पंजाब में भारी बारिश और डैम से छोड़े गए पानी ने तबाही मचा दी है। राज्य के सात जिले बाढ़ की चपेट में हैं और लगभग डेढ़ लाख एकड़ में बोई गई धान, गन्ना और मक्की की फसल पूरी तरह डूब चुकी है। किसानों के अनुसार, ऐसा भयावह मंजर 37 साल बाद देखने को मिला है। इससे पहले वर्ष 1988 में ऐसी स्थिति बनी थी।
रणजीत सागर और पौंग डैम से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण बॉर्डर जिलों पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर के करीब 250 गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। तरनतारन के अजनाला क्षेत्र में हालत सबसे ज्यादा गंभीर हैं, यहां तक कि बीएसएफ की चौकियां भी पानी में डूब गई हैं और करीब 360 जवान फंसे हुए हैं। कई गांवों में पानी का स्तर 5 से 10 फीट तक पहुंच गया है, जिससे लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों में डर का माहौल है।

खेतों में बने मोटर रूम तक डूब गए हैं और केवल उनकी छतें ही दिखाई दे रही हैं। हालात इतने खराब हैं कि पशु भी 5 फीट तक पानी में खड़े रहने को मजबूर हैं। 50 से ज्यादा बॉर्डर विलेज ऐसे हैं जहां अब तक राहत सामग्री भी नहीं पहुंच सकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 1988 की बाढ़ भी इतनी खतरनाक नहीं थी। 2023 में भी इन गांवों की ढाई लाख एकड़ फसल डूब गई थी, लेकिन उस समय पानी धीरे-धीरे बढ़ा था जबकि इस बार पानी अचानक तेजी से बढ़ा और लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। प्रशासन और राहत दल लगातार बचाव कार्य में जुटे हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं।
