संघ प्रमुख ने कहा: सरकार फैसले खुद लेती है, हम सिर्फ सुझाव देते हैं; 75 की उम्र में रिटायरमेंट की अफवाहें बेबुनियाद
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि भाजपा और संघ में किसी तरह का विवाद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हमारे सभी सरकारों से अच्छे संबंध रहे हैं। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं हैं।”
सरकार के फैसलों पर संघ की भूमिका
भागवत ने कहा कि यह धारणा गलत है कि सरकार के फैसले संघ तय करता है। उन्होंने कहा – “हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन फैसले सरकार ही लेती है। अगर हम फैसले करते तो इतना समय नहीं लगता।”
रिटायरमेंट पर जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छह दिन पहले 75 वर्ष के हो रहे भागवत से रिटायरमेंट को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा – “मैंने कभी नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को 75 साल की उम्र में रिटायर हो जाना चाहिए। हम वही करेंगे जो संघ तय करेगा।”

नए बिल और नेताओं की छवि
पीएम और सीएम को जेल जाने पर पद से हटाने वाले नए बिल पर उन्होंने कहा कि नेतृत्व और नेताओं की छवि साफ होनी चाहिए। इस पर कानून बनाना है या नहीं, ये संसद तय करेगी।
आरएसएस के 100 साल और संवाद कार्यक्रम
दिल्ली के विज्ञान भवन में आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। अंतिम दिन प्रश्नोत्तर सत्र में भागवत ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।
भागवत की स्पीच की प्रमुख बातें
- अन्य राजनीतिक दलों के साथ संबंध : प्रणव मुखर्जी संघ के मंच पर आए तो उनकी गलतफहमी दूर हुई। अन्य दलों का भी मन परिवर्तन हो सकता है।
- हिंदू-मुस्लिम एकता : दोनों पहले से एक हैं, सिर्फ पूजा की पद्धति अलग है। विभाजन और डर का माहौल खत्म होना चाहिए।
- डेमोग्राफी और धर्म परिवर्तन : जनसंख्या का संतुलन जरूरी है, लोभ-लालच से धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
- घुसपैठ : सभी का डीएनए एक है, लेकिन देश अलग हैं। नियम-कानून तोड़कर घुसपैठ नहीं होनी चाहिए।
- शहरों-रास्तों के नाम बदलना : आक्रांताओं के नाम नहीं होने चाहिए, लेकिन मुसलमान नाम हटाने का अर्थ नहीं है।
- अखंड भारत : यह राजनीतिक विचार नहीं, सांस्कृतिक भावना है।
- काशी-मथुरा : संघ आंदोलन नहीं करेगा, लेकिन हिंदू समाज का आग्रह रहेगा।
- हथियार और शांति : युद्ध के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए हथियार जरूरी हैं।
- जनसंख्या नीति : अधिकतम तीन बच्चों की नीति होनी चाहिए, ताकि संतुलन और विकास संभव हो।
- शिक्षा नीति : नई शिक्षा नीति में संस्कृति और पंचकोशीय शिक्षा जरूरी है। अंग्रेज़ी सीखें लेकिन हिंदी और संस्कृत की पहचान बनाए रखें।