सराफा बाजार में रात्रिकालीन चौपाटी के संचालन को लेकर नगर निगम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। महापौर परिषद द्वारा गठित समिति ने चौपाटी से जुड़ी समस्याओं और संभावित खतरों का उल्लेख करते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सराफा चौपाटी में प्रतिदिन लगभग 200 दुकानें लगाई जाती हैं, जिनमें एलपीजी गैस सिलेंडरों का उपयोग होता है। भीड़-भाड़, विशेषकर शनिवार और रविवार को, हादसे और जनहानि की आशंका बढ़ा देती है। इसी को देखते हुए समिति ने सुझाव दिया कि चौपाटी को वैकल्पिक स्थानों जैसे लालबाग, हरसिद्धि, गांधीहॉल परिसर या शांतिपथ पर स्थानांतरित करने पर विचार किया जा सकता है, जहां नगर निगम द्वारा पार्किंग और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से समिति ने चौपाटी में इलेक्ट्रिक या इंडक्शन चूल्हों के उपयोग पर जोर दिया है। साथ ही, पिछले वर्षों में शुरू हुए चाइनीज फूड विक्रय पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव भी दिया गया है। वहीं, पारंपरिक पहचान बनाए रखने के लिए केवल रबड़ी, मालपुआ, जलेबी, गराडू, भुट्टे का किस, कुल्फी, खिचड़ी, गजक जैसे व्यंजनों वाले दुकानदारों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है।
नगर निगम ने एलपीजी के स्थान पर पीएनजी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाने की योजना बनाई है। महापौर परिषद ने हाल ही में हरदा और अन्य जगहों पर हुई घटनाओं से सबक लेते हुए कहा कि शहरहित में सुरक्षा सर्वोपरि है, परंपरा को भी सुरक्षित रखा जाएगा।
अंततः निर्णय लिया गया कि केवल पारंपरिक व्यंजनों वाले दुकानदारों को अनुमति दी जाएगी और सराफा चौपाटी की मूल धरोहर को पुनः स्थापित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।