं.

 

सरकार के रव्वैये से नाराज़गी जाहिर करते हुए  वक्तगण ने अपने शब्दों मे कई मुद्दे और कई घटनाओ का जिक्र करते हुए कहा की आज के हालत बिलकुल भी ठीक नहीं हैं सब चीज़े हाथो से छूट टी जारही हैं  .बेटियां ,महिलाये ,बच्चे सभी असुरक्षित हैं साथ ही रोज़गार नहीं हैं किसान मर रहे हैं ,कानून का कोई डर नहीं हैं. अपराधियों मे ,पुलिस सुनती नहीं हैं और नेता मौज ले रहे हैं ,कैसे देश आगे बढ़ेगा .कहा जा रहे हैं हम लोग.

प्रोग्राम मे आई वक्ता रचना (किन्नर ) हैदराबाद से जो की वेब सीरीज ट्रन्सवरसन चलाती हैं .रचना ने एक घटना का ज़िक्र करते हुए बताया कीपुछताछ के नाम पर पुलिस उसकी साथी प्रवल्लिका को उठा ले गए. तहकीकात के नाम पर हिजड़े को नंग्गा बिठा रखा था . चार घंटे थाने मे सिर्फ ये पहचान करने की ये कौन हैं . औरत हैं या मर्द ये करती हैं पुलिस .ये हैं सच्चाई देश मे चल रही मनमानी की .आखिर कौन हैं दोषी ,पब्लिक , पुलिस या सरकारे कोई तो होगा दोषी, इतनी बर्बरता , शर्म आती हैं . ऐसे समाज पर ऐसे लोगो पर जो किसी की मजबूरी को मज़ाक बना देते हैं.

 

मर्डरर छूट जाता हैं न्याय नहीं मिला प्रवल्लिका को ,ये कोई भूल नहीं ,गलती नहीं, क्राइम हैं ये .बहुत अरसे से होता आ रहा हैं ये ,२०१४ मे सुप्रीमकोर्ट ने (जस्टिस सिकरी और जस्टिस राधा कृष्णन) ने जो फैसला दिया था .२०१६ मे उसे पलट दिया गया. बिल के नाम पर, हिजड़ो को हमेशा से इस्लाम के लोगो से ही मदद मिली हैं. लेकिन उन्हे हिजड़े से किन्नर कहा जा रहा हैं ,किन्नर हिंदी मे कहा जाता हैं जो की हिन्दू प्रथा मे पहले इस्तेमाल होता था.

हिन्दू धर्म संकट मे हैं कहकर सरकार दे रही हैं नसीहत ज़्यादा बच्चे पैदा करने की. औरत का शरीर भले ही इज़ाज़त ना दे .औरतो का उसके शरीर पर कोई अधिकार नहीं हैं क्या ?मुसलमान भी नहीं रुक रहे हैं ,लगे हैं ज़्यादा बच्चे पैदा करने मे ये भी एक समस्या और सच्चाई हैं. बच्चो की तालीम पर ध्यान देगे तभी मुसलमान के हालत सुधरेगे . ऐनी राजा (सोशल एक्टिविटिस्ट)

लोग मुझे इग्नोर करते हैं क्यूंकि कि मैं हिजाब नहीं करती हूँ. हालाँकि मैं कुरआन पढ़ती हूँ . रोज़े रखती हूँ . लेकिन आडम्बर से दूर हूँ  ये मेरा और मेरे अल्लाह का मसला हैं . हिजाब या आडम्बर से ही मुसलमान दिखू ये ज़रूरी तो नहीं. हमे पढ़ाई पर ज़्यादा ध्यान देना होगा बच्चो कि तालीम बहुत ज़रूरी हैं .तभी मुसलमान ओर देश के सारे तबके ऊपर उठ पाएंगे आज मुसलमान औरते तालीम लेकर भी घर गृहस्थी के काम मे लगी हुए हैं .अपनी तालीम का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं.समाज को बदलना होगा मुख्यधारा  मे आने के लिए .
सईदा हामिद ( सोशल एक्टिविस्ट )

Please follow and like us: